हँसी, योग और हर्बल चाय के साथ बुजुर्गों व किसानों का ‘हेल्दी डे’: छत्तीसगढ़ में वेलनेस सप्ताह की अनूठी पहल
Wellness Week in Chhattisgarh : ना कोई इलाज की चिंता, ना डॉक्टर की लंबी कतार—बस योगा मैट या दरी, हँसी-ठिठोली, गुनगुनी चाय की चुस्कियाँ और यादों की बौछार! जी हाँ, छत्तीसगढ़ के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में चल रहे योग एवं वेलनेस सप्ताह (Wellness Week in Chhattisgarh) ने आज कुछ ऐसा ही नज़ारा पेश किया।
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“हँसी और सेहत का दिन”—नाम से ही जाहिर है कि आज बुजुर्गों और किसानों के चेहरे मुस्कुरा उठे l स्वास्थ्य विभाग की इस अनूठी पहल ने योग को गंभीर मुद्राओं से निकालकर मस्ती, मेल-मिलाप और मज़ेदार अनुभवों के मंच पर ला खड़ा किया। 17 से 20 जून तक मनाए जा रहे इस सप्ताह का आज का दिन यानि 19 जून वरिष्ठ नागरिकों, किसानों और ग्रामीण जनों को समर्पित रहाl

स्वास्थ्य विभाग की पहल पर आयोजित यह कार्यक्रम सिर्फ योग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें हँसी, हल्के-फुल्के खेल, आत्मीय संवाद और हर्बल चाय की चुस्कियों के साथ यादों की साझेदारी जैसे भावनात्मक पहलू भी शामिल रहेंगे। आयोजन का उद्देश्य बुजुर्गों और ग्रामीण क्षेत्र के नागरिकों को मानसिक, शारीरिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है।
दिन की शुरुआत योग से व समापन अनुभवों की गरमागरम चाय पर
19 जून को प्रातःकालीन सत्र में वज्रासन, अनुलोम-विलोम और अन्य सरल योगाभ्यास कराए जाएंगे, जिन्हें किसी भी आयु वर्ग के प्रतिभागी आसानी से कर सकें। इसके उपरांत रिंग टॉस और गेंद पास करने जैसे हल्के-फुल्के खेलों के माध्यम से सभी को सहभागिता का अवसर मिलेगा।कार्यक्रम के अंत में हर्बल चाय के साथ प्रतिभागियों को अपने जीवन के अनुभव साझा करने और संवाद की खुली छूट दी गई। योग आयोजनों में वृद्धजनों ने बताया कि कि यह चरण आयोजन का सबसे आत्मीय व भावनात्मक हिस्सा रहा, जहाँ बुजुर्ग ने अपने जीवन के अनुभव साझा किये और किसान अपनी मिट्टी से जुड़ी यादें साझा की ।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल शरीर को स्वस्थ रखना नहीं है, बल्कि भावनात्मक समर्थन, आत्मीयता और सामाजिक संवाद को भी बढ़ावा देना है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि, यह पहल मानसिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण सिद्ध हो रही है।
स्वास्थ्य, स्मृतियाँ और साथ-तीनों का संगम
यह आयोजन केवल शरीर को तंदरुस्त रखने का प्रयास नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को संबल देने का आयोजन है। जब बुजुर्ग अपने अनुभव बाँटेंगे और किसान भाई-बहनों के चेहरे पर मुस्कान होगी, तब समझ आएगा कि असली वेलनेस क्या होती है। (Wellness Week in Chhattisgarh)



