ब्रह्मोस सिर्फ एक मिसाइल नहीं…हमारी सेना की ताकत का प्रतीक है: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

Defence Minister on Brahmos: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ में ब्रह्मोस एकीकरण और परीक्षण सुविधा केंद्र का वर्चुअली उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर न सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि भारत की राजनीतिक, सामाजिक और रणनीतिक इच्छाशक्ति का प्रतीक था। उन्होंने इस ऑपरेशन को आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति, सशस्त्रबलों की क्षमता और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन बताया, जिसने उन निर्दोष परिवारों को न्याय सुनिश्चित किया, जिन्होंने भारतीय धरती पर भारत विरोधी और आतंकवादी संगठनों के हाथों अपने प्रियजनों को खो दिया था।
रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को इस बात का सबूत बताया कि जब भी भारत आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करता है तो सीमा पार की जमीन भी आतंकवादियों और उनके आकाओं के लिए सुरक्षित नहीं होती। उन्होंने कहा कि “उरी में हुई आतंकी घटना के बाद सर्जिकल स्ट्राइक, पुलवामा हमले के बाद की गई एयर स्ट्राइक और अब पहलगाम हमले के जवाब में भारत की ओर से की गई कई स्ट्राइक के जरिए दुनिया ने देख लिया है कि अगर भारत की धरती पर कोई भी आतंकी हमला होता है, तो वह क्या कर सकता है। आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नया भारत सीमा के दोनों तरफ आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा। (Defence Minister on Brahmos)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह अभियान पाकिस्तान और पीओके में आतंकवादी ढांचे को ध्वस्त करने के लिए शुरू किया गया था और इसमें निर्दोष नागरिकों को निशाना नहीं बनाया गया, लेकिन पाकिस्तान ने भारत में नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया और मंदिरों, गुरुद्वारों और चर्चों पर हमला करने की कोशिश की। उन्होंने कि हमारे सशस्त्रबलों ने वीरता और संयम का परिचय दिया और पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर हमला करके मुंहतोड़ जवाब दिया। हमने न केवल सीमा से सटे सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की, बल्कि हमारे सशस्त्र बलों का आक्रोश रावलपिंडी तक पहुंच गया, जहां पाकिस्तानी सैन्य मुख्यालय स्थित है। (Defence Minister on Brahmos)
ब्रह्मोस भारत और रूस की शीर्ष रक्षा प्रौद्योगिकियों का संगम: रक्षा मंत्री
ब्रह्मोस एकीकरण और परीक्षण सुविधा केंद्र के बारे में रक्षा मंत्री ने कहा कि यह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के प्रयासों को मजबूत करेगा। साथ ही महत्वपूर्ण प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन करके क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देगा। उन्होंने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर उद्घाटन को एक ऐतिहासिक क्षण बताया, जो भारत की बढ़ती नवीन ऊर्जा को दर्शाता है और महत्वपूर्ण, उच्च स्तरीय समेत अग्रणी प्रौद्योगिकियों में तेजी से हो रहे वैश्विक परिवर्तन के साथ संरेखित है। उन्होंने कहा कि कहा कि ब्रह्मोस न केवल दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है, बल्कि यह भारतीय सशस्त्र बलों की ताकत, दुश्मनों के लिए प्रतिरोध का संदेश और अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए राष्ट्र की अटूट प्रतिबद्धता का संदेश है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस भारत और रूस की शीर्ष रक्षा प्रौद्योगिकियों का संगम है। (Defence Minister on Brahmos)
नौकरियों का हुआ सृजन
रक्षा मंत्री ने भारत के मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का हवाला देते हुए बताया जिन्होंने कहा था कि ‘जब तक भारत दुनिया के सामने खड़ा नहीं होगा, कोई भी हमारा सम्मान नहीं करेगा। इस दुनिया में, डर का कोई स्थान नहीं है, केवल ताकत ही ताकत का सम्मान करती है।’ रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत आज सबसे शक्तिशाली देशों में से एक है और केंद्र भारत की शक्ति को और मजबूत करने में मदद करेगा। इस सुविधा को उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारे (यूपीडीआईसी) के लिए गर्व की बात बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके द्वारा पहले ही लगभग 500 प्रत्यक्ष और 1,000 अप्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन किया जा चुका है, जो रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में राज्य की बढ़ती प्रतिष्ठा को दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का कॉरिडोर स्थापित करने का दृष्टिकोण राज्य को दुनिया के शीर्ष रक्षा उत्पादन और निर्यात गंतव्य के रूप में विकसित करने के लक्ष्य पर आधारित है। (Defence Minister on Brahmos)
ब्रह्मोस इंटीग्रेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी सेंटर
बता दें कि लखनऊ में 200 एकड़ में फैले ब्रह्मोस इंटीग्रेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी सेंटर में बूस्टर सब-असेंबली, एवियोनिक्स, प्रोपेलेंट, रैमजेट इंजन का एकीकरण किया जाएगा। परिसर में डिजाइन और प्रशासनिक ब्लॉक के साथ कार्यक्रम केंद्र की भी योजना बनाई जा रही है। लगभग 300 करोड़ रुपअ की लागत वाला यह परिसर लंबे समय तक उद्योग और उद्यमियों के लिए कौशल विकास के मार्ग को प्रशस्त करेगा। इस परिसर को समर्थन देने के लिए सहायक और सब-असेंबली का पूरा रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र आसपास के क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। यह औद्योगिकीकरण और ITI के छात्रों, पर्यवेक्षकों, इंजीनियरों के कौशल विकास में बड़ी मदद करेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि लोगों को नौकरी के अवसरों की तलाश में पलायन करने के लिए मजबूर न होना पड़े। (Defence Minister on Brahmos)



