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जानलेवा अंधविश्वास: यहां गर्म सलाखों से दागकर होता है इलाज, हैरान कर देगी हकीकत

कांकेर, छत्तीसगढ़ : आज भी लोग इलाज के लिए झाड़फूक का सहारा ले रहे हैं। वर्तमान में चिकित्सा विज्ञान ने किसी भी बीमारी के इलाज के लिए कई उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन गांव के कुछ इलाकों में अभी भी ऐसे अंधविश्वास से इलाज किया जाता है, जिसे जानकर हैरानी होती है।

गर्म लोहे की छड़ों को दागने की प्रथा

यह अंधविश्वास कई जिंदगियों पर कहर ढा रहा है। गांवों में बीमारियों के इलाज के कई ऐसे तरीके हैं जो न सिर्फ अमानवीय हैं बल्कि जानलेवा भी हैं। एक ऐसा क्षेत्र जहां गर्म लोहे की छड़ों को दागकर रोग का इलाज किया जाता है। जिसे छत्तीसगढ़ की बोलचाल की भाषा में सांख्यिकी कहा जाता है।

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अंधविश्वास की जड़ें

कांकेर के गांवों में इस तरह से बीमारियों का इलाज करने वाले वैद पूरी तरह प्रभावी होने का दावा करते हैं, जबकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। कांकेर जिले के हर पांच से दस गांवों में एक ऐसा डॉक्टर मिलेगा जो कथित तौर पर कई बीमारियों का आकलन कर इलाज करता है। यहां मुफ्त में इलाज किया जाता है। इस उपचार में, दरांती नुमा लोहा आग में लाल हो जाता है और लोगों के शरीर के कुछ हिस्सों को दाग देता है जहां यह पीड़ित होता है।

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यह अवैज्ञानिक तरीका पीड़ितों द्वारा अपनाया जा रहा है और वे इससे राहत मिलने की बात भी करते हैं। डॉक्टर इस विधि को खतरनाक और घातक बताते हैं। यहां के लोग वैद्यतिपापला, गठिया, वात, मिर्गी, बाफर, अंडकोष, धत रोग, बेची, आलचा और कई अन्य बीमारियों का इलाज इस तरीके से कर रहे हैं।

मौन बैठा है प्रशासन

बता दें कि यहां सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि ओडिशा से आते है। महाराष्ट्र से भी लोग आते हैं। डॉक्टर दूर-दूर से आने वाले मरीजों को घर पर रहने और खाने की भी व्यवस्था करते हैं। न केवल कांकेर जिले में बल्कि राज्य के कई अन्य जिलों में भी उन्हें गर्म सलाखों से उपचारित करने की प्रथा अभी भी जारी है और सरकार भी इस अंधविश्वास को रोकने के लिए कोई विशेष कदम नहीं उठा रही है।

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