07 सितम्बर 2021 : आज मंगलवार को मंगल ग्रह, अनिष्ट नाशक एवं सफलता के लिए करें यह उपाय

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आज के उपाय – 07 सितम्बर 2021, दिन – मंगलवार। आज मंगलवार का ग्रह जन्य अनिष्ट निवारण के उपाय। उपाय आवश्यक हैं क्योकि दिन की घटनाएँ ग्रह के प्रभाव से घटित होती हैं। तिल का तेल, लाल रंग (चुकंदर,लाल पत्ते की भाजी,कोई भी लाल रंग की सब्जी ) व काँसे के बर्तन में भोजन करना निषिद्ध है।

कार्य के पूर्व : विष्णु जी की पूजा। ॐ विष्णवे नम:।।
रोजगार, व्यापर या कार्य विशेष हेतु प्रस्थान के पूर्व : मीठा या गुड़ खाकर, गरम दूध पीकर निकले।

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मंगल ग्रह अनिष्ट नाशक एवं सफलता हेतु आज मंगलवार का उपाय

1. सुख, सौभाग्य वृद्धि के लिए : जटामांसी, मौलश्री लाल पुष्पजल मे मिला कर स्नान करे।
2. दान-गुड,मसूरतांबा ,लाल चन्दन युवा पुरुष, रक्षक, कनेर लाल पुष्प।
3. दान किसे दे – युवा अवश्यक – लाल बैल, युवा लड़का, राष्ट्रीय सुरक्षा कर्मी, चौकीदार को दे।
4- 3- दिन दोष आपत्ति निराककरण के लिए घर से प्रस्थान पूर्व क्या खाएं–

मंगल ग्रह गायत्री मंत्र पंचपाद : 

(गायत्री मन्त्र पश्चात् गृहस्थ को आवश्यक है बोलना)
आपो ज्योति रस अमृतम। परो रजसे सावदोम।

1. अङ्गारक, भौम, मङ्गल, कुज ॐ वीरध्वजाय विद्महे विघ्नहस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात्॥
2. ॐ अङ्गारकाय विद्महे भूमिपालाय धीमहि तन्नः कुजः प्रचोदयात्॥
3. ॐ चित्रिपुत्राय विद्महे लोहिताङ्गाय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात्॥
4. ॐ अङ्गारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात्॥
आपो ज्योति रसोंमृतम, परो रजसे सावदोम।

केतु

ॐ अश्वध्वजाय विद्महे शूलहस्ताय धीमहि तन्नः केतुः प्रचोदयात्॥
ॐ चित्रवर्णाय विद्महे सर्परूपाय धीमहि तन्नः केतुः प्रचोदयात्॥
ॐ गदाहस्ताय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नः केतुः प्रचोदयात्॥
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः।

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जैन धर्म मंत्र : 
ॐ ह्रीं णमो सिद्धाणं।
ॐ ह्रीं मंगल ग्रहारिष्ट निवारक श्री वासु पूज्यजिनेन्द्राय नम।
सर्व शांतिं कुरु कुरु स्वाहा।
मम (..अपना नाम ) दुष्ट ग्रह रोग कष्ट निवारणं सर्व शांतिं कुरू कुरू हूँ फट् स्वाहा।

मंगल शीघ्र फलदायी

भूमि पुत्रो महातेजा जगतां भयकृत् सदा।
वृष्टिकृद् वृष्टिहर्ता च पीडां हरतु में कुज:।।
भूमि के पुत्र महान् तेजस्वी जगत् को भय प्रदान करने वाले वृष्टि करने वाले तथा वृष्टि का हरण करने वाले मंगल (ग्रहजन्य) मेरी पीड़ा का हरण करें।। “ब्रह्माण्ड पुराण”

वेद मन्त्र भौम :
ॐ अग्निमूर्धा दिव: ककुत्पति: पृथिव्या अयम्।
अपां रेतां सि जिन्वति।। (यजु. 3।12)

शाबर मन्त्र : (श्रद्धा आवश्यक शुद्धता सामान्य)
ओम गुरूजी मंगलवार मन कर बन्दा, जन्म मरण का कट जावे फन्दा।

जन्म मरण का भागेकार, तो गुरू पावूं मंगलवार। मंगलवार भारद्वाज गोत्र, रक्त वर्ण दस हजार।।
जापअवन्तिदेश। दक्षिण स्थान त्रिकोण मंडल तीन अंगुल, वृश्चिक मेष राशि के गुरूको नमस्कार।
सत फिरे तो वाचा फिरे। पान फूल वासना सिंहासन धरै।
तो इतरो काम मंगलवार जी महाराज करे। ओम फट् स्वाहा ll

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