पहलगाम आतंकी हमले पर बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कहा- देश जैसा चाहता है, वैसा होकर रहेगा

Defense Minister Rajnath Singh: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली में आयोजित संस्कृति जागरण महोत्सव को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र के रूप में हमारे वीर सैनिकों ने हमेशा भारत के भौतिक स्वरूप की रक्षा की है। वहीं दूसरी ओर हमारे ऋषियों और मनीषियों ने भारत के आध्यात्मिक स्वरूप की रक्षा की है। एक ओर जहां हमारे सैनिक रणभूमि पर लड़ते हैं, वहीं दूसरी ओर हमारे संत जीवनभूमि पर लड़ते हैं। एक रक्षा मंत्री के रूप में यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं अपने सैनिकों के साथ मिलकर देश की सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करूं। हमारे देश पर हमला करने की हिम्मत करने वालों को मुंहतोड़ जवाब देना मेरी जिम्मेदारी है। आप सभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली और दृढ़ता को जानते हैं।
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रक्षा मंत्री ने कहा कि मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि देशवासी जो चाहते हैं वह निश्चित रूप से होगा। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने अगर दुनिया को दर्शनशास्त्र दिया तो उसके साथ-साथ गणित भी दिया। हमारे पूर्वजों ने दुनिया को अगर योग दिया तो उसके साथ-साथ आयुर्वेद भी दिया। भारत का दृष्टिकोण हमेशा से चेतना के साथ विज्ञान का रहा हैं। भारत में अध्यात्म और आधुनिकता का तालमेल कोई नई बात नहीं है। हम शायद दुनिया में एक मात्र ऐसे देश हैं, जिसने भौतिकता और धर्म के बीच में संतुलन बनाकर रखा है। हमें यह भी ध्यान रखना है कि सही मायने में हम एक विकसित राष्ट्र तभी होंगे, जब हम इन चीजों के साथ-साथ नैतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से भी सशक्त होंगे। (Defense Minister Rajnath Singh)
भारत को ऋषि-मुनियों ने अपने विचारों से सींचा: रक्षा मंत्री
उन्होंने कहा कि आप सब तो जानते ही हैं कि प्रधानमंत्री ने पूरे देश को, 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है। स्वाभाविक है कि यह लक्ष्य कोई छोटा लक्ष्य नहीं है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए, हमें हर तरह से मजबूत होना होगा। इतिहास साक्षी है, कि भारत के संतों ने केवल आध्यात्मिक उपदेश ही नहीं दिए, बल्कि समाज सुधार, शिक्षा और राष्ट्रीय एकता के लिए भी अग्रणी भूमिका निभाई है। भारत की शक्ति केवल उसकी सैन्य ताकत में नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति और अध्यात्म में भी है। भारत वह भूमि है, जिसे हमारे ऋषि-मुनियों ने अपने विचारों से सींचा है। यह बिल्कुल सत्य बात है। लेकिन इसके साथ-साथ, यह भी सत्य है कि भारत की आत्मा यदि ऋषियों ने रची है, तो उस आत्मा की रक्षा हमारे वीरों ने की है। (Defense Minister Rajnath Singh)
हमारे संतों ने हमारा मार्गदर्शन किया: राजनाथ
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जब-जब इस देश को आवश्यकता पड़ी है, तब-तब हमारे संतों ने हमारा मार्गदर्शन किया है। हमारे संतों ने सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया भर में अपना प्रकाश फैलाया है। हमारे यहां सत्संग को तो, जीवन मुक्ति से जोड़कर देखा गया है। आज के दौर में, मनुष्य की अधिकांश समस्याओं का समाधान, सत्संग में ही निहित है। सत्संग से मनुष्य को निस्संगता आती है। निस्संगता से मनुष्य का मोह कम होता है। मोह के अभाव से हमें स्थिर तत्त्व की प्राप्ति होती है। और स्थिर तत्त्व से हमें जीवन्मुक्ति मिलती है। हमारे ऋषियों-मुनियों ने हमेशा, सत्संग को जीवन परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम माना है। हमारे शास्त्रों में तो लिखा भी है- सत्संगतिवे निस्संगतवं, निस्संगत्वे निर्मोहत्वं, निर्मोहत्वे निश्चलतत्त्वं, निश्चलतत्वे जीवन्मुक्ति। (Defense Minister Rajnath Singh)
राजनीति शब्द अपना अर्थ खो चुका है: राजनाथ
रक्षा मंत्री राजनाथ ने कहा कि एक लंबे समय से महाराज ने जो आध्यात्मिक ज्योति जलाई है, वह न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी फैली है। इन्होंने यह सिद्ध किया है, कि अध्यात्म कोई साधारण अवधारणा नहीं, बल्कि यह जीवन की परिपूर्णता का मार्ग है। आप सभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली और दृढ़ता को जानते हैं। आप उनकी दक्षता और दृढ़ संकल्प से परिचित हैं। आप जानते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में किस तरह जोखिम उठाना सीखा है। मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि पीएम मोदी के नेतृत्व में ‘जैसा आप चाहते हैं वैसा होकर रहेगा’। उन्होंने आगे कहा कि ‘राजनीति’ शब्द दो शब्दों ‘राज’ और ‘नीति’ से मिलकर बना है, लेकिन विडंबना यह है कि राजनीति शब्द अपना अर्थ खो चुका है। मुझे पूज्य संतों का आशीर्वाद चाहिए। मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए ताकि हम इसे भारत की राजनीति में पुनः स्थापित कर सकें। (Defense Minister Rajnath Singh)



