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शेखचिल्ली का शोरबा निकला मोदी सरकार का बजट : भूपेश बघेल

आम जनता, किसान, युवा और मिडिल क्लास के लिए बजट में कुछ नहीं, पूर्व CM का केंद्र पर हमला

Budget 2026 : केंद्रीय बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि यह बजट “शेखचिल्ली का शोरबा” साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार यह दावा करती रही कि देश विश्व की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है और विश्व गुरु बन गया है, लेकिन इस बजट ने इन दावों की हकीकत उजागर कर दी है।

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पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025-26 में न तो सरकार राजस्व बढ़ा सकी और न ही टैक्स वसूली को मजबूत कर पाई। इस बार भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत तथाकथित “धुआंधार बजट” में धुआं तो बहुत है, लेकिन उसकी धार बेहद कमजोर है।

भूपेश बघेल ने कहा कि यह बजट आम जनता के लिए घोर निराशाजनक है। मोदी सरकार के इस बजट (Budget 2026) से मिडिल क्लास, लोअर मिडिल क्लास, गरीब, किसान, मजदूर और युवा—सभी वर्ग निराश हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट पूरी तरह से अव्यावहारिक, अन्यायपूर्ण और मिडिल क्लास विरोधी है।

उन्होंने कहा कि बजट (Budget 2026) के बाद शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली है और निवेशक बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। लगातार गिरते बाजार से यह साफ है कि मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर से जनता और निवेशकों का भरोसा टूट चुका है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में युवाओं के रोजगार के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया है। निवेशक नए निवेश से घबरा रहे हैं, पहले से चल रहे उद्योग और व्यापार संकट में हैं, जबकि सरकार केवल मुंगेरीलाल के हसीन सपने दिखा रही है।

महिलाओं के संदर्भ में उन्होंने कहा कि बजट में महिला सशक्तिकरण के लिए भी कोई ठोस प्रावधान नहीं है। मोदी सरकार की प्राथमिकताओं में जनकल्याणकारी योजनाएं शामिल नहीं हैं। खाद सब्सिडी, खाद्य सब्सिडी, मनरेगा, एमएसपी की गारंटी, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार एमएसपी और सामाजिक सुरक्षा के लिए बजट में कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया है।

भूपेश बघेल ने कहा कि न तो बढ़ती महंगाई से निपटने का कोई उपाय है और न ही बढ़ती बेरोजगारी रोकने का कोई प्रयास। विदेशी परिस्थितियों के कारण बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव को रोकने का भी कोई स्पष्ट संकल्प इस बजट में नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि यह कटौती का बजट है और प्रधानमंत्री मोदी अब “काटने में लग गए हैं, बांटना तो वे पहले ही शुरू कर चुके हैं।”

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