डीजे-धुमाल के शोर पर हाईकोर्ट का सख्त रुख, सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के आदेश
HC on Noise Pollution: बिलासपुर हाईकोर्ट ने त्योहारी सीजन में डीजे और धुमाल की तेज आवाज से हो रहे ध्वनि प्रदूषण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि कोलाहल अधिनियम, 1985 और ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि त्योहारी जुलूसों के दौरान सीसीटीवी कैमरे से निगरानी जरूरी है और संबंधित तारीखों की सीसीटीवी फुटेज संरक्षित की जानी चाहिए ताकि शोर मानकों के उल्लंघन की निगरानी और प्रमाण संकलन किया जा सके।
यह भी पढ़ें:- नवरात्र पर गरबा में गैर-हिंदुओं की एंट्री को लेकर बढ़ा विवाद, छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड की अपील पर कांग्रेस ने साधा निशाना
हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि राज्य सरकार की ओर से पूर्व में प्रस्तुत शपथपत्र के अनुसार सभी निर्देशों का कड़ाई से पालन कराया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस पर जरूरी कार्रवाई तुरंत की जाए। राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में बताया गया कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए कानून में संशोधन की प्रक्रिया जारी है। शासन के अनुसार कोलाहल अधिनियम, 1985 में आवश्यक संशोधन किए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने 27 जनवरी 2025 को एक पांच सदस्यीय समिति गठित की थी, जिसमें गृह, विधि, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रतिनिधि और आवास, पर्यावरण विभाग के सचिव, साथ ही छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव शामिल थे। (HC on Noise Pollution)
14 अगस्त को हुई थी बैठक
इस समिति को कोलाहल अधिनियम, 1985 और ध्वनि प्रदूषण नियम, 2000 का तुलनात्मक विश्लेषण कर संशोधन का प्रारूप तैयार करने का कार्य सौंपा गया था। समिति की बैठकें हुई और 13 अगस्त 2025 को मंडल द्वारा तैयार संशोधन प्रस्ताव का मसौदा सचिव, आवास पर्यावरण को भेजा गया। इसके बाद 14 अगस्त को हुई बैठक में मसौदे की समीक्षा की गई। संबंधित विभागों से कहा गया कि वे 15 सितंबर तक अंतिम रिपोर्ट दें, ताकि मसौदे को अंतिम रूप दिया जा सके। (HC on Noise Pollution)
रायपुर में लगाए गए 783 सीसीटीवी
सुनवाई के दौरान जानकारी दी गई कि रायपुर जिले में त्योहारी सीजन में 783 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। कोर्ट को बताया गया कि इन कैमरों की रिकॉर्डिंग संरक्षित रखी जाए, जिससे उल्लंघनों की निगरानी और दस्तावेजीकरण किया जा सके। राज्य के अधिवक्ता ने भी कोर्ट को आश्वस्त किया कि विशिष्ट तिथियों पर सीसीटीवी फुटेज संरक्षित रखने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिससे जुलूसों के दौरान नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। हालांकि शासन की ओर से सख्ती के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। 23 सितंबर को बिलासपुर में आयोजित शोभायात्रा के दौरान जगह-जगह जाम की स्थिति बनी रही।
16 अक्टूबर को अगली सुनवाई
डीजे और धुमाल की तेज आवाज से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कोलाहल अधिनियम के लागू होने के बावजूद शहर में ध्वनि प्रदूषण पर अंकुश नहीं लग पाया है। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 अक्टूबर 2025 की तारीख तय की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर कानूनों में आवश्यक संशोधन और कार्रवाई नहीं की जाती तो सरकार को जवाब देना होगा।नवरात्रि के तीसरे दिन कोर्ट की यह टिप्पणी और निर्देश इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि प्रदेशभर में फेस्टिवल सीजन शुरू हो चुका है और डीजे-धुमाल से होने वाला शोर लगातार लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। (HC on Noise Pollution)
हाईकोर्ट का स्पष्ट संदेश
हाईकोर्ट ने डीजे और ध्वनि प्रदूषण के मुद्दे पर स्पष्ट संदेश दिया है कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने कानूनों में संशोधन की दिशा में सरकार की सक्रियता को सराहा, लेकिन जमीनी स्तर पर सख्त क्रियान्वयन की जरूरत पर जोर दिया है। आगामी सुनवाई में यह देखा जाएगा कि सरकार ने निर्देशों का पालन कितना किया है और क्या वास्तव में नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई हुई है। (HC on Noise Pollution)



