छत्तीसगढ़ विधानसभा में गूंजा छातिम पेड़ का मुद्दा, सरकार ने रोक या हटाने से किया इनकार

Issue of Chhatim Tree: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में छातिम पेड़ और उससे होने वाले नुकसान का मुद्दा उठा। भाजपा विधायक सुनील सोनी ने इस पेड़ को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताते हुए इसके रोपण पर रोक लगाने और पहले से लगे पेड़ों को हटाने की मांग की। प्रश्नकाल के दौरान विधायक सुनील सोनी ने पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी से सवाल किया कि क्या छातिम पेड़ के दुष्प्रभावों को देखते हुए इसके रोपण पर प्रतिबंध लगाया गया है या फिर पहले से लगे पेड़ों को हटाने या विस्थापित करने की कोई योजना है।
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इस पर मंत्री ओपी चौधरी ने जवाब देते हुए कहा कि फिलहाल छातिम पेड़ के रोपण पर कोई रोक नहीं लगाई गई है और न ही इन्हें हटाने की कोई कार्ययोजना तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से इस दिशा में कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। हालांकि मंत्री ने यह भी जोड़ा कि अगर भविष्य में किसी पेड़ से नुकसान की स्थिति सामने आती है तो सरकार सकारात्मक निर्णय लेने से पीछे नहीं हटेगी। मंत्री ने आगे बताया कि छातिम पेड़ के नए पौधों का रोपण भविष्य में नहीं किया जाएगा, जबकि जो पेड़ पहले से लगाए जा चुके हैं, उनके संबंध में आगे आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। (Issue of Chhatim Tree)
क्या है छातिम पेड़ ?
छातिम के पेड़ को वैज्ञानिक रूप से अल्स्टोनिया स्कॉलरिस कहा जाता है। ये एक सदाबहार और ऊंचा पेड़ होता है। इसे ‘सप्तपर्णी’ या ‘डेविल ट्री’ के नाम से भी जाना जाता है। यह अक्टूबर के महीने में फूलता है और इसकी तीव्र गंध दूर तक फैलती है। इसके फूलों से निकलने वाले परागकण और तेज गंध से सांस की दिक्कत, दमा और एलर्जी की समस्या बढ़ सकती है। पेड़ से निकलने वाला दूधिया रस जहरीला होता है, जो मनुष्य और पशुओं के लिए हानिकारक हो सकता है। कुछ क्षेत्रों में इसके कारण भूजल स्तर पर नकारात्मक प्रभाव की शिकायतें सामने आई हैं।

इन दुष्प्रभावों के बावजूद आयुर्वेद में छातिम पेड़ का विशेष महत्व है। इसकी छाल का उपयोग मलेरिया, दस्त, त्वचा रोग और सांप के काटने जैसे इलाजों में किया जाता है। फिलहाल सरकार ने छातिम पेड़ को लेकर कोई सख्त निर्णय नहीं लिया है, लेकिन सदन में उठे इस मुद्दे के बाद भविष्य में इसके प्रभावों पर गंभीरता से विचार किए जाने के संकेत जरूर मिल रहे हैं। हालांकि सरकार ने फिलहाल स्थिति यथावत रखने की बात कही है। इस बीच स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े पहलुओं को देखते हुए आने वाले समय में इस मुद्दे पर बड़ा फैसला संभव माना जा रहा है। अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि जनस्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच संतुलन कैसे साधा जाएगा। (Issue of Chhatim Tree)



