Bore Basi Diwas Scam: बोरे-बासी दिवस पर 8 करोड़ खर्च की होगी जांच, विधानसभा में सरकार ने किया ऐलान

Bore Basi Diwas Scam: रायपुर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के दौरान मनाए गए ‘बोरे-बासी दिवस’ को लेकर बड़ा राजनीतिक मुद्दा गरमा गया है। राज्य की मौजूदा भाजपा सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में ऐलान किया कि इस आयोजन में हुए सरकारी खर्च की जांच कराई जाएगी। विशेष विधायी समिति बनाई जाएगी, जो पूरे मामले की जांच करेगी।
विधानसभा सत्र के अंतिम दिन भाजपा विधायक राजेश मूणत ने ध्यानाकर्षण सूचना के तहत इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि 1 मई मजदूर दिवस पर आयोजित बोरे-बासी दिवस में सिर्फ रायपुर में 8 करोड़ रुपये खर्च किए गए, वह भी बिना किसी सरकारी निविदा प्रक्रिया के। इस खुलासे के बाद सदन में जोरदार बहस हुई। (Bore Basi Diwas)
श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान हुए इस (Bore Basi Diwas) आयोजन में सरकारी धन के दुरुपयोग की जांच की जाएगी। कार्यक्रम के लिए जिन एजेंसियों को काम सौंपा गया, उनमें से अधिकांश को बिना टेंडर के भुगतान किया गया।
सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2020 में बिना टेंडर के करीब 3 करोड़ रुपये का कार्य मेसर्स शुभम किराया भंडार से कराया गया था। वहीं वर्ष 2023 में 8.32 करोड़ रुपये का कार्य मेसर्स व्यापक इंटरप्राइजेज को दिया गया, और वर्ष 2024 में फिर से करीब 3 करोड़ का कार्य उसी एजेंसी से बिना निविदा करवा लिया गया।
‘बोरे-बासी दिवस’ (Bore Basi Diwas) की शुरुआत कांग्रेस शासनकाल में हुई थी। यह आयोजन प्रदेश के श्रमिकों के सम्मान में किया जाता था, जिसमें पके चावल को पानी में भिगोकर बोरे-बासी खाया जाता है। इसे श्रमिकों और ग्रामीणों का पारंपरिक भोजन माना जाता है। उस समय के मंत्रियों, IAS-IPS अधिकारियों ने भी पंगत में बैठकर यह भोजन किया था।
अब सरकार इस (Bore Basi Diwas) आयोजन में हुए खर्च और प्रक्रियाओं की विस्तृत जांच कराएगी। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, कई और परतें खुलने की संभावना जताई जा रही है।
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