छत्तीसगढ़ में नई खाद नीति पर सियासत तेज, पूर्व PCC चीफ धनेंद्र साहू ने सरकार पर किसानों के शोषण का लगाया आरोप, CM को लिखा पत्र

Politics on Fertilizer Policy: छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन शुरू होने से पहले प्रदेश में खाद वितरण को लेकर सियासत गरमा गई है। पूर्व मंत्री और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष धनेंद्र साहू ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर राज्य सरकार की नई खाद वितरण नीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि कृषि विभाग की नई व्यवस्था के कारण प्रदेश के किसान परेशान हो रहे हैं और उन्हें समय पर खाद नहीं मिल पा रहा है। साहू ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लिखे पत्र में मांग की है कि सरकार तत्काल नई नीति को निरस्त कर पुरानी व्यवस्था के अनुसार खाद वितरण शुरू करे। उन्होंने कहा कि सोसायटियों में खाद लेने के लिए किसानों को चक्कर काटने पड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
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उन्होंने कहा कि पिछले साल 2024-25 में किसानों को प्रति एकड़ दो बोरी डीएपी (50 किलो) और तीन बोरी यूरिया (45 किलो) तक उपलब्ध कराया जाता था। इसके अलावा सुपर फॉस्फेट किसानों की आवश्यकता के अनुसार बिना किसी लिमिट के दिया जाता था, लेकिन इस साल नई व्यवस्था के तहत डीएपी, यूरिया, सुपर फॉस्फेट और पोटाश की मात्रा सीमित कर दी गई है। धनेंद्र साहू का आरोप है कि अब प्रत्येक एकड़ के लिए सिर्फ एक बोरी डीएपी, एक बोरी यूरिया और एक बोरी सुपर फॉस्फेट देने का प्रावधान किया गया है। वहीं पोटाश भी सीमित मात्रा में उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की खेती प्रभावित होगी और उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। (Politics on Fertilizer Policy)


पूर्व PCC चीफ ने यह भी कहा कि किसानों को खाद वितरण के लिए टोकन सिस्टम लागू किया जा रहा है, जिससे किसान और ज्यादा परेशान हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई सोसायटियों में अभी तक खाद वितरण शुरू ही नहीं हुआ है, जबकि सरकार लगातार पर्याप्त खाद उपलब्ध होने का दावा कर रही है। धनेंद्र साहू ने पत्र में कहा है कि सरकार जानबूझकर खाद की मात्रा कम कर रही है, जिससे धान उत्पादन प्रभावित होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को किसानों पर जबरन थोपा जा रहा है, जबकि किसानों का अनुभव है कि इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर समय पर किसानों को खाद उपलब्ध नहीं हुई तो इसका सीधा असर खरीफ फसल की बुवाई और उत्पादन पर पड़ेगा। साथ ही किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
किसानों को पर्याप्त रसायनिक खाद नहीं मिल पाएगा: धनेंद्र साहू
धनेंद्र साहू ने कहा कि नए फैसले से इस साल किसानों को पर्याप्त रसायनिक खाद नहीं मिल पाएगा। किसानों को जब खाद की जरूरत होगी तो पहले उन्हें टोकन लेना होगा। यहीं नहीं जहां पहले प्रति एकड़ दो बोरा डीएपी और 3 बोरा यूरिया दिया जाता था। उसके बदले इस बार 1 बोरा डीएपी और एक बोरी यूरिया खाद देने का नया नियम लाया गया है, जो किसानों के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदना ही नहीं चाहती, इसीलिए नई खाद नीति लेकर आई है। पूर्व PCC चीफ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि किसानों की परेशानी को देखते हुए सभी नए आदेश तत्काल वापस लिए जाएं और किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराया जाए। (Politics on Fertilizer Policy)


