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गरीबी के कारण नक्सलवाद नहीं फैला, नक्सलवाद के कारण गरीबी फैली: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह

Amit Shah on Naxalism: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नक्सलवाद से देश को मुक्त कराने के प्रयास पर चर्चा का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि नक्सली और उनके समर्थकों ने भोले-भाले आदिवासियों के सामने एक गलत प्रकार का नेरेटिव रखा गया था कि वे उनके अधिकारों और उन्हे न्याय दिलाने के लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज बस्तर से नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है और वहां हर गांव में स्कूल बनाने और राशन की दुकान खोलने की मुहिम शुरू हो चुकी है। गृहमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद की वकालत करने वाले बताएं कि 1970 से अब तक यह सब क्यों नहीं हुआ।

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उन्होंने कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद पूरे देश के हर गरीब को घर, गैस, पीने का पानी, 5 लाख तक का बीमा, 5 किलो मुफ्त अनाज मिला, लेकिन बस्तर वाले छूट गए, क्योंकि सत्य को झुठलाया गया और लाल आतंक की परछाई के कारण वहां विकास नहीं पहुंचा था। शाह ने कहा कि लाल आतंक इसीलिए नहीं था कि वहां विकास नहीं था, बल्कि लाल आतंक के कारण वहां विकास नहीं हुआ था, लेकिन आज लाल आतंक की परछाई हट गई है और बस्तर विकसित हो रहा है। अमित शाह ने कहा कि यह नरेंद्र मोदी की सरकार है और जो भी हथियार उठाएगा उसे हिसाब चुकता करना पड़ेगा। (Amit Shah on Naxalism)

हमारी सरकार संवेदनशील है: शाह

गृहमंत्री ने कहा कि सरकार संवेदनशील है और सभी समस्याओं को सुनना और उनका निराकरण करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने योजनाएं बनाई हैं, लेकिन ये उन पर अमल नहीं करने देंगे, क्योंकि वामपंथी उग्रवादी और उनके समर्थकों की आइडियोलॉजी यानी उनका अवैध शासन वहां चलता रहे। शाह ने कहा कि आजादी के बाद 75 साल में से 60 साल तक देश में मुख्य विपक्षी पार्टी का शासन रहा, तब भी आदिवासी विकास से महरूम कैसे रहे। उन्होंने कहा कि विकास तो अब नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टी को अपने अंदर झांककर देखना चाहिए कि दोषी कौन है। (Amit Shah on Naxalism)

12 राज्यों में पूरा रेड कॉरिडोर बनाकर रखा था: शाह

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, झारखंड, बिहार, बंगाल, केरल, कर्नाटक के कुछ हिस्से और उत्तर प्रदेश के 3 जिलों समेत 12 राज्यों में पूरा रेड कॉरिडोर बनाकर रखा था। इन क्षेत्रों में 12 करोड़ लोग सालों तक गरीबी में जीते रहे और 20,000 युवा मारे गए। इसके लिए कौन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद का मूल कारण विकास की मांग नहीं, बल्कि एक आइडियोलॉजी है। नक्सलवाद का मूल कारण विकास की कमी नहीं, बल्कि वामपंथी विचारधारा है, जिसे 1969 में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए तत्कालीन सत्तारूढ़ दल की नेता ने स्वीकार कर लिया था। शाह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पूरे देश के सामने स्वीकारा किया था कि कश्मीर और नॉर्थईस्ट की तुलना में देश की आंतरिक सुरक्षा के सामने सबसे बड़ी समस्या हथियारबंद माओवादी हैं।

2014 में सत्ता परिवर्तन के बाद हुआ बदलाव: शाह

उन्होंने कहा कि 2014 में परिवर्तन हुआ और प्रधानमंत्री मोदी जी के शासन में कई सालों पुरानी समस्याओं का निराकरण हुआ, धारा 370 और 35A हट गई, राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बन चुका है, GST आज वास्तविकता बन चुका है, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) बन चुका है, विधायी मंडलों में मातृशक्ति को 33% आरक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा कि आजादी के वक्त से इस देश की जनता जो कई सारे बड़े काम चाहती थी वे सभी काम नरेंद्र मोदी के शासन के 12 साल में हुए और अब नक्सलवाद से मुक्त भारत की रचना भी नरेंद्र मोदी के शासन के अंदर ही होगी। शाह ने कहा कि पिछले 12 साल देश के लिए बहुत शुभ साबित हुए हैं। देश को गरीबी से मुक्ति दिलाने, युवाओं के लिए नई शिक्षा पद्धति लाने, आंतरिक और बाह्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने, देश के मूलों से न जुड़ी नीतियों को दरकिनार करने के लिए गत 12 साल में बहुत कुछ हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर सबसे ज्यादा ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसले को देखा जाए तो निसंकोच नक्सलमुक्त भारत सबसे ऊपर होगा।

गृहमंत्री ने सुरक्षाबल के जवानों को दिया श्रेय

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि नक्सलमुक्त भारत जो बड़ी घटना देश में आकार लेने जा रही है, उसका पूरा श्रेय हमारे केंद्रीय सशस्त्र पुलिसबलों, विशेषकर कोबरा और सीआरपीएफ के जवानों, राज्य पुलिस, विशेषकर छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस और डीआरजी के जवानों और स्थानीय आदिवासियों को जाता है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के समाप्त होने में जनता का भी बड़ा योगदान है। अमित शाह ने कहा कि इस विचारधारा का विकास और विकास की मांग से भी कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि यह कौन सी विचारधारा है? क्या है माओवादी विचारधारा? इसका ध्रुव वाक्य क्या है? इनका ध्रुव वाक्य है कि सत्ता बंदूक की नली से निकलती है। ये विकास के लिए नहीं, बल्कि अपनी आइडियोलॉजी के अस्तित्व, उसकी विजय और आइडियोलॉजी को भोले-भाले आदिवासियों में फैलाकर कर सत्ता हासिल करने के लिए है। इनका लोकतंत्र पर कोई विश्वास नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने इनकी तुलना भगत सिंह और बिरसा मुंडा से कर दी।

आदिवासियों को बरगलाकर हथियार पकड़ाए: शाह

उन्होंने कहा कि शहीद भगत सिंह और भगवान बिरसा मुंडा, जो अंग्रेजों के सामने लड़े, उनकी तुलना आप संविधान तोड़कर हाथ में हथियार लेकर निर्दोषों की हत्या करने वालों लोगों के साथ कर रहे हैं? यह विचारधारा कहती है कि दीर्घकालीन युद्ध ही उनकी विचारधारा को फैला सकता है। उनको अपने लोगों का खून बहाने से भी कोई परहेज नहीं है। इस विचारधारा के समर्थकों ने भगवान बिरसा मुंडा, शहीद भगत सिंह या सुभाष चंद्र बोस को नहीं बल्कि माओं को अपना आदर्श माना है। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि सच्चाई यह है कि इन्होंने पूरे रेड कॉरिडोर को इसीलिए चुना था, क्योंकि वहां राज्य की पहुंच कम थी। भोले भाले आदिवासियों को बरगलाकर उनके हाथों में हथियार पकड़ा दिए गए। उन्होंने कहा कि जो आदिवासी 15 अगस्त 1947 से पहले भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, रानी दुर्गावती, मुर्मू बंधुओं को हीरो मानकर चलता था, वह आदिवासी 1970 आते-आते माओ को अपना हीरो कैसे मानने लगा ?

अब घर-घर पहुंच रहा विकास: केंद्रीय गृहमंत्री

शाह ने कहा कि विकास और अन्याय के कारण नहीं, बल्कि कठिन भूगोल और राज्य की अनुपस्थिति के कारण अपनी विचारधारा को फैलाने के लिए वामपंथियों ने इस क्षेत्र को चुना और भोले-भाले आदिवासियों को बरगलाना शुरू किया। उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने सालों तक उस क्षेत्र में विकास को पहुंचने नहीं दिया, लेकिन अब नरेंद्र मोदी के शासन में वहां घर-घर विकास पहुंच रहा है। गृहमंत्री ने कहा कि गरीबी के कारण नक्सलवाद नहीं फैला, बल्कि नक्सलवाद के कारण इस पूरे क्षेत्र में सालों तक गरीबी रही। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की जड़ें गरीबी और विकास से नहीं जुड़ी, बल्कि वैचारिक हैं। शाह ने कहा कि नक्सलबाड़ी में साक्षरता का दर 32%, बस्तर में 23%, सहरसा, बिहार में 33% और बलिया, उत्तर प्रदेश में 31% था। इसी तरह नक्सलबाड़ी में प्रति व्यक्ति आय 500, बस्तर में 190, सहरसा में 299 और बलिया में 374 थी।

1970 के दशक में नक्सलवाद की शुरुआत: शाह

उन्होंने कहा कि चारों क्षेत्र में प्रति व्यक्ति आय भी एक समान थी, लेकिन नक्सलबाड़ी और बस्तर में नक्सलवाद पनपा और सहरसा और बलिया में नहीं। ऐसा इसीलिए हुआ, क्योंकि सहरसा और बलिया का भूगोल उनके अनुकूल नहीं था, वहां घने जंगल, नदी नाले, छुपने की पहाड़ियां नहीं थी, हथियार लेकर अपनी मूवमेंट करने, आदिवासियों को दबाने और उनको जबरदस्ती अपनी आइडियोलॉजी के साथ जोड़ने की अनुकूलता नहीं थी। उन्होंने कहा कि अगर विकास ही पैमाना होता, अगर प्रति व्यक्ति आय ही पैमाना होता तो देश के बहुत सारे हिस्से ऐसे थे, जहां 1970 में विकास नहीं पहुंचा था, लेकिन वहां नक्सलवाद क्यों नहीं फैला ? केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि ये डरने वाली नहीं, बल्कि सबके साथ न्याय करने वाली सरकार है। उन्होंने कहा कि 1970 के दशक में नक्सलवाद की शुरुआत नक्सलबाड़ी और बंगाल से हुई। 1971 के एक ही साल में वहां 3620 हिंसा की घटनाएं हुई थी।

सत्ता के समर्थन के बगैर नक्सलवाद फैलना संभव नहीं: शाह

गृहमंत्री शाह ने कहा कि 1980 का दशक आते-आते पीपल्स वॉर ग्रुप बन गया और फिर यह महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा राज्यों में फैला। 1990 के दशक में वामपंथी विचारधारा सिकुड़ती गई और यहां पर भी उग्रवादी गुटों और वामपंथी पार्टियों में विलय शुरू हुआ। 2004 में दो प्रमुख गुट मिल गए और सीपीआई माओवादी का गठन किया। 1970 से 2004 के कालखंड में चार साल छोड़कर पूरा समय मुख्य विपक्षी पार्टी का शासन रहा है। शाह ने कहा कि यही समय है जब नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ ये आंदोलन 12 राज्यों, देश के 17% भूभाग और 10% से ज्यादा आबादी में पहुंच गया। उन्होंने कहा कि सत्ता के समर्थन के बगैर देश के बीचो-बीच, तिरुपति से लेकर पशुपतिनाथ तक, रेड कॉरिडोर संभव ही नहीं था। उन्होंने कहा कि जो हथियार पकड़े गए हैं, उसमें से 92% हथियार पुलिस से लूटे हुए थे। थाने लूट लिए गए, गोलियां लूट ली गई और उनका उपयोग निर्दोष जवानों, बच्चों, कृषकों को मारने के लिए किया गया। वामपंथी विचारधारा ने इसे एक भ्रांति की तरह प्रोपेगेंडा के माध्यम से अपनी विचारधारा को टिकाने के लिए फैलाया कि अन्याय से बचने के लिए हथियार हाथ में उठाए।

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