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RTE के तहत प्रवेश नहीं देने वाले निजी स्कूलों की मान्यता होगी रद्द, छत्तीसगढ़ सरकार ने दी चेतावनी

Warning to Private Schools: छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत प्रवेश देने से इनकार करने वाले प्राइवेट स्कूलों को राज्य सरकार ने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। शिक्षा विभाग ने कहा कि प्रवेश नहीं देने वाले प्राइवेट स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। विभाग ने लोगों से भ्रामक जानकारी पर ध्यान नहीं देने की अपील भी की है। शिक्षा विभाग का दावा है कि प्रति बच्चा व्यय के आधार पर स्कूलों को प्रतिपूर्ति राशि दी जाती है। यह राशि सरकारी स्कूल में हर बच्चे पर होने वाले खर्च या प्राइवेट स्कूल की वास्तविक फीस में से जो भी कम हो उसके आधार पर तय की जाती है।

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शिक्षा विभाग ने कहा कि छत्तीसगढ़ में निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009, अप्रैल 2010 से प्रभावी है। इसके अंतर्गत प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त अशासकीय स्कूलों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। इन सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर, दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर प्रवेश दिलाया जाता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीब बच्चों की शिक्षा के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और सभी के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। ( Warning to Private Schools)

​प्रतिपूर्ति राशि का पारदर्शी भुगतान

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत निजी स्कूलों को नर्सरी या कक्षा 1 में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है। इसके बदले राज्य सरकार प्रति बच्चा व्यय के आधार पर स्कूलों को प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान करती है। यह राशि सरकारी स्कूल में प्रति बच्चे पर होने वाले खर्च या निजी स्कूल की वास्तविक फीस में से जो भी कम हो उसके आधार पर निर्धारित की जाती है। छत्तीसगढ़ में शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि कई पड़ोसी राज्यों की तुलना में बेहतर या उनके समकक्ष है। प्रदेश में साल 2011-12 से ही कक्षा 1 से 5 तक 7000 रुपए और कक्षा 6 से 8 तक 11 हजार 400 रुपए वार्षिक प्रतिपूर्ति राशि निर्धारित है। ( Warning to Private Schools)

साढ़े तीन लाख से ज्यादा बच्चे ले रहे लाभ

तुलनात्मक रूप से देखें तो मध्य प्रदेश में 4,419 रुपए बिहार में 6,569 रुपए, झारखंड में 5,100 रुपए और उत्तर प्रदेश में 5,400 रुपए वार्षिक दिए जाते हैं। जबकि ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में यह राशि ज्यादा है, लेकिन समग्र मूल्यांकन में छत्तीसगढ़ की प्रतिपूर्ति राशि संतुलित और उचित है। वर्तमान में राज्य के 6,862 निजी स्कूलों में RTE के माध्यम से लगभग 3,63,515 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इस साल भी कक्षा पहली की लगभग 22,000 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है। सभी निजी स्कूलों को RTE अधिनियम के प्रावधानों के तहत ही मान्यता दी गई है। यह उनकी वैधानिक जिम्मेदारी है कि वे निर्धारित सीटों पर प्रवेश सुनिश्चित करें।

​नियमों के उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई

अगर कोई निजी स्कूल RTE के तहत प्रवेश देने से इनकार करता है या प्रक्रिया में व्यवधान डालता है तो राज्य शासन उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा। इसमें स्कूल की मान्यता समाप्त करने तक का प्रावधान शामिल है। शिक्षा विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस संबंध में फैलाई जा रही किसी भी भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और सिर्फ आधिकारिक तथ्यों पर ही विश्वास करें। RTE एक ऐसा कानून है, जो 6 से 14 साल के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है। इसके तहत सरकार यह सुनिश्चित करती है कि हर बच्चा स्कूल जाए और प्राइवेट स्कूलों में भी 25% सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित हों। (Warning to Private Schools)

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