मायावती ने अखिलेश यादव पर बोला जमकर हमला, कहा- सपा ने बसपा के साथ विश्वासघात किया

Mayawati on Akhilesh Yadav: बहुजन समाज पार्टी यानी BSP की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख और लोकसभा सांसद अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि कांग्रेस, भाजपा की तरह सपा भी बहुजनों में से खासकर दलितों को इनका संवैधानिक हक देकर इनका वास्तविक हित, कल्याण और उत्थान करना तो दूर, इनकी गरीबी, जातिवादी शोषण, अन्याय-अत्याचार खत्म करने के प्रति कोई सहानुभूति-इच्छाशक्ति नहीं, जिस कारण वे लोग मुख्यधारा से कोसों दूर हैं। सपा ने बीएसपी से विश्वासघात किया। उसके नेतृत्व में 2 जून को जानलेवा हमला, प्रमोशन में आरक्षण का बिल संसद में फाड़ना, इनके संतों, गुरुओं और महापुरुषों के सम्मान में बनाए गए नए जिले, पार्क, शिक्षण, मेडिकल कॉलेजों का नाम बदलना ऐसे घोर जातिवादी कृत्य हैं, जिसको माफ करना असंभव है।
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मायावती ने कहा कि इन पार्टियों के विपरीत बीएसपी अपने अनवरत प्रयासों से यहां जातिवादी व्यवस्था को खत्म करके समतामूलक समाज मतलब सर्वसमाज में भाईचारा बनाने के अपने मिशन में काफी हद तक सफल रही है, उसको सपा अपने संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए बिगाड़ने में हर प्रकार से लगी हुई है। लोग जरूर सावधान रहें। स्पष्ट है कि कांग्रेस और भाजपा की तरह ही सपा भी अपनी नीयत और नीति में खोट-द्वेष के कारण कभी भी दलितों-बहुजनों की सच्ची हितैषी नहीं हो सकती है, लेकिन इनके वोटों के स्वार्थ की खातिर लगातार छलावा करती रहेगी। जबकि बीएसपी बहुजन समाज को शासक वर्ग बनाने को समर्पित और संघर्षरत है। (Mayawati on Akhilesh Yadav)
17 अप्रैल को भी साधा था निशाना
इससे पहले 17 अप्रैल को भी मायावती ने सपा पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि अन्य पार्टियों की तरह आए दिन सपा द्वारा भी पार्टी के खासकर दलित लोगों को आगे करके तनाव और हिंसा का माहौल पैदा करने वाले आ रहे इनके अति विवादित बयानबाजी, आरोप-प्रत्यारोप समेत कार्यक्रम का जो दौर चल रहा है यह इनकी घोर संकीर्ण स्वार्थ की राजनीति ही प्रतीत होती है, क्योंकि सपा भी दलितों के वोटों के स्वार्थ की खातिर यहां किसी भी हद तक जा सकती है। ऐसे में दलितों के साथ-साथ अन्य पिछड़ों और मुस्लिम समाज को भी इनके किसी भी उग्र बहकावे में नहीं आकर इन्हें इस पार्टी के भी राजनीतिक हथकंडों का शिकार होने से जरूर बचना चाहिए। साथ ही ऐसी पार्टियों से जुड़े अवसरवादी दलितों को दूसरों के इतिहास पर टीका-टिप्पणी करने की बजाय अगर वे अपने समाज के संतों, गुरुओं और महापुरुषों की अच्छाईयों के साथ उनके संघर्ष के बारे में बताएं तो यह उचित होगा, जिनके कारण ये लोग किसी लायक बने हैं। (Mayawati on Akhilesh Yadav)



