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मोदी सरकार में जो हथियार उठाएगा उन्हें हिसाब देना पड़ेगा, जो गोली चलाता है, उसको जवाब भी गोली से ही मिलेगा: केंद्रीय गृहमंत्री शाह

Shah Warning to Naxals: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नक्सलवाद को लेकर कहा कि लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है कि किसी भी समस्या का समाधान बहस से निकल सकता है, हथियारों से नहीं। उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने इस देश में वैक्यूम खड़ा करने का प्रयास किया, स्टेट का वैक्यूम, सारी व्यवस्थाएं नष्ट कर गवर्नेंस का वैक्यूम, संविधान से श्रद्धा खत्म कर संविधान का वैक्यूम और पुलिस थानों को जलाकर सिक्योरिटी वैक्यूम खड़ा करने का प्रयास किया है। गृहमंत्री ने कहा कि माओवादी और नक्सली हिंसा करने वालों के दिन अब लद गए हैं और मोदी सरकार में ये लंबे समय नहीं चलेगा। शाह ने कहा कि नक्सलियों को अन्याय के खिलाफ हथियारों की लड़ाई लड़ने वालों की तरह मानने की गलती नहीं करनी चाहिए, क्योंकि वामपंथी विचारधारा अपना आधार खो बैठी है। इसलिए सारे वामपंथी अलग-अलग थ्योरी रच-रच कर अपने अस्तित्व को बचाने में लगे हैं।

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उन्होंने कहा कि इनका एकमात्र एजेंडा है, देश में वैक्यूम खड़ा करना है। स्टेट, गवर्नेंस, संविधान और सिक्योरिटी का वैक्यूम खड़ा कर रक्तपात करना ही उनका उद्देश्य है, जो अब सफल नहीं होगा। शाह ने कहा कि नक्सलियों ने कई सारे भोले-भाले ग्रामीणों को एनिमी इन्फॉर्मर बताकर फांसी पर चढ़ा दिया। इन्होंने जनता अदालत के नाम से एक दिखावा किया, जहां न कोई वकील है, न जज है, वे स्वयं बैठे हैं, स्वयं फैसले करते हैं और फांसी देते हैं। नक्सलियों ने ना जनता ना सरकार के नाम से एक भ्रांति खड़ी की और विकास योजनाओं को रोकने का काम किया। इन्हें संविधान और न्याय व्यवस्था को निशाना बनाकर संविधान का वैक्यूम खड़ा करना था, जो लोग अब कह रहे हैं बातचीत करो, उनको पता होना चाहिए कि मैं 50 बार सार्वजनिक मंचों पर बस्तर में जाकर कह चुका हूं कि हथियार डाल दीजिए, सरकार आपके पूरे पुनर्वास की व्यवस्था करेगी। (Shah Warning to Naxals)

गोली चलाने वालों को गोली से ही जवाब मिलेगा: शाह

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की पॉलिसी है, चर्चा उसी से होती है, जो हथियार डालता है, लेकिन जो गोली चलाता है, उसको जवाब गोली से ही दिया जाता है। शाह ने कहा कि जैसे ही रूस में साम्यवादियों की सरकार का गठन हुआ, यहां पर 1925 में सीपीआई की स्थापना हुई। जब रूस में कम्युनिस्टों की सरकार बनी, उसी वक्त यहां सीपीआई की स्थापना हुई। इसके बीच में कोई रिलेशनशिप है क्या? रूस की सरकार ने स्पॉन्सर कर दुनियाभर में कम्युनिस्ट पार्टी की रचना की। अब जिस पार्टी की नींव ही किसी दूसरे देश की प्रेरणा से की गई है, वो हमारे देश का भला कैसे सोचेगी? इन्होंने तो अंग्रेजों का भी समर्थन किया था। 1964 में कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सिस्ट बनी, ये भी समझने की बात है कि सीपीआईएम क्यों बना? यह भी समझना पड़ेगा कि जब सीपीआई थी, तो फिर सीपीआईएम क्यों बनी? 1964 में सोवियत रूस और चीन के बीच झगड़ा हुआ तो दोनों साम्यवादी राष्ट्र के अंदर अलग-अलग विचारधारा की साम्यवादी सरकारें आई।

नक्सलियों का उद्देश्य अधिकारों की रक्षा नहीं था: शाह

गृहमंत्री ने कहा कि जैसे ही अलग-अलग विचारधारा की सरकारें आई, तो यहां पर चीन की एक समर्थित पार्टी सीपीआई मार्क्सिस्ट बना दी। इसके बाद 1969 में संसदीय राजनीति का विरोध करने के लिए सीपीआई एमएल मार्क्सिस्ट की स्थापना हुई। इसका उद्देश्य विकास का वैक्यूम बनाना या अधिकारों की रक्षा नहीं था, बल्कि उसके संविधान में उद्देश्य था संसदीय राजनीति का विरोध कर सशस्त्र क्रांति करना। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि इन्होंने सशस्त्र क्रांति और संसदीय राजनीति का विरोध करने के दो उद्देश्यों के साथ सीपीआई मार्क्सिस्ट बनाई और यही आज के माओइस्ट हैं। उसके बाद 1975 में जैसे ही कांग्रेस का समर्थन मिला, एमसीसी माओइस्ट बनी और बिहार झारखंड केंद्रीय पार्टी बनी। फिर पीडब्ल्यूजी 1980 में बना। वह आंध्र केंद्रित बना। 1982 में दलित किसान केंद्रीय सशस्त्र संघर्ष सीपीआई एमएल पार्टी यूनिटी बिहार में बनी।

कुछ लोग चर्चा से मानते नहीं है: गृहमंत्री शाह

उन्होंने कहा कि दलित किसान केंद्रीय संघर्ष उनका उद्देश्य था। 1998 में पीपल्स वॉर ग्रुप बना और उसमें नक्सलियों का एकत्रीकरण हुआ। इतना सब करने के बाद भी वह सफल नहीं हुए और 2000 में पीएलजीए बना, गुरिल्ला फोर्स बनाई और 2004 में ये पीडब्ल्यूजी एमसीसी का विलय हो गया। 2014 में मोदी जी आए और 2026 में सब की समाप्ति हो गई। ये 1925 से लेकर 2026 तक 101 साल का उनका इतिहास है। इसे अन्याय के खिलाफ संघर्ष का स्वरूप मानकर महिमामंडित मत करो। ये लोग वोट की जगह बुलेट से शासन प्राप्त करना चाहते हैं। कुछ लोग चर्चा से मानते नहीं है, वहां बल प्रयोग कर उनके अत्याचार से निर्दोष नागरिकों को बचाना पड़ता है। ये हमारी पार्टी की सरकार है और हर नागरिक की सुरक्षा नरेन्द्र मोदी जी ने सुनिश्चित की है, जो भी नागरिकों के साथ अन्याय करेगा, समझा तो ठीक है वरना ये फोर्स इसी के लिए बनाई गई है। इसका उपयोग भी होगा, परिणाम भी आएगा और आज आ भी गया है।

बुद्धिजीवियों पर साधा निशाना

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि मैंने बहुत से बुद्धिजीवियों के आर्टिकल्स पढ़े, जो नक्सलियों के मानव अधिकार की बात कर रहे थे, उनमें से एक भी आर्टिकल उस मां के लिए नहीं था जिसके बच्चे को नक्सली जबरदस्ती उठा ले गए या उन शहीदों की विधवाओं के लिए जिनको नक्सालियों ने मारा। अर्बन नक्सली कहते हैं कि हथियार उठाकर घूमने वाले माओवादियों के साथ चर्चा करो, क्योंकि वो अन्याय के लिए लड़ रहे हैं, उन्हें मारना नहीं चाहिए और इनके प्रति सिंपैथी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक भी बुद्धिजीवी दिव्यांग बनने वाले किसान, 5000 से ज्यादा सिक्योरिटी फोर्सेज के जवानों, उनकी विधवाओं के लिए नहीं है, इनके अनाथ बच्चों के लिए नहीं लिखता। उन्होंने कहा कि इनकी मानवता संविधान तोड़कर हथियार लेकर घूमने वालों के लिए ही है। इनके हथियारों से जो नागरिक मारे जा रहे हैं, इनके लिए आपकी मानवता नहीं है। मानवता के दोहरे चरित्र को स्वीकार नहीं कर सकते, यह मानवतावादी नहीं हैं, बल्कि नक्सलियों के समर्थक हैं। ये लोग गरीबों के हाथ में हथियार देकर अपनी विचारधारा को फैलाना चाहते हैं, लेकिन उनके भी दिन लद गए हैं। (Shah Warning to Naxals)

सलवा जुडूम की शुरुआत महेंद्र कर्मा ने की थी: शाह

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि सलवा जुडूम की शुरुआत 2005 में सरकार समर्थित जनआंदोलन के रूप में हुई। आदिवासी युवाओं को एसपीओ बनाया गया और उनको आतंक फैलाने वालों के सामने लड़ने के लिए ट्रेनिंग दी गई। सलवा जुडूम की शुरुआत महेंद्र कर्मा ने की थी, जिन्हें नक्सलियों ने मौत के घाट उतार दिया था। 5 जुलाई 2011 को सर्वोच्च अदालत ने नंदिनी सुंदर और अन्य लोगों ने एक विवाद दायर किया और सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस सुदर्शन रेड्डी के नेतृत्व में तय किया कि नक्सलियों के खिलाफ राज्य की ये लड़ाई गैरकानूनी है और तुरंत ही इनको हथियार वापस देने का ऑर्डर कर दिया। इसका परिणाम हुआ उनके हथियार वापस दिए गए और इन्होंने चुन-चुन कर सलवा जुडूम से जुड़े हुए लोगों को मार दिया और वही सुदर्शन रेड्डी विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के प्रत्याशी बने, जो देश की कानून और व्यवस्था को मानते हैं, वो सुदर्शन रेड्डी को कभी अपना प्रत्याशी नहीं बनाते।

सुदर्शन रेड्डी पर साधा निशाना

उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति जज बनकर अपनी व्यक्तिगत आइडियोलॉजी का उपयोग कर, संवैधानिक कपड़े पहनकर, अपनी आइडियोलॉजी को ऑर्डर में कन्वर्ट कर, हजारों बेगुनाह आदिवासियों की जान जाए ऐसा फैसला देता है, तो इस जजमेंट की घोर निंदा करते हैं। आइडियोलॉजी जनता के कल्याण से ऊपर नहीं है। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 2014 के बाद नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्र में 17,589 किलोमीटर सड़कें बनाने की मंजूरी दी है, जिसमें 12,000 किलोमीटर सड़कें बन चुकी हैं। विकास इसीलिए हो रहा है कि धीरे-धीरे-धीरे नक्सलवाद समाप्त हो रहा है। लगभग-लगभग 5,000 मोबाइल टावर, 6,000 करोड़ के खर्चे से हम लगा चुके हैं। दो अन्य योजनाओं में और 8,000 4G टावर बनाने का फैसला नरेंद्र मोदी ने किया है। 1804 बैंक शाखाएं 12 साल में खुली हैं, 1321 एटीएम खुले हैं, 37,850 बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंस बनाए गए और 6025 डाकघर खुले। यह सब सिर्फ 12 साल में हुआ है।

हमने धमाके करने वालों को समाप्त किया: शाह

उन्होंने कहा कि हमने नक्सलियों के साथ चर्चा नहीं की, उन्हें समाप्त किया और विकास को आगे बढ़ाया। 259 एकलव्य आदर्श विद्यालय बनाए, इसके साथ-साथ 46 आईटीआई, 49 स्किल डेवलपमेंट सेंटर बनाए, 16 कौशल विकास केंद्र बनाए और लगभग इस सबके लिए 800 करोड़ रुपए का खर्च 12 साल में हमने किया है। सिविक प्रोग्राम में 212 करोड़ के कार्य किए जो स्वास्थ्य शिविर और दवाओं से जुड़े हुए हैं और जनजाति युवा एक्सचेंज के कार्यक्रम भी हमने बनाए। सिक्योरिटी के लिए राज्यों की सहायता के लिए एसआरई लेकर आए, जिसमें 10 साल में 3000 करोड़ दिया। स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम लेकर आए और इसमें 5000 करोड़ दिया। उन्होंने पूछा कि ये सब 1970 से अब तक क्यों नहीं हुआ था ? पिछली सरकारें करने जाती थी तो वो धमाके कर मार देते थे। हमने धमाके करने वालों को समाप्त किया तो अब विकास हो रहा है। (Shah Warning to Naxals)

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