US-Israel-Iran War : इजराइल-अमेरिका के हमलों के बाद ईरान का पलटवार, खाड़ी क्षेत्र के गैस प्लांट्स बने निशाना
US-Israel-Iran War : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब वैश्विक स्तर पर असर डालने लगा है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने अब ऊर्जा क्षेत्र को भी अपनी चपेट में ले लिया है। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना शुरू कर दिया है, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट की आशंका गहराने लगी है।
यह नहीं पढ़े :- Rashifal 19 March 2026: आज गुरुवार का राशिफल, क्या कहती है आपकी राशि, कैसा रहेगा आपका दिन, जानें सभी राशियों का भविष्यफल
रिपोर्ट्स के अनुसार, कतर के रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी स्थित एक बड़े गैस प्लांट पर मिसाइल हमला किया गया, जिससे वहां आग लग गई और उत्पादन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब इजराइल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड को निशाना बनाया था। इसके बाद ईरान ने कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को चेतावनी दी थी कि उनके ऊर्जा ठिकाने भी हमलों की जद में आ सकते हैं। (US-Israel-Iran War )
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर
कतर दुनिया के सबसे बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सप्लायर देशों में से एक है। ऐसे में वहां गैस प्लांट पर हमला होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस और तेल की कीमतों में तेजी आने की आशंका बढ़ गई है।
भारत पर पड़ सकता है बड़ा प्रभाव
भारत के लिए यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है, क्योंकि देश अपनी गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। भारत हर साल लगभग 27 मिलियन टन LNG आयात करता है, जिसमें से 12 से 13 मिलियन टन कतर से आता है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात से करीब 24 प्रतिशत और अमेरिका से लगभग 11 प्रतिशत गैस की आपूर्ति होती है।
क्या महंगी हो सकती है गैस?
यदि कतर में गैस उत्पादन लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो भारत को वैकल्पिक स्रोतों से महंगी गैस खरीदनी पड़ सकती है। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ सकता है, खासकर घरेलू एलपीजी और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के चलते भारत के कुछ गैस टैंकर समुद्र में फंसे होने की खबर है, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि सरकार ने फिलहाल देश में गैस की कोई कमी नहीं होने की बात कही है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ता यह संघर्ष अब केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को भी प्रभावित कर रहा है। आने वाले समय में इसका असर भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर देखने को मिल सकता है। (US-Israel-Iran War )



