छत्तीसगढ़ विधानसभा में कस्टोडियल डेथ पर संग्राम, 13 महीनों में 66 बंदियों की मौत, जीवन ठाकुर मामले पर हंगामा और विपक्ष का वॉकआउट

Custodial Death in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन सदन में कस्टोडियल डेथ का मुद्दा गूंजा। प्रश्नकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 तक राज्य की जेलों में हुई मौतों का आंकड़ा मांगा और जेलों में क्षमता से 150 प्रतिशत ज्यादा कैदियों की मौजूदगी पर भी सरकार को घेरा। गृहमंत्री और डिप्टी CM विजय शर्मा ने जवाब में बताया कि 13 महीनों की अवधि में प्रदेश की जेलों में कुल 66 बंदियों की मौत हुई है। इनमें से 18 मामलों में मजिस्ट्रेट जांच पूरी हो चुकी है, जबकि 48 प्रकरणों में जांच प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि साल 2011-12 की तुलना में 2025 में कस्टोडियल डेथ के मामलों में कमी आई है। साल 2025 में कुल 55 मौत दर्ज की गई।
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सदन में बघेल ने विशेष रूप से जीवन ठाकुर और पंकज साहू की मौत का मामला उठाया। इस पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पंकज साहू का मामला प्रश्नकाल की निर्धारित अवधि के बाहर का है, जबकि जीवन ठाकुर का नाम सूची में शामिल है। भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि जीवन ठाकुर को फर्जी मामले में फंसाया गया, उन्हें और उनके बेटे को जेल में अलग रखा गया, परिजनों और विधायकों से मिलने नहीं दिया गया। डॉक्टर की सलाह के बावजूद अस्पताल में भर्ती नहीं कराया गया। उन्होंने इसे सरकारी हत्या करार देते हुए विधानसभा समिति से जांच की मांग की। इस पर विजय शर्मा ने कहा कि जीवन ठाकुर जेल में परहेज नहीं करते थे और उनका शुगर स्तर बढ़ जाता था। जेल अधीक्षक की ओर से कोर्ट में प्रस्तुत तथ्यों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि समय-समय पर चिकित्सकीय परीक्षण हुआ, दवाइयां दी गईं और इलाज में कोई लापरवाही नहीं हुई।
अपराध के आंकड़ों पर भी बहस
उन्होंने कहा कि बाद में उन्हें रायपुर लाया गया और मिलने-जुलने पर कोई रोक नहीं थी। जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदियों के मुद्दे पर मंत्री ने स्वीकार किया कि कैदियों की संख्या क्षमता से ज्यादा है, लेकिन नई बैरकों के निर्माण की प्रक्रिया जारी है। इसके बाद कस्टोडियल डेथ के मुद्दे पर कांग्रेस विधायकों ने जोरदार नारेबाजी की। कांग्रेस विधायक सावित्री मंडावी ने गिरफ्तारी और जेल स्थानांतरण प्रक्रिया पर सवाल उठाए। सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने जीवन ठाकुर की मौत को सरकारी हत्या बताते हुए सदन की समिति से जांच की मांग की और आखिर में वॉकआउट कर दिया। सदन में हत्या, लूट और फिरौती के मामलों में 35 प्रतिशत वृद्धि का मुद्दा भी उठा। (Custodial Death in Chhattisgarh)
नव्या मलिक और ड्रग मामलों पर चर्चा
इस पर विजय शर्मा ने दावा किया कि प्रदेश में हत्या के मामलों में 3 प्रतिशत और लूट में 10 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन के 26 महीनों की तुलना में भाजपा सरकार के कार्यकाल में लूट की घटनाओं में 14 प्रतिशत कमी दर्ज की गई है। सदन में ड्रग प्रकरणों को लेकर भी चर्चा हुई। भूपेश बघेल ने 282 ड्रग मामलों की सूची में नव्या मलिक का नाम नहीं होने पर सवाल उठाया। मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि 282 मामलों में से 206 में चालान पेश किया जा चुका है और 662 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। संबंधित प्रकरण की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया। बजट सत्र के चौथे दिन कस्टोडियल डेथ, जेलों की भीड़भाड़ और कानून-व्यवस्था के आंकड़ों को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
कौन थे जीवन ठाकुर और पंकज साहू ?
जीवन ठाकुर छत्तीसगढ़ के आदिवासी और कांग्रेसी नेता थे, जिनकी 4 दिसंबर 2025 को न्यायिक हिरासत में रहने के दौरान जेल में बीमारी के कारण मौत हो गई थी। उन्हें पहले कांकेर जेल में रखा गया था और बाद में स्वास्थ्य खराब होने पर रायपुर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई, जिसके बाद प्रशासन ने जांच भी शुरू की थी। हालांकि परिवार और आदिवासी समाज ने उनके केस की जानकारी और इलाज न मिलने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया था, जिसमें कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता भी शामिल हुए थे। बता दें कि जीवन ठाकुर को वन पट्टा से संबंधित फर्जी दस्तावेज के मामले में कांकेर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वहीं पंकज साहू भी एक कैदी था, जिनकी मौत भी जेल में हुई थी। जीवन ठाकुर की मौत की जांच को लेकर टकराव अभी थमता नजर नहीं आ रहा है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक रूप से गर्म रह सकता है।



