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छत्तीसगढ़ में अवैध धर्मांतरण पर सख्त कानून लागू, अब बिना प्रक्रिया धर्म बदलना पड़ेगा भारी

Law on Conversion Apply: छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण से जुड़े मामलों पर अब सख्ती बढ़ गई है। राज्य में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद यह औपचारिक रूप से कानून बन गया है। 6 अप्रैल को राज्यपाल की ओर से हस्ताक्षर करने के बाद अब राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही यह कानून पूरे प्रदेश में लागू हो गया है। इसके साथ ही 1968 से लागू पुराने कानून को नए प्रावधानों के साथ प्रतिस्थापित कर दिया गया है। नए कानून का उद्देश्य जबरन, प्रलोभन या धोखाधड़ी के जरिए किए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है।

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नए कानून के तहत किसी भी प्रकार के जबरन, प्रलोभन, झूठ, दबाव, अनुचित प्रभाव या कपटपूर्ण तरीके से कराए गए धर्मांतरण को अवैध माना गया है। इसमें डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण और सामूहिक धर्मांतरण को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। अगर कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है तो उसे पहले जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को सूचना देना अनिवार्य होगा। प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। जांच के बाद ही धर्म परिवर्तन को वैध माना जाएगा। (Law on Conversion Apply)

शादी और धर्मांतरण पर भी नजर

कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि अगर अलग-अलग धर्म के लोग विवाह करते हैं तो विवाह कराने वाले फादर, मौलवी, पंडित या संबंधित अधिकारी को शादी से 8 दिन पहले घोषणा पत्र देना होगा। सक्षम प्राधिकारी यह जांच करेगा कि विवाह सिर्फ धर्मांतरण के उद्देश्य से तो नहीं किया जा रहा। ऐसा पाए जाने पर विवाह को अवैध घोषित किया जा सकता है। अवैध धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए जुर्माना, अगर पीड़ित महिला, नाबालिग, एससी/एसटी या ओबीसी वर्ग से है तो 10 से 20 साल की जेल और 10 लाख रुपए जुर्माना, सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 साल से आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपए जुर्माना शामिल हैं। इन मामलों को संज्ञेय और अजमानतीय अपराध माना जाएगा और सुनवाई विशेष न्यायालय में होगी।

क्या नहीं माना जाएगा धर्मांतरण ?

धर्मांतरण से जुड़े संस्थानों और व्यक्तियों के लिए पंजीयन अनिवार्य किया गया है। हर साल प्रशासन को रिपोर्ट देना होगी। ग्रामसभा की भागीदारी सुनिश्चित की गई है, ताकि स्थानीय स्तर पर निगरानी बनी रहे। कानून में यह स्पष्ट किया गया है कि अगर कोई व्यक्ति अपने पैतृक धर्म में वापस लौटता है तो उसे धर्मांतरण नहीं माना जाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार का यह नया कानून धर्मांतरण के मामलों में पारदर्शिता और नियंत्रण बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि इसके क्रियान्वयन और प्रभाव को लेकर आने वाले समय में सामाजिक और राजनीतिक बहस भी तेज होने की संभावना है। (Law on Conversion Apply)

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