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छत्तीसगढ़ में जल्द पूर्णकालिक DGP की नियुक्ति, अरुण देव गौतम सबसे आगे

UPSC के नोटिस और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सरकार तेज़ी से निर्णय के मूड में

रायपुर। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से प्रभारी के रूप में चल रहे पुलिस महानिदेशक (DGP) पद पर जल्द ही पूर्णकालिक नियुक्ति होने के संकेत मिल रहे हैं। इस पद के लिए IPS अरुण देव गौतम (1992 बैच) और IPS हिमांशु गुप्ता (1994 बैच) के नाम प्रमुख रूप से चर्चा में हैं, जिनमें अरुण देव गौतम का पलड़ा भारी माना जा रहा है।

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दरअसल, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा जारी नोटिस की समय-सीमा समाप्त होने और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद राज्य सरकार इस मामले में जल्द फैसला लेने की तैयारी में है। UPSC ने राज्य से पूछा था कि अब तक स्थायी DGP की नियुक्ति क्यों नहीं की गई।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का दबाव

UPSC ने 3 जुलाई 2018 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए स्पष्ट किया था कि किसी भी राज्य में ‘प्रभारी’ DGP की नियुक्ति नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में यह पद लंबे समय से प्रभारी के भरोसे चल रहा था।

13 मई 2025 को UPSC ने राज्य सरकार को दो वरिष्ठ IPS अधिकारियों ‘अरुण देव गौतम और हिमांशु गुप्ता’ का पैनल भेजा था। सामान्यतः तीन नाम भेजे जाते हैं, लेकिन इस बार योग्य विकल्प सीमित होने के कारण केवल दो नाम ही शामिल किए गए।

पूर्व DGP अशोक जुनेजा के 4 फरवरी 2025 को सेवानिवृत्त होने के बाद अरुण देव गौतम को प्रभारी DGP की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

कोर्ट ने जताई सख्ती

सुप्रीम कोर्ट ने ‘प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार’ मामले में पहले ही DGP नियुक्ति की स्पष्ट प्रक्रिया तय कर रखी है। वहीं, 5 फरवरी 2026 को ‘टी. धंगोपल राव बनाम UPSC’ मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नियुक्ति में देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए जिम्मेदारी तय करने की बात कही थी।

अरुण देव गौतम का प्रोफाइल

अरुण देव गौतम उत्तर प्रदेश के कानपुर के पास अभयपुर गांव के निवासी हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में एमए और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय कानून में एमफिल किया है। 1992 बैच के IPS अधिकारी गौतम को राष्ट्रपति पुलिस पदक, भारतीय पुलिस पदक और संयुक्त राष्ट्र पुलिस पदक से सम्मानित किया जा चुका है।

छत्तीसगढ़ गठन के बाद उन्होंने राज्य कैडर चुना और कोरिया, रायगढ़, जशपुर, राजनांदगांव, सरगुजा और बिलासपुर जैसे जिलों में एसपी के रूप में सेवा दी। झीरम घाटी नक्सली हमले (2013) के बाद उन्हें बस्तर आईजी बनाया गया, जहां उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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