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जांजगीर में प्रार्थना सभा पर विवाद, खरोरा में धर्मांतरण का आरोपी गिरफ्तार, बस्तर में घर वापसी

Action Regarding Conversion: छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण और प्रार्थना सभा को लेकर अलग-अलग जिलों से मामले सामने आए हैं। जांजगीर-चांपा में बिना अनुमति प्रार्थना सभा को लेकर विवाद के बाद पुलिस ने कार्रवाई की है। रायपुर जिले में इलाज के नाम पर जबरन धर्मांतरण कराने के आरोप में एक शख्स को गिरफ्तार किया गया है। वहीं बस्तर के जगदलपुर में एक परिवार ने 12 साल बाद ईसाई धर्म छोड़कर घर वापसी करते हुए हिंदू धर्म अपना लिया है। पहला मामला जांजगीर-चांपा जिले के शिवरीनारायण थाना क्षेत्र का है, जहां खरौद तिवारीपारा गांव में बिना अनुमति प्रार्थना सभा आयोजित करने पर विवाद की स्थिति बन गई।

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बताया जा रहा है कि एक व्यक्ति अपने घर में कुछ लोगों को इकट्ठा कर प्रार्थना सभा कर रहा था, जिसकी जानकारी मोहल्ले के लोगों को लगने पर उन्होंने इसका विरोध किया। इस दौरान वहां मौजूद कुछ महिला और पुरुषों का मोहल्ले के लोगों से विवाद और हंगामा होने लगा। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाइश दी, लेकिन माहौल तनावपूर्ण होने लगा। संभावित अप्रिय घटना को देखते हुए पुलिस ने प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए येनिवेश साहू, किशन यादव, रमाशंकर साहू, मोतीलाल रात्रे समेत दो महिलाओं को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।

धर्मांतरण कराने के आरोप में गिरफ्तार

दूसरा मामला रायपुर जिले के खरोरा थाना क्षेत्र का है, जहां कठिया गांव में इलाज का झांसा देकर जबरन धर्मांतरण कराने के आरोप में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान अनुप शेण्डे के रूप में हुई है। आरोप है कि वह एक आदिवासी परिवार पर ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बना रहा था और घर के सामने प्रार्थना कराकर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर कर रहा था। ग्रामीणों को बीमारी ठीक करने का झांसा देकर प्रभावित करने की भी बात सामने आई है। शिकायत मिलने के बाद खरोरा पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। (Action Regarding Conversion)

इधर, बस्तर जिले के छापरभानपुरी गांव में एक धर्मांतरित परिवार ने घर वापसी करते हुए फिर से अपने मूल धर्म को अपनाया है। चतुर कुंजाम और उनकी पत्नी लिमबाती कुंजाम ने करीब 12 साल पहले ईसाई धर्म स्वीकार किया था।आदिवासी समाज की पहल पर दोनों ने ईसाई धर्म छोड़कर हिंदू रीति-रिवाजों के साथ पूजा-पाठ कर घर वापसी की। इस दौरान समाज प्रमुखों और कई हिंदू संगठनों के सदस्य भी मौजूद रहे। फिलहाल इन तीनों घटनाओं के बाद प्रदेश में धर्मांतरण और धार्मिक गतिविधियों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। वहीं पुलिस और प्रशासन भी ऐसे मामलों पर नजर बनाए हुए हैं।

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