बस्तर में विकास बनाम वादों की सियासत, नक्सलमुक्ति के बाद नई राजनीतिक जंग शुरू

Politics Regarding Bastar: कभी नक्सल हिंसा के लिए देशभर में चर्चित रहा बस्तर अब विकास और राजनीति के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। हाल ही में बस्तर को नक्सलमुक्त घोषित करने के बाद जहां विकास कार्यों को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं, वहीं इसी मुद्दे पर सियासी घमासान भी तेज हो गया है। कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जिससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या बस्तर का विकास अब राजनीति का नया रण बन चुका है ? बस्तर के नक्सलमुक्त घोषित होने के बाद कांग्रेस ने राज्य सरकार को उसके पुराने वादे याद दिलाए हैं। पार्टी ने कहा कि सरकार ने प्रत्येक ग्राम पंचायत को 1 करोड़ रुपये देने का वादा किया था, जिसे अब पूरा किया जाना चाहिए।
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कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि जब सरकार ने खुद बस्तर को नक्सलमुक्त घोषित कर दिया है तो उसे अपने वादे के मुताबिक हर ग्राम पंचायत को 1 करोड़ रुपए देने चाहिए, ताकि विकास कार्यों को गति मिल सके। कांग्रेस इसे बस्तर के समग्र विकास के लिए जरूरी कदम बता रही है और सरकार पर वादा पूरा करने का दबाव बना रही है। कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष और बीजेपी नेता संजय श्रीवास्तव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए भ्रम फैला रही है। (Politics Regarding Bastar)
बस्तर में सुरक्षा और विकास के दावे
उन्होंने कहा कि सालों तक बस्तर को विकास से वंचित रखने वाली कांग्रेस अब हम पर सवाल उठा रही है। विकास कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। कांग्रेस को धैर्य रखना चाहिए, जो उन्होंने कभी नहीं किया, वह अब किया जाएगा। सरकार के मुताबिक बस्तर में सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार काम किया गया है। पिछले चार दशकों से नक्सल विरोधी अभियान जारी है। साल 2025 में 58 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए। 22 मार्च 2026 तक 15 और कैंप बनाए गए। इससे दुर्गम और हार्डकोर नक्सली इलाकों तक सुरक्षाबलों की पहुंच आसान हुई। सरकार ने विकास कार्यों को प्राथमिकता में रखने की बात कही है। वहीं डिप्टी CM और गृहमंत्री विजय शर्मा ने भी बस्तर में स्थिति को लेकर सकारात्मक तस्वीर पेश की है। उनके मुताबिक बस्तर से नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है।
बस्तर में नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे की दिशा में निर्णायक प्रगति: DIG
उन्होंने कहा कि हर गांव में स्कूल और राशन की दुकान उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। हर तहसील पंचायत में पीएचसी और सीएचसी स्थापित किए जा रहे हैं। उज्ज्वला योजना के तहत गैस चूल्हों का वितरण किया जा रहा है। लाल आतंक के खत्म होने के बाद अब विकास तेजी से हो रहा है। इसी बीच सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में DGP अरुण देव गौतम ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे की दिशा में निर्णायक प्रगति हुई है। अब सिर्फ इक्का-दुक्का नक्सली ही छिपकर अपनी मौजूदगी बचाने की कोशिश कर रहे हैं। राज्य की सीमा में सक्रिय बड़े हथियारबंद नक्सली समूह नहीं बचे हैं। (Politics Regarding Bastar)
दावे और वादों को लेकर राजनीतिक टकराव
बस्तर में एक ओर विकास के दावे हैं तो दूसरी ओर वादों को लेकर राजनीतिक टकराव। कांग्रेस जहां आर्थिक सहायता के जरिए जमीनी विकास की बात कर रही है, वहीं बीजेपी अपने कामकाज और सुरक्षा सुधारों को उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। अब देखना यह होगा कि बस्तर में विकास की रफ्तार राजनीति से आगे निकल पाती है या यह मुद्दा आने वाले समय में और बड़ा सियासी हथियार बनता है। फिलहाल बस्तर में विकास के दावों और वादों की सियासत आमने-सामने है। एक तरफ सवालों की बौछार तो दूसरी तरफ जवाबों की झड़ी, लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बस्तर को उसका हक मिलेगा या विकास भी राजनीति की भेंट चढ़ जाएगा ?



