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छत्तीसगढ़ में सड़क हादसों की भयावह तस्वीर, अलग-अलग जिलों में 8 से ज्यादा मौतें, विधानसभा में भी उठा मुद्दा

Road Accidents in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में तेज रफ्तार और लापरवाही एक बार फिर जानलेवा साबित हुई। राज्य के अलग-अलग जिलों में हुए भीषण सड़क हादसों में 8 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। रायगढ़, बालोद, बलौदाबाजार, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, धमतरी, जशपुर, सूरजपुर और दुर्ग समेत कई जिलों से दर्दनाक घटनाएं सामने आई हैं। रायगढ़ जिले के कापू थाना क्षेत्र अंतर्गत मड़वाताल घाट में सगाई समारोह से लौट रही पिकअप खाई में गिर गई। हादसे में 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 18 से ज्यादा लोग घायल हैं। जानकारी के मुताबिक छाल थाना क्षेत्र के बंगुरसुता गांव से राठिया समाज के 25-30 लोग सगाई कार्यक्रम में शामिल होने गोसाईपोड़ी गांव गए थे। 

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बुधवार शाम करीब 8 बजे लौटते समय तेज रफ्तार पिकअप बेकाबू होकर खाई में पलट गई। घटना में कालाराम राठिया, छतरसिंह राठिया समेत 4 लोगों की मौत हो गई। कई घायलों के हाथ-पैर टूटे हैं और सिर में गंभीर चोट आई है। 8 से 10 घायलों को रायगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। चालक मौके से फरार है, जिसकी तलाश जारी है। रायगढ़ में तेज रफ्तार ट्रेलर की चपेट में आने से गुलशन बंजारे की मौत हो गई। आक्रोशित ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग को लेकर सड़क जाम कर दिया। बालोद जिले के डौंडी थाना क्षेत्र के मरारटोला नाले के पास स्कूल वैन अनियंत्रित होकर 6 फीट गहरे नाले में गिर गई। हादसे में पहली कक्षा की छात्रा वेदांशी साहू (6) की मौत हो गई, जबकि 13 बच्चे घायल हैं। (Road Accidents in Chhattisgarh)

बलौदाबाजार में दो आरक्षकों की मौत

आजाद पब्लिक स्कूल की वैन में 21 बच्चे सवार थे। चढ़ाव पर वाहन बंद हो गया और करीब 45 मीटर पीछे लुढ़कते हुए नाले में जा गिरा। ग्रामीणों ने बच्चों को बाहर निकाला। वेदांशी के पिता की भी पिछले साल सड़क हादसे में मौत हो चुकी थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है। बलौदाबाजार जिले के हथबंद थाना क्षेत्र में उडेला-पौसरी रोड पर ट्रेलर और बाइक की टक्कर में दो आरक्षकों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान धर्मेंद्र यादव (साइबर सेल) और प्रशांतधर दीवान (हथबंद थाना) के रूप में हुई है। दोनों ड्यूटी पर जा रहे थे। ट्रेलर का पिछला पहिया दोनों के ऊपर चढ़ गया। एक की मौके पर मौत हो गई, जबकि दूसरे ने रायपुर ले जाते समय दम तोड़ दिया। (Road Accidents in Chhattisgarh)

मरवाही में शादी में जा रहे 40 ग्रामीण घायल

आरोपी ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता ने घटना पर दुख जताते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। मरवाही थाना क्षेत्र के खुरपा मोड़ के पास तेज रफ्तार पिकअप पलट गई। वाहन में सवार लगभग 40 ग्रामीण शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे। दुर्घटना में करीब 40 लोग घायल हुए, जिनमें 5 बच्चे भी शामिल हैं। तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग हादसे की वजह रही। धमतरी के रुद्री थाना क्षेत्र में कलेक्ट्रेट बंगले के पास तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार मनोज ध्रुव को टक्कर मार दी। कार बिजली पोल से जा टकराई। घायल युवक का जिला अस्पताल में इलाज जारी है। प्रारंभिक जानकारी में चालक के नशे में होने की आशंका जताई जा रही है।

जशपुर में दो अलग-अलग हादसे

जशपुर जिले के पत्थलगांव थाना क्षेत्र में बाइक और क्रेन की टक्कर में एक युवक की मौत हो गई, जबकि एक गंभीर है। वहीं तपकरा थाना क्षेत्र के सिंगीबहार में स्कूल जा रहे शिक्षक की बाइक ट्रक से टकरा गई, जिससे शिक्षक गंभीर रूप से घायल हो गए। सूरजपुर के रामानुजनगर थाना क्षेत्र में ट्रैक्टर ने स्कूटी सवार शिक्षिका को टक्कर मार दी। मौके पर ही उनकी मौत हो गई, जबकि बच्चा गंभीर रूप से घायल है। ग्रामीणों ने ट्रैक्टर चालक की पिटाई कर दी। पुलिस ने ट्रैक्टर जब्त कर लिया है। दुर्ग जिले में नेशनल हाईवे-53 पर बारूद से भरा ट्रक अनियंत्रित होकर ट्रांसफॉर्मर से टकरा गया। केबिन में आग लग गई। दमकल की टीम ने समय रहते आग पर काबू पा लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

विधानसभा में भी उठा मुद्दा 

छत्तीसगढ़ में लगातार हो रहे सड़क हादसे कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। ओवरलोडिंग, तेज रफ्तार, नशे में ड्राइविंग और यातायात नियमों की अनदेखी। ग्रामीण इलाकों में मालवाहक वाहनों में सवार होकर यात्रा करना आम हो गया है, जो लगातार जानलेवा साबित हो रहा है। प्रशासन ने सभी मामलों में जांच के निर्देश दिए हैं, लेकिन सवाल यही है कि आखिर कब थमेगा सड़कों पर मौत का यह सिलसिला ? बता दें कि बजट सत्र के तीसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान प्रदेश में बढ़ते सड़क हादसों का मुद्दा उठा था। रायपुर दक्षिण से भाजपा विधायक सुनील कुमार सोनी ने परिवहन मंत्री केदार कश्यप से तीखे सवाल करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सड़क दुर्घटनाओं में टॉप टेन राज्यों की श्रेणी में पहुंच चुका है।

क्या है सरकार का मास्टर प्लान ?: सोनी

विधायक सुनील कुमार सोनी ने पूछा कि सड़क हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है, ऐसे में क्या सरकार ने कोई ठोस मास्टर प्लान तैयार किया है, जो इन दुर्घटनाओं को रोकने में कारगर साबित हो सके ? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सड़क हादसे में घायल या मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने का क्या प्रावधान है। विधायक ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की ओर से छत्तीसगढ़ में बढ़ते हादसों पर जताई गई चिंता का भी उल्लेख किया। मंत्री केदार कश्यप ने सदन में बताया कि देशभर में हर साल लगभग 4.5 लाख सड़क हादसे होते हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ में करीब 6,800 दुर्घटनाएं दर्ज होती हैं। इनमें से लगभग 3,000 लोगों की मौत हो जाती है। (Road Accidents in Chhattisgarh)

मुआवजा और राहत प्रावधान

उन्होंने कहा कि सरकार यातायात विभाग के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चला रही है और हादसों को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार की ओर से रायपुर को ‘जीरो फेटेलिटी’ कैटेगरी में रखा गया है और राज्य सरकार भी इसी दिशा में काम कर रही है। मंत्री ने बताया कि पीएम राहत योजना के तहत पीड़ितों को सात दिनों तक इलाज की व्यवस्था दी जाती है। मृतकों के परिजनों को प्रति व्यक्ति 5,000 रुपये की राहत राशि प्रदान की जाती है। 2025 से अब तक 76 पीड़ितों को यह सहायता दी जा चुकी है। रायपुर जिले में यातायात सुधार के लिए 19 प्रमुख चौक-चौराहों की पहचान की गई है। 14 स्थानों पर लेफ्ट टर्न फ्री किया गया है। 27 जंक्शनों पर ट्रैफिक निगरानी कैमरे लगाए गए हैं। ओवर स्पीड पर नियंत्रण के लिए रडार कैमरे भी स्थापित किए गए हैं। कुरूद से बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि सड़क हादसे घटने के बजाय बढ़ रहे हैं। 

क्या छत्तीसगढ़ को मौत के मुहाने पर खड़ा कर रहे ?: चंद्राकर 

उन्होंने ड्राइविंग ट्रेनिंग संस्थानों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए। चंद्राकर ने पूछा कि प्रदेश में 167 ब्लैक स्पॉट चिन्हित हैं, क्या उन्हें खत्म किया जा रहा है? जवाब में मंत्री ने कहा कि 101 ब्लैक स्पॉट समाप्त किए जा चुके हैं, बाकी पर कार्य जारी है। भाजपा विधायक अनुज शर्मा ने 1 अप्रैल 2024 से जनवरी 2026 तक जारी ड्राइविंग लाइसेंस की संख्या पर सवाल उठाया। मंत्री ने बताया कि इस अवधि में 1,46,307 लाइसेंस जारी हुए, जिनमें से केवल एक आवेदक टेस्ट में फेल हुआ। इस पर पारदर्शिता और टेस्ट रिकॉर्डिंग की व्यवस्था को लेकर सवाल उठे। मंत्री ने कहा कि प्रक्रिया को और ज्यादा पारदर्शी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। सदन में हुई चर्चा से साफ है कि सड़क हादसों का मुद्दा गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। आंकड़े भयावह तस्वीर पेश कर रहे हैं। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ही सरकार से ठोस रणनीति और प्रभावी क्रियान्वयन की मांग कर रहे हैं। अब देखना होगा कि सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार के प्रयास कितने कारगर साबित होते हैं।

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