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Supreme Court में जजों की संख्या बढ़ेगी: केंद्र सरकार का फैसला, 34 से 38 करने को कैबिनेट की मंजूरी

Supreme Court : केंद्र सरकार ने न्यायिक व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जजों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की कुल संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक मुख्य न्यायाधीश सहित 34 जजों का प्रावधान है, जबकि फिलहाल 33 न्यायाधीश कार्यरत हैं। प्रस्तावित संशोधन के बाद मुख्य न्यायाधीश सहित कुल संख्या 38 हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में संसद के आगामी सत्र में विधेयक पेश किया जाएगा। इसके पारित होने के बाद नई व्यवस्था लागू होगी। सरकार का मानना है कि इससे लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और न्याय प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान में 92 हजार से अधिक मामले लंबित हैं। इससे पहले वर्ष 2019 में जजों की संख्या 31 से बढ़ाकर 33 की गई थी।

समय के साथ बढ़ती रही संख्या

सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 के तहत प्रारंभ में मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर 10 जजों का प्रावधान था। बाद में समय-समय पर इसमें वृद्धि की गई—1960 में 13, फिर 17, वर्ष 1986 में 25 और 2009 में 30 जजों तक संख्या बढ़ाई गई।

संविधान में प्रावधान

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के अलावा अन्य जजों की संख्या तय करने का अधिकार संसद को है। बढ़ते मामलों के मद्देनजर समय-समय पर इसमें संशोधन किया जाता रहा है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जजों की संख्या बढ़ाने से ही न्याय में देरी की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी, इसके लिए न्यायिक ढांचे में अन्य सुधार भी आवश्यक हैं।

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