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चीन गतिरोध पर बोले पूर्व आर्मी चीफ नरवणे, कहा- सरकार ने पूरा समर्थन दिया, किताब को लेकर सियासत जारी

Former Army Chief Naravane: पूर्व आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे ने 2020 में चीन के साथ हुए सीमा गतिरोध को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा कि उस समय केंद्र सरकार ने सेना को पूरी तरह समर्थन दिया था और हालात बिगड़ने पर चीनी सैनिकों के खिलाफ कार्रवाई करने की पूरी छूट भी दी गई थी। नरवणे के मुताबिक 2020 के लद्दाख गतिरोध के दौरान सरकार ने सेना को अकेला नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि फैसला लेने की पूरी स्वतंत्रता दी गई थी, जिससे जरूरत पड़ने पर सख्त सैन्य कदम उठाए जा सकें। पूर्व आर्मी चीफ ने बताया कि चीन के साथ सीमा विवाद के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे कही थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि जो उचित समझो, वो करो। इसका मतलब यह है कि जो भी तुम्हें सही लगे, वह करो। 

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बता दें कि लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी 4 फरवरी को संसद पहुंचे और नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ की कॉपी दिखाई। उन्होंने दावा किया कि किताब में एक जगह लिखा है कि प्रधानमंत्री ने आर्मी चीफ से कहा था कि जो उचित समझो, वह करो। राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब रक्षा मंत्री और सरकार किताब के अस्तित्व से इनकार कर रहे हैं तो यह कॉपी उसके उलट सबूत है। वहीं 9 फरवरी को पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने स्पष्ट किया था कि नरवणे की यह किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है। कंपनी के मुताबिक किताब का कोई आधिकारिक संस्करण (प्रिंट या डिजिटल) जारी नहीं हुआ। इसके सभी पब्लिशिंग अधिकार उनके पास हैं। सार्वजनिक रूप से कोई कंटेंट जारी नहीं किया गया है।

कौन झूठ बोल रहा ?: राहुल गांधी

3 फरवरी को राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि या तो नरवणे गलत कह रहे हैं या पब्लिशर। उन्होंने कहा कि उन्होंने पूर्व आर्मी चीफ की बात पर भरोसा किया है। वहीं किताब के कथित लीक को लेकर मामला बढ़ा तो दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की। डिजिटल और अन्य फॉर्मेट में मैन्युस्क्रिप्ट के गैर-कानूनी प्रसार की जांच की जा रही है। नरवणे की इस आत्मकथात्मक किताब में उनके कार्यकाल (2019-2022) के अहम मुद्दों का जिक्र बताया गया है, जिनमें 2020 का भारत-चीन लद्दाख सीमा विवाद, गलवान घाटी की झड़प, अग्निपथ (अग्निवीर) योजना और सैन्य रणनीतिक फैसले शामिल हैं।

पब्लिकेशन पर अब भी रोक

रिपोर्ट्स के मुताबिक किताब में पैंगोंग त्सो क्षेत्र में 31 अगस्त 2020 की कार्रवाई और सरकार के तत्काल राजनीतिक निर्देश न मिलने का जिक्र विवाद की बड़ी वजह बना। यह किताब जनवरी 2024 में प्रकाशित होनी थी, लेकिन दिसंबर 2023 में एक हिस्से के सामने आने के बाद विवाद बढ़ा। रक्षा मंत्रालय ने पब्लिकेशन से पहले क्लियरेंस जरूरी बताया। सेना ने समीक्षा कर रिपोर्ट मंत्रालय को भेज दी। अब तक रक्षा मंत्रालय की मंजूरी लंबित है, जिसके चलते किताब का प्रकाशन अटका हुआ है। इसी बीच नरवणे की एक नई किताब “जिज्ञासा और वर्गीकरण: सैन्य मिथकों और रहस्यों की पड़ताल” भी जल्द आने वाली है, जिससे एक बार फिर सैन्य मामलों पर चर्चा तेज होने की संभावना है।

पूर्व आर्मी चीफ के बयान और उनकी किताब को लेकर जारी विवाद ने राजनीतिक और सैन्य गलियारों में बहस छेड़ दी है। एक तरफ सरकार की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मैन्युस्क्रिप्ट लीक और पब्लिकेशन अधिकारों को लेकर कानूनी पेच भी सामने आ गए हैं। पूरे विवाद ने एक बार फिर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों और उनकी सार्वजनिक चर्चा की सीमाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मनोज मुकुंद नरवणे के ताजा बयान ने जहां सरकार के समर्थन की पुष्टि की है, वहीं राहुल गांधी के उठाए गए सवालों ने इस मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है। अब निगाहें रक्षा मंत्रालय के फैसले और किताब के संभावित प्रकाशन पर टिकी हैं, जिससे इस पूरे विवाद की सच्चाई और स्पष्ट हो सकेगी।

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