एलपीजी और मिडिल ईस्ट संकट पर कांग्रेस दो धड़ों में बंटी, राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर निशाना, वरिष्ठ नेता कर रहे विदेश नीति की तारीफ
Differences in Congress: कांग्रेस पार्टी में मिडिल ईस्ट युद्ध और एलपीजी संकट को लेकर दो धड़े नजर आ रहे हैं। एक तरफ पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी लगातार PM नरेंद्र मोदी और सरकार की नीतियों पर सीधे निशाना साध रहे हैं तो वहीं पार्टी के सीनियर नेता इस मुद्दे पर सरकार के कदमों की तारीफ कर रहे हैं। कांग्रेस के चार बड़े नेता कमलनाथ, आनंद शर्मा, शशि थरूर और मनीष तिवारी ने सरकार की विदेश नीति और एलपीजी संकट पर संतुलित रुख अपनाया। पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने गुरुवार को कहा कि भारत का डिप्लोमैटिक तरीका मैच्योर और स्किलफुल रहा। X पर उन्होंने लिखा कि सरकार ने संभावित खतरों से बचाते हुए एक अप्रत्याशित और अस्थिर स्थिति में राजनीतिक नेताओं को नीति निर्णयों की जानकारी देने के लिए ऑल-पार्टी मीटिंग का आयोजन किया।
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उन्होंने आगे लिखा कि नेशनल डायलॉग जारी रहना चाहिए और नेशनल इंटरेस्ट को ध्यान में रखते हुए ठोस और समझदारी भरा रुख अपनाना आज की जरूरत है। इस पोस्ट को भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी साझा किया। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एलपीजी संकट पर कहा कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग राजनीतिक फायदे के लिए जानबूझकर पैनिक फैला रहे हैं। उनके बयान पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी प्रतिक्रिया दी और लिखा कि कांग्रेस के नेता खुद मान रहे हैं कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कमी नहीं है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि मिडिल ईस्ट युद्ध मामले में भारत का संयम स्ट्रैटेजिक समझदारी का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भारत की चुप्पी कायरता नहीं है, बल्कि यह देश के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए दी गई समझदारी भरी प्रतिक्रिया है। (Differences in Congress)
राहुल गांधी का सरकार और PM मोदी पर निशाना
वहीं कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि वेस्ट एशिया में चल रहे युद्ध को लेकर सरकार शायद सही काम कर रही है। 12 मार्च को राहुल गांधी ने चेतावनी दी थी कि आने वाले समय में ईंधन एक बड़ी समस्या बन सकती है। उन्होंने कहा कि गलत विदेश नीति के कारण ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हुई है और सरकार को तुरंत तैयारी करनी चाहिए। वहीं 21 मार्च को राहुल गांधी ने X पर लिखा कि डॉलर के मुकाबले रुपए के कमजोर होने और इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमतों में वृद्धि केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि आने वाली महंगाई के स्पष्ट संकेत हैं। कांग्रेस के भीतर इस समय दो तरह की आवाजें सुनाई दे रही हैं। एक तरफ राहुल गांधी सरकार की विदेश नीति और घरेलू ऊर्जा प्रबंधन पर सवाल उठा रहे हैं तो वहीं वरिष्ठ नेता कमलनाथ, आनंद शर्मा, शशि थरूर और मनीष तिवारी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार की रणनीति की तारीफ की है। इससे स्पष्ट होता है कि पार्टी के भीतर मिडिल ईस्ट युद्ध और एलपीजी संकट को लेकर संतुलन और बहस दोनों मौजूद हैं।



