चिटफंड घोटाला : सिर्फ रायपुर जिले में ही आये 1.50 लाख आवेदन, छाटनें में ही लगेंगे एक महीने

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रायपुर। छत्तीसगढ़

चिटफंड कंपनी में पैसे गंवाने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। 2 अगस्त से जिन लोगों की रकम डूबी उनसे अर्जी ली जा रही है। शनिवार तक 1.50 लाख से ज्यादा अर्जियां केवल रायपुर तहसील में ही जमा हुई हैं। 20 लाख तक के पीड़ित आवेदन जमा किये जायेंगे। उसके बाद आवेदनों की छटाई कर ये परिक्षण किया जायेगा कि किस कंपनी के कितने पीड़ित हैं। कौन सी चिटफंड कंपनी ने कितनी रकम लोगों से ठगी है। माना जा रहा है की इस काम में एक महीने से ज्यादा का समय लग जायेगा।

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आवेदनों की स्क्रूटनी के साथ ये परिक्षण भी शुरू कर दिया गया है की किस कंपनी की कितनी और कहां-कहां प्रॉपर्टी है। इससे ये पता चल सकेगा कि किस कंपनी की कितनी संपत्ति नीलामी होने पर कितनी पीड़ितों की पैसे वापस किये जा सकेंगे। अफसरों के अनुसार आवेदनों की संख्या ज्यादा होने के कारण से स्क्रूटनी के लिए तहसील कर्मचारियों के साथ दूसरे विभाग के अधिकारीयों और कर्मचारियों की भी मदद ली जा रही है। बताया जा रहा है की ये पूरा काम ऑनलाइन किया जायेगा। ताकि कभी भी किसी भी आवेदक का आवेदन चेक किया जा सके।

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चिटफंड कंपनियों की संपत्ति की नीलामी पहले

मिली जानकारी के अनुसार चिटफंड कंपनियों में डूबी रकम सम्बंधित कंपनी की प्रॉपर्टी नीलाम करने के बाद ही पीड़ितों को पैसे बांटे जायेंगे। अफसरों के अनुसार कई कंपनियों की प्रॉपर्टी की कीमत समय के साथ बढ़ गई है। ऐसे में पहले जो आंकलन किया गया था हो सकता है उससे ज्यादा पैसे मिल जाएं। फ़िलहाल पीड़ितों से आवेदन लेने रायपुर जिले में तीन नोडल अफसर बनाये गए हैं।

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कहां से आएगी इतनी बड़ी रकम

पुलिस के आंकड़ों के अनुसार केवल राजधानी में ही 60 से ज्यादा कंपनियों ने लगभग 500 करोड़ की ठगी की गई है। अभी प्रशासन के पास 16 कंपनियों की 12 करोड़ के लगभग संपत्ति सीज है। इन सभी प्रॉपर्टी की नीलामी में कानून पेंच हैं, क्योकि इन संपत्ति के मामले कोर्ट में लंबित है। प्रशासन ने जैसे ही नीलामी की प्रक्रिया शुरू की, उस कंपनी ने कोर्ट में याचिका दायर कर स्टे ले लिया। कोर्ट से फैसला आने तक प्रॉपर्टी को नीलम नहीं किया जा सकता। अफसरों ने बताया की कोर्ट से अंतिम फैसला आने के बाद ही संपत्ति की नीलामी की जा सकेगी।

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