Google Analytics —— Meta Pixel

High Court judgement : हमर लैब घोटाले में शशांक चोपड़ा को जमानत नहीं, हाई कोर्ट ने कहा- संगठित आर्थिक अपराध

High Court judgement : छत्तीसगढ़ की चर्चित हमर लैब घोटाले में मोक्षित कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। 411 करोड़ रुपए के इस घोटाले में जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच ने याचिका खारिज कर दी। अदालत ने टिप्पणी की कि यह एक संगठित आर्थिक अपराध है, जिससे राज्य सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है।

राज्य सरकार की हमर लैब योजना के तहत 2021 में विभिन्न जिलों में मेडिकल उपकरण और रीजेंट की भारी मात्रा में खरीदी की गई थी। आरोप है कि मोक्षित कॉर्पोरेशन और अन्य कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग और छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों ने मिलकर बिना बजट और प्रशासनिक स्वीकृति के जरूरत से ज्यादा और महंगे दामों में खरीदी की।

यह भी पढ़ें :- Raipur Bilaspur road accident : हाइवा की टक्कर से 12 साल के बच्चे की मौत, उग्र भीड़ ने पुलिस पर किया पथराव, FIR दर्ज

जांच एजेंसी के अनुसार, शशांक चोपड़ा ने निविदा शर्तों में हेरफेर कर टेंडर प्राप्त किया और क्लोज सिस्टम वाली मशीनों की आपूर्ति कर बाजार में एकाधिकार बना लिया। आरोप है कि उसने अपने रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम पर फर्जी कंपनियां बनाकर लगभग 150 करोड़ रुपए के फर्जी बिल तैयार किए। इससे सुनिश्चित किया गया कि आगे चलकर सिर्फ उसी की कंपनी से रीजेंट खरीदे जाएं। (High Court judgement)

राज्य सरकार की ओर से उपमहाधिवक्ता डॉ. सौरभ पांडे ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी मास्टरमाइंड है और इस घोटाले में कई सरकारी अधिकारी अब भी जांच के घेरे में हैं। उसे जमानत मिलने पर सबूतों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका बनी रहेगी। (High Court judgement)

घोटाले में उपकरणों की कीमतों में भारी गड़बड़ी भी उजागर हुई है। उदाहरण के तौर पर EDTA ट्यूब जो सामान्यतः 8.50 रुपए में उपलब्ध होती है, उसे 2352 रुपए प्रति नग की दर से खरीदा गया। इसी तरह CBC मशीनें जो बाजार में 5 लाख रुपए में मिलती हैं, उन्हें 17 लाख रुपए में खरीदा गया। (High Court judgement)

Back to top button
error: Content is protected !!