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टैरिफ बदलाव के बीच भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर बैठक टली, 18% या 15% पर फंसा पेंच

India US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते (ITA) को लेकर अहम बैठक फिलहाल टल गई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के बीच 23 से 26 फरवरी तक वॉशिंगटन में होने वाली बैठक अब स्थगित कर दी गई है। टैरिफ दरों में हालिया बदलाव के बाद दोनों पक्षों ने समझौते की शर्तों की समीक्षा करने का फैसला लिया है। दरअसल, प्रस्तावित समझौते के तहत भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका की ओर से 18 प्रतिशत टैरिफ लागू किया जाना था, लेकिन शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की ओर से सभी वैश्विक टैरिफ रद्द किए जाने के बाद स्थिति बदल गई। इसके तुरंत बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ की घोषणा की और 24 घंटे के भीतर इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया।

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अब 15 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ लागू हो रहा है, जो प्रस्तावित 18 प्रतिशत से कम है। इसी बदलाव के चलते भारत और अमेरिका ने तय किया कि नई परिस्थितियों की समीक्षा के बाद ही बैठक की अगली तारीख तय की जाएगी। इससे ट्रेड डील के फाइनल होने में देरी की आशंका बढ़ गई है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 7 फरवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिका के साथ ट्रेड डील के फ्रेमवर्क की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि भारतीय कृषि उत्पादों को अमेरिका में जीरो टैरिफ पर निर्यात की सुविधा मिलेगी, जबकि अमेरिका के कृषि उत्पादों को भारत में किसी प्रकार की टैरिफ छूट नहीं दी गई है। इसके अलावा भारत ने अगले पांच सालों में अमेरिका से 50 हजार करोड़ डॉलर यानी करीब 45 लाख 30 हजार करोड़ रुपए के उत्पाद खरीदने पर सहमति जताई थी। (India US Trade Deal)

अब भारत पर कितना टैरिफ ?

इसी फ्रेमवर्क के तहत अमेरिकी टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया गया था। साथ ही रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ भी हटाया गया था। टैरिफ में हालिया बदलाव के बाद यह सवाल उठ रहा है कि भारत पर 18 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा या 15 प्रतिशत। इस पर दो तरह के संकेत मिल रहे हैं। पहला राष्ट्रपति ट्रम्प ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत के साथ ट्रेड डील पर कोई असर नहीं पड़ेगा और यह पहले की तरह आगे बढ़ेगी। इससे संकेत मिलता है कि 18 प्रतिशत की पूर्व सहमति बरकरार रह सकती है। दूसरा, एक रिपोर्ट के मुताबिक व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा है कि ब्रिटेन, भारत और यूरोपीय संघ जैसे देशों को अब धारा 122 के तहत 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ का सामना करना पड़ेगा, न कि पहले तय की गई दरों का। हालांकि बाद में इसे 15 प्रतिशत किया गया। 

क्या संकट में है ट्रेड डील ?

अगर इस रिपोर्ट को सही माना जाए तो भारत पर कुल टैरिफ 18 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत रह सकता है। इस विरोधाभासी स्थिति ने डील को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील का फ्रेमवर्क जारी हो चुका है और इसे व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है। संयुक्त बयान के मुताबिक 13 फरवरी 2025 से BTA वार्ता शुरू हुई थी, जिसमें बाजार पहुंच, सप्लाई चेन मजबूत करने और व्यापार बाधाएं कम करने जैसे प्रावधान शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने 20 फरवरी को कहा था कि समझौता फरवरी के अंत तक अंतिम रूप ले लेगा, मार्च में हस्ताक्षर होंगे और अप्रैल से इसे लागू कर दिया जाएगा, लेकिन बैठक टलने से इस समय-सीमा पर असर पड़ सकता है। इस अंतरिम समझौते से भारत को कई अहम लाभ मिलने की उम्मीद थी। (India US Trade Deal)

भारत को क्या फायदे मिलने थे ?

  • अमेरिकी बाजार में भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 18 प्रतिशत तक घटने से निर्यात को बढ़ावा
  • जेनेरिक दवाएं, रत्न और हीरे तथा विमान पार्ट्स पर जीरो टैरिफ
  • भारतीय MSME, किसानों, मछुआरों, महिला और युवा उद्यमियों को अमेरिकी बाजार तक व्यापक पहुंच
  • टेक्सटाइल, चमड़ा, फुटवियर, प्लास्टिक, रबर, ऑर्गेनिक केमिकल्स और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा
  • विमान पार्ट्स पर अमेरिकी सेक्शन 232 के तहत छूट
  • ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ रेट कोटा के जरिए विशेष पहुंच
  • जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स के लिए बेहतर नियामक शर्तें

कृषि और डेयरी सेक्टर सुरक्षित

भारत ने इस समझौते में अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर, एथेनॉल, तंबाकू और कुछ सब्जियों-मांस उत्पादों पर अमेरिका को कोई टैरिफ रियायत नहीं दी गई है। यह फैसला किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए लिया गया। हालांकि संयुक्त बयान के अनुसार भारत ने कुछ अमेरिकी कृषि और खाद्य उत्पादों जैसे ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, रेड सोरघम, ड्राई फ्रूट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन ऑयल, वाइन और स्पिरिट्स पर आयात शुल्क घटाने या समाप्त करने पर सहमति जताई है। फिलहाल टैरिफ को लेकर स्पष्टता का इंतजार है। दोनों देशों की ओर से समीक्षा के बाद नई बैठक की तारीख घोषित की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर टैरिफ दर 15 प्रतिशत पर स्थिर रहती है तो भारत को बेहतर स्थिति मिल सकती है, लेकिन आधिकारिक घोषणा तक अनिश्चितता बनी रहेगी। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संशोधित टैरिफ ढांचे के बीच भारत-अमेरिका ट्रेड डील किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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