नक्सली कमांडर पापा राव और सुकरु समेत कई नक्सलियों ने किया सरेंडर, 31 मार्च तक नक्सलवाद समाप्ति की चुनौती बरकरार

Chhattisgarh Odisha Naxalites Surrender: नक्सलवाद खात्मे की डेडलाइन खत्म होने में अब सिर्फ 6 दिन ही बचे हैं। इस बीच छत्तीसगढ़ और ओडिशा में नक्सल संगठन को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, बस्तर से इनामी नक्सली कमांडर पापा राव ने अपने 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया। वहीं ओडिशा के कंधमाल में स्टेट कमेटी सदस्य सुकरु उर्फ कोसा सोढ़ी ने भी अपने चार साथियों के साथ हथियार पुलिस के हवाले कर दिया। सरकार इसे नक्सलवाद समाप्ति की दिशा में बड़ी सफलता मान रही है, लेकिन डिप्टी CM विजय शर्मा मान रहे हैं कि टॉप कमांडर अभी भी पकड़ से बाहर हैं।
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बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में नक्सली कमांडर पापा राव अपने 17 साथियों के साथ पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। पूना मारगेम अभियान के तहत लाल बाग स्थित शौर्य भवन में डीजीपी अरुण देव गौतम, एडीजीपी विवेकानंद सिंहा और आईजी सुंदरराज पी ने नक्सलियों को संविधान की पुस्तिका देकर सम्मानित किया। आत्मसमर्पण करने वालों में DKSZC सदस्य पापा राव, DVCM प्रकाश मड़वी और DVCM अनिल ताती शामिल थे। 18 नक्सली नेताओं में 7 महिला भी शामिल थी। उन्होंने अपने साथ 8 AK-47, SLR, INSAS, .303 राइफल और BGL लॉन्चर समेत 12 लाख रुपए नगद पुलिस के हवाले किए। (Chhattisgarh Odisha Naxalites Surrender)

डिप्टी CM और गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि DKSZC स्तर के अंतिम सक्रिय नक्सली पापा राव के मुख्यधारा में लौटने के बाद यह सुनिश्चित हो गया है कि 31 मार्च तक बस्तर समेत पूरे छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद समाप्त होगा। ओडिशा के कंधमाल में भी नक्सल नेटवर्क को झटका लगा है। स्टेट कमेटी सदस्य सुकरु उर्फ कोसा सोढ़ी ने अपने चार साथियों के साथ पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। सुकरु पर 55 लाख रुपये का इनाम था। जबकि अन्य 4 नक्सलियों पर कुल 66 लाख रुपए का इनाम था। पुलिस के मुताबिक अब ओडिशा में महज 9-10 नक्सली ही सक्रिय हैं। आत्मसमर्पण के दौरान पुलिस ने नक्सली नेताओं के हाथों से हथियार लिए और गुलदस्ते देकर स्वागत किया। इस बीच डिप्टी CM विजय शर्मा ने साफ किया कि 31 मार्च कोई आखिरी पड़ाव नहीं है। नक्सलवाद समाप्ति की दिशा में कदम जरूर बढ़ा है, लेकिन सतर्कता और कार्रवाई जारी रहेगी।

उन्होंने कहा कि नक्सल लीडर गणपति और मिसिर बेसरा अभी भी पकड़ में नहीं हैं। 31 मार्च की रात कोई हैप्पी न्यू ईयर नहीं है। उसके बाद भी सावधानी बरतना जरूरी है। इस पर कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर नक्सलवाद समाप्त हो गया तो क्या आधी फोर्स लौटाई जाएगी। उन्होंने कहा कि पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह को आज भी NSG सुरक्षा है, इसलिए नक्सलवाद की पूरी समाप्ति पर संदेह है। सवाल यह उठता है कि क्या जितने बड़े नक्सली सरेंडर हुए, उनके हथियार भी सामने आए या कहीं छिपा है कोई घातक जखीरा ? बस्तर में सुरक्षा की दृष्टि से आम जनता को परेशान न करने की भी चुनौती है। (Chhattisgarh Odisha Naxalites Surrender)
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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार से कहा कि नक्सलवाद खत्म होने के बाद बस्तर के जल, जंगल और खनिज किसी उद्योगपति को नहीं बेचे जाएं। उन्होंने याद दिलाया कि देश का सबसे बड़ा नक्सली हमला भाजपा सरकार के दौरान हुआ था, जिसमें 32 कांग्रेस नेता शहीद हुए थे। छत्तीसगढ़ और ओडिशा में बड़े नक्सली कमांडरों के सरेंडर ने नक्सल मोर्चे पर एक बड़ी सफलता दी है। पापा राव और सुकरु जैसे इनामी नेताओं का हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटना सरकार के लिए एक ऐतिहासिक पल है, लेकिन डिप्टी CM विजय शर्मा की चेतावनी याद रखने योग्य है कि खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। 31 मार्च की डेडलाइन नजदीक है, लेकिन असली चुनौती अभी भी नेटवर्क और हथियारों की पूरी सफाई है। यानी जीत करीब जरूर है, लेकिन आखिरी लड़ाई अभी बाकी है। बस्तर और कंधमाल की जनता की सुरक्षा, संसाधनों का भविष्य और नक्सलवाद की वास्तविक समाप्ति ये सवाल अब भी जवाब चाहते हैं।




