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16 सितम्बर 2021 : आज गुरुवार के अनिष्ट नाशक एवं सफलता के लिए करें यह उपाय, बरसेगी कृपा

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आज के उपाय : 16 सितम्बर 2021, दिन – गुरुवार। ग्रह जन्य अनिष्ट निवारण के उपाय 

रोजगार, व्यापार या कार्य विशेष हेतु प्रस्थान के पूर्व-भोजन ग्रहण या उपयोग करना चाहिए। घर से निकलने से सरसों के मुंह में डालकर निकलें, दही या  बेसन के लड्डू खाकर निकलना चाहिए।

दान पदार्थ : गाय का घी या गाय के घी का दीपक।आज गौ माता का दर्शन अत्यंत फलदायी हैं। गौ दुग्ध / दही / मठा, भोजन में शामिल करना उपयोगी होगा।

कार्य के पूर्व  : यम की पूजा करनी चाहिए। रोगों को नष्ट और नरक से सुरक्षा प्रदान करती हैं। दक्षिण दिशा में मुह कर -ॐ यमाय नम:।।
वृष, कन्या, मीन  राशी वाले बाधा नाश के लिए उपाय अवश्य करे।

आज क्या ग्रहण न करें :  लोकी, तोरइ, गिलकी, परवल, पका हुआ या अग्नि पर बना अन्न।

गुरुवार के अनिष्ट नाशक एवं सफलता के उपाय :

कुंडली में दशा – अन्तर्दशा में होने पर, अशुभ भाव में होने पर दोष के अनिष्ट नाश हेतु अथवा गुरु ग्रह की प्रसन्नता / कृपा के लिए उपाय(अविवाहित कन्याओं को एवं दाम्पत्य सुख के लिए स्त्री वर्ग को अवश्य उपयोग करना चाहिए)

किसी भी मन्त्र के अंत में अवश्य कहे- सर्व सिद्धिम, सफलताम च सर्व वान्छाम पूरय पूरय में नम:/ स्वाहा |

सौभाग्य, सफलता वृद्धि के लिए ग्रह गुरु के दोष शांति के लिए : स्नान जल मे मिला नदी या तीर्थ जल, चमेली पुष्प, सफेद के अभाव में पीली सरसों, गूलर, मुलेठी, मिला कर स्नान करें।

बाधा मुक्ति के लिए दान : पीला अनाज, चना, शक्कर, पीले पुष्प, हल्दी, केसर, पीला वस्त्र, पीला फल पपीता केला आदि का दान करें।

दान किसको दे : गुरु, ज्ञानी पुरुष, ब्राह्मण या ज्ञान, शिक्षा कर्म करने वाले को या शिक्षण संस्था, शिक्षक, विष्णु, कृष्ण, राम मंदिर में दान करना चाहिए।

गुरु ग्रह का गायत्री मंत्र-

(गायत्री मन्त्र पश्चात् गृहस्थ को आवश्यक है बोलना)
आपो ज्योति रस अमृतम। परो रजसे सावदोम।

गुरु ॐ वृषभध्वजाय विद्महे क्रुनिहस्ताय धीमहि तन्नो गुरुः प्रचोदयात्॥
ॐ सुराचार्याय विद्महे सुरश्रेष्ठाय धीमहि त।न्नो गुरुः प्रचोदयात् ॥
ओम अंगिरसाय विद्महे दिव्यदेवताय धीमहि
तन्नो जीवः प्रचोदयात। आपो ज्योति रस अमृतम। परो रजसे साव दोम।

पौराणिक मंत्र –108 बारॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरूवे नमः ॥

जैन मंत्र :
ॐ ह्रीं णमो आयरियाणं।
ॐ ह्रीं गुरु ग्रहारिष्ट निवारकश्री महावीर जिनेन्द्राय नम।
सर्वशांतिं कुरु कुरु स्वाहा। मम (.अपना नाम ) दुष्ट ग्रह रोग कष्टनिवारणं सर्वशांतिं कुरू कुरू हूँ फट् स्वाहा।

बृहस्पति (गुरुवार) को शीघ्र फलदायी

देवमन्त्री विशालाक्ष: सदा लोकहिते रत:।
अनेकशिष्यसम्पूर्ण: पीडां हरतु मे गुरु:।।
सर्वदा लोक कल्याण में निरत रहने वाले देवताओं के मंत्री विशाल नेत्रों वाले तथा अनेक शिष्यों से युक्त बृहस्पति मेरी पीड़ा को दूर करें।। ब्रह्माण्डपुराण

ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु।
यद्दीदयच्छवस ऋतुप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्।। (यजु. 26।3)

शाबर मन्त्र : (श्रद्धा आवश्यक, शुद्धता सामान्य)
ओम गुरूजी बृहस्पतिवार मन में बसे। पांचो इन्द्रिय बस में करें।
सो निशि घर उग्या भाण। ध्यावो बृहस्पतिवार गंगा का है सिनान।

बृहस्पतिवार अंगिरा गोत्र, पीत वरण उन्नीस हजार जाप सिन्धुदेश उत्तरस्थानचतुर्थ मंडल ६ अंगुल। धनु मीन राशि के गुरू को नमस्कार।
सत फिरे तो वाचा फिरे।
पान फूल वासना सिहासन धरे तो इतरो काम बृहस्पतिवारजी महाराज करे।
ओम फट् स्वाहा ll

दिन दोष आपत्ति निराकरण के लिए घर से प्रस्थान पूर्व क्या खाएं : दही curd, जीरा |

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