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खरीफ सीजन से पहले छत्तीसगढ़ की नई खाद नीति पर घमासान, जानिए क्या है नई व्यवस्था ?

New Fertilizer Policy: छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले सरकार की नई खाद नीति को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस और किसान संगठनों ने सरकार की नई व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए इसे किसानों के हितों के खिलाफ बताया है। वहीं सरकार नई खाद नीति को पारदर्शी और किसानों के लिए फायदेमंद बताते हुए दावा कर रही है कि इससे खाद की कालाबाजारी पर रोक लगेगी। दरअसल, छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में शामिल है और प्रदेश में बंपर धान उत्पादन के पीछे खाद वितरण व्यवस्था को भी बड़ी वजह माना जाता रहा है, लेकिन अब इसी व्यवस्था में बदलाव को लेकर किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। कांग्रेस और किसान संगठनों का आरोप है कि नई नीति के कारण किसानों को समय पर पर्याप्त खाद नहीं मिल पाएगी।

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क्या है नई खाद नीति ?

सरकार ने खाद वितरण प्रक्रिया को डिजिटल और नियंत्रित बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत अब किसानों को खाद लेने के लिए कई नई प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। नई व्यवस्था के मुताबिक किसानों को अब ई-उर्वरक वितरण पोर्टल में पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। हर सीजन में खाद उठाने के लिए किसानों को पोर्टल पर आवेदन कर डिजिटल टोकन लेना होगा। टोकन जारी होने के बाद ही किसानों को खाद उपलब्ध कराया जाएगा। किसानों को नैनो यूरिया और नैनो डीएपी लेना भी जरूरी किया गया है। खाद वितरण की मात्रा में भी बदलाव किया गया है, जहां पहले प्रति एकड़ दो बोरी डीएपी और तीन बोरी यूरिया दिया जाता था, वहीं अब एक बोरी डीएपी और एक बोरी यूरिया देने की व्यवस्था लागू की गई है। (New Fertilizer Policy)

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धनेंद्र साहू ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर नई खाद नीति को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार की नई व्यवस्था किसानों के लिए परेशानियां बढ़ाने वाली साबित होगी। धनेंद्र साहू ने आरोप लगाया कि नई नीति के तहत किसानों को खाद लेने से पहले टोकन लेना होगा, जिससे अनावश्यक जटिलता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि पहले किसानों को प्रति एकड़ दो बोरी डीएपी और तीन बोरी यूरिया उपलब्ध कराया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था में इसे घटाकर एक बोरी डीएपी और एक बोरी यूरिया कर दिया गया है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदना ही नहीं चाहती, इसलिए जानबूझकर ऐसी नीति लाई गई है जिससे उत्पादन प्रभावित हो।

किसान संगठन ने भी जताई नाराजगी

नई खाद नीति को लेकर किसान संगठनों में भी नाराजगी देखने को मिल रही है। किसान नेता पारसनाथ साहू ने कहा कि नई नीति से किसान परेशान हैं। छत्तीसगढ़ सरकार खाद की आपूर्ति सही ढंग से नहीं कर पा रही है। सरकार जो टोकन सिस्टम, एग्रीस्टैक पोर्टल की व्यवस्था बना रही है यह काफी जटिल है। इसी एग्रीस्टैक पोर्टल के कारण कई किसान धान बेचने से वंचित हो गए थे। सरकार जानबूझकर उत्पादन कम करने के लिए ये नौटंकी कर रही है। शासन किसानों को ठगना बंद करे और पूरी तरह खाद सप्लाई करे, नहीं तो इस्तीफा दे दें। पारसनाथ साहू ने कहा कि किसान पहले से ही कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। एक ओर जहां विपक्ष और किसान संगठन सरकार को घेर रहे हैं, वहीं सरकार नई नीति को किसानों के हित में बता रही है। 

कालाबाजारी पर रोक लगेगी: मंत्री कश्यप

सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि नई खाद वितरण व्यवस्था से कालाबाजारी पर रोक लगेगी और खाद वितरण ज्यादा व्यवस्थित होगा। उन्होंने कहा कि सरकार किसान हितैषी है और नई व्यवस्था का फायदा सीधे किसानों को मिलेगा। मंत्री ने दावा किया कि खाद की ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए यह नई प्रणाली लागू की गई है। वहीं भाजपा प्रदेश महामंत्री नवीन मार्कण्डेय ने कांग्रेस पर किसानों को भ्रमित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए किसानों को भड़काने का काम कर रहा है। (New Fertilizer Policy)

हर साल उठते रहे हैं खाद संकट के सवाल

प्रदेश में रासायनिक खाद वितरण को लेकर पिछले कई सालों से लगातार सवाल उठते रहे हैं। कई जिलों से किसानों की लंबी कतारों, खाद की कमी और अव्यवस्था की तस्वीरें सामने आती रही हैं। बावजूद इसके अब तक ऐसी कोई स्थायी और पारदर्शी व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है, जिससे किसानों को पूरी तरह राहत मिल सके। ऐसे में खरीफ सीजन शुरू होने से पहले नई खाद नीति को लेकर छिड़ी बहस ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि सरकार की नई व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी कारगर साबित होती है और किसानों को समय पर पर्याप्त खाद मिल पाती है या नहीं। (New Fertilizer Policy)

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