छत्तीसगढ़ में मजदूर दिवस पर ‘बोरे बासी’ को लेकर सियासत गरम, कांग्रेस-बीजेपी में वार-पलटवार

Politics on Bore Basi: छत्तीसगढ़ में मजदूर दिवस के मौके पर बोरे बासी एक बार फिर राजनीति के केंद्र में आ गया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दुर्ग के राजीव भवन में बोरे बासी खाकर इस दिन को मनाया, वहीं भाजपा ने इसे लेकर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। राजीव भवन में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व CM भूपेश बघेल समेत कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा-अर्चना के बाद बोरे बासी भोज का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया। सभी जमीन पर बैठकर बोरे बासी का आनंद लेते नजर आए।
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बघेल ने बोरे बासी पर कविता भी सुनाई और कहा कि उनकी सरकार की छत्तीसगढ़ से जुड़ी योजनाओं को वर्तमान सरकार ने आगे नहीं बढ़ाया, जो दुखद है। बता दें कि कांग्रेस सरकार के दौरान 1 मई को बोरे बासी दिवस घोषित किया गया था, जिसके बाद से हर साल इस दिन यह आयोजन किया जाता है। इस बीच शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कांग्रेस के बोरे बासी तिहार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सिर्फ चुनावी लाभ के लिए इस आयोजन को बढ़ावा दिया और इसके नाम पर 8 करोड़ रुपए के घोटाले हुए। उनका कहना था कि अगर यही राशि मजदूरों के खातों में ट्रांसफर की जाती तो उन्हें सीधा फायदा मिलता। (Politics on Bore Basi)

वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बोरे बासी दिवस मनाने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि गांवों में लोग इसे रोजमर्रा के भोजन के रूप में खाते हैं। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह खुद को ज्यादा छत्तीसगढ़िया दिखाने की कोशिश कर रही है। डिप्टी CM अरुण साव ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी दिखावे की राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि बोरे बासी कोई एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि आम लोगों की दिनचर्या का हिस्सा है। कांग्रेस को इस पर राजनीति बंद करनी चाहिए। वहीं PCC चीफ दीपक बैज ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने बोरे बासी तिहार की शुरुआत कर छत्तीसगढ़ की संस्कृति को सम्मान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि 15 साल भाजपा सत्ता में रही, लेकिन उसने कभी इस परंपरा को बढ़ावा नहीं दिया और अब कांग्रेस की नकल करने की कोशिश कर रही है।

बोरे बासी को छत्तीसगढ़ की पारंपरिक भोजन संस्कृति का अहम हिस्सा माना जाता है। इसे रातभर पानी में भिगोए गए चावल से तैयार किया जाता है, जिसे दही, अचार, चटनी, प्याज, भाजी और मिर्च के साथ खाया जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसमें विटामिन B6, B12, लवण और प्रोबायोटिक्स की अच्छी मात्रा होती है, जो गर्मी में शरीर को ठंडक देने और डिहाइड्रेशन से बचाने में मददगार होती है। मजदूर दिवस के मौके पर बोरे बासी जहां एक ओर छत्तीसगढ़ की संस्कृति और सेहत से जुड़ी परंपरा के रूप में सामने आया, वहीं दूसरी ओर यह मुद्दा सियासी बहस का केंद्र बन गया। परंपरा बनाम राजनीति की इस जंग में बोरे बासी अब सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक प्रतीक भी बनता नजर आ रहा है।



