PM नरेंद्र मोदी संग नॉर्डिक देशों की एकजुट आवाज, वैश्विक संकट, युद्ध और बदलती विश्व व्यवस्था पर जताई गहरी चिंता

India Nordic Summit 2026: नॉर्वे के ओस्लो में आयोजित भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के दौरान नॉर्डिक देशों के प्रधानमंत्रियों ने PM मोदी के साथ वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, लोकतंत्र, AI, हरित ऊर्जा और बदलती भू-राजनीतिक चुनौतियों पर व्यापक चर्चा की। नॉर्वे, डेनमार्क और आइसलैंड के प्रधानमंत्रियों ने नियम-आधारित विश्व व्यवस्था, शांति, स्थिरता और भारत-नॉर्डिक साझेदारी को भविष्य की वैश्विक ताकत बताया। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में नॉर्वे के PM जोनास गहर स्टोर ने कहा कि नॉर्डिक प्रधानमंत्रियों ने नॉर्डिक-भारत संदर्भ में तीसरी बैठक के लिए भारत के प्रधानमंत्री से मुलाकात की है। मुझे ओस्लो में प्रधानमंत्री मोदी की मेजबानी करके बहुत खुशी हुई है। हमारी एक अच्छी बैठक हुई और अंतरराष्ट्रीय एजेंडे के विषयों पर अच्छी चर्चा हुई।
यह भी पढ़ें:- आतंकवाद के खिलाफ भारत और नॉर्डिक देशों का संयुक्त रुख, कहा- कोई समझौता नहीं, कोई दोहरा मापदंड नहीं
PM जोनास ने आगे कहा कि हमने वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और उन बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों पर महत्वपूर्ण चर्चाएं की हैं, जिनका हम सभी सामना कर रहे हैं। हमने सुरक्षा, व्यापार और अपने आर्थिक संबंधों को और गहरा कैसे बनाया जाए, इस पर चर्चा की है, क्योंकि अब EFTA देशों और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौते हो चुके हैं। ऐसे समय में जब यूरोप और मध्य पूर्व में युद्ध चल रहे हैं और आपूर्ति श्रृंखलाओं समेत ऊर्जा बाजारों में भारी चुनौतियां हैं। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने कहा कि हम सभी जो इस मंच पर खड़े हैं, एक नियम-आधारित विश्व व्यवस्था में विश्वास रखते हैं। दुर्भाग्य से, पुरानी विश्व व्यवस्था तेजी से बदल रही है और यह सही दिशा में नहीं जा रही है इसलिए, पहले से कहीं ज्यादा यह जरूरी है कि जो साझेदार वास्तव में लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं, वे मिलकर काम करें। (India Nordic Summit 2026)

प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने आगे कहा कि हम यह नहीं कह सकते कि भारत एक ‘मध्यम शक्ति’ है। आप दुनिया की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक हैं। यह कहना भी बहुत आसान नहीं है कि नॉर्डिक देश एक ‘मध्यम शक्ति’ हैं, क्योंकि ‘मध्यम शक्ति’ होने के लिए हम बहुत छोटे हैं, लेकिन जब हम नॉर्डिक देश एकजुट होते हैं तो हम एक ‘मध्यम शक्ति’ बन जाते हैं। दुनिया की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक के साथ मिलकर इन बहुत ही स्पष्ट विचारों और मूल्यों पर काम करते हुए मुझे लगता है कि हम एक ऐसी दुनिया में स्थिरता, समृद्धि और एकता ला सकते हैं, जो तेजी से बदल रही है। इसलिए हमने इस बात पर चर्चा की कि भारत और नॉर्डिक देशों को और ज्यादा कैसे एकीकृत किया जाए। विशेष रूप से जब बात लोकतंत्र, AI, नई तकनीकों, हरित बदलाव, रक्षा और सुरक्षा की आती है। (India Nordic Summit 2026)

आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रून फ्रॉस्टाडॉटिर ने कहा कि मेरी प्रधानमंत्री मोदी के साथ पहली द्विपक्षीय बैठक हुई, जो हमारे लिए बहुत ही रोमांचक बैठक थी, क्योंकि इन दोनों देशों के बीच हमारे पास बताने के लिए एक बहुत अच्छी कहानी है। यह शिखर सम्मेलन हमारे लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण समय पर हो रहा है, जहां हम यह दिखा सकते हैं कि भले ही हम एक समूह के तौर पर नॉर्डिक देशों के तौर पर भारत से मीलों दूर हैं, लेकिन आइसलैंड जैसे देश के लिए भी जो आकार और पैमाने में बहुत अलग है। ऐसी बहुत सी चीजें हैं, जो हमें आपस में जोड़ती हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने हमारी विशेषज्ञता का जिक्र किया, जब भूतापीय ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा की बात आती है, तो हम अपनी विशेषज्ञता साझा करके बहुत खुश होते हैं और हम जानते हैं कि बदले में हमें भी कुछ मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि हमने मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए देखा है, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री मोदी ने किया था कि आइसलैंड से भारत में आने वाले निवेश में बढ़ोतरी हुई है, इसलिए ऐसी बहुत सी चीजें हैं, जो हम मिलकर कर सकते हैं और मैं बस एक बात कहना चाहूंगी कि मुझे ‘संबंध’ शब्द बहुत पसंद है। यह एक बहुत ही विशुद्ध आइसलैंडिक शब्द है और लोग इस भाषा के प्रति बहुत समर्पित हैं प्रधानमंत्री मोदी, क्योंकि लोगों को आज इसी चीज की जरूरत है। उन्हें आज और ज्यादा ‘संबंधों’ की जरूरत है। भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन ने साफ संकेत दिया कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत और नॉर्डिक देश लोकतंत्र, शांति, तकनीक, हरित विकास और नियम-आधारित विश्व व्यवस्था को मजबूत करने के लिए साथ खड़े हैं। PM नरेंद्र मोदी और नॉर्डिक प्रधानमंत्रियों की यह साझी प्रतिबद्धता आने वाले समय में वैश्विक स्थिरता और सहयोग को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।




