सक्ती हादसे को लेकर गरमाई राजनीति, कांग्रेस ने दिया हत्या करार, जांच के लिए गठित की टीम

Politics on Sakti Accident: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। 14 अप्रैल को हुए इस हादसे में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है। जबकि 14 मरीजों का इलाज रायगढ़ मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और रायपुर के अस्पतालों में जारी है। घटना के बादृ परिजनों ने प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। इस घटना को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। PCC चीफ दीपक बैज ने इसे हादसा नहीं, हत्या करार दिया। साथ ही मृतकों के परिजनों को 1-1 करोड़ रुपए और घायलों को 50-50 लाख रुपए मुआवजे देने की मांग की है।
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बैज ने मामले की जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति गठित की है, जिसकी अध्यक्षता पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को सौंपी गई है। यह समिति मौके पर जाकर पीड़ित परिवारों, मजदूरों और स्थानीय लोगों से बातचीत कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके अलावा पूर्व मंत्री नंदकुमार वर्मा समेत कई विधायक और संगठन के पदाधिकारी सदस्य बनाए गए हैं। समिति में विधायक रामकुमार यादव (चंद्रपुर), अटल श्रीवास्तव (कोटा), बावनलाल साहू (बेमेतरा), राघवेंद्र सिंह (अकलतरा), व्यास कश्यप (जांजगीर-चांपा), शेषराज हरबंश (पामगढ़) और जिला कांग्रेस अध्यक्ष शामिल हैं। पूर्व डिप्टी CM टीएस सिंहदेव ने भी इस हादसे को प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताते हुए सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्लांट में एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं थी, जो गंभीर सुरक्षा चूक को दर्शाता है।

वहीं कोरबा सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने आरोप लगाया कि वेदांता के संयंत्रों में पहले भी ऐसे हादसे हो चुके हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों में सुधार नहीं किया गया। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों और प्रबंधन पर FIR दर्ज करने और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। चंद्रपुर से कांग्रेस विधायक रामकुमार यादव ने आरोप लगाया कि पूर्व में एथेना पावर प्लांट रहे इस संयंत्र को वेदांता ने खरीदा, लेकिन मशीनों की सही रिपेयरिंग नहीं की गई और क्षमता से ज्यादा उत्पादन लिया गया, जिससे बॉयलर ब्लास्ट जैसी स्थिति बनी। उन्होंने कहा कि आसपास के अन्य उद्योगों में भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी हो रही है, जिसे रोकने के लिए सरकार को सख्त निरीक्षण व्यवस्था लागू करनी चाहिए।

वहीं राज्य सरकार की ओर से श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद लापरवाही पाए जाने पर श्रम कानून के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे और किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी दंडाधिकारी जांच के आदेश दिए हैं। हादसे के बाद स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रभावितों के इलाज के लिए आसपास के सभी अस्पतालों को अलर्ट किया गया है और प्रशासन पूरी तरह राहत कार्य में जुटा है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं। कांग्रेस को ऐसी घटनाओं पर राजनीति नहीं करना चाहिए। कांग्रेस लगातार सरकार और प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि उच्च स्तरीय जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आएगी। कुल मिलाकर यह हादसा न सिर्फ औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी जवाबदेही की बड़ी मांग पैदा कर रहा है। जांच समितियों और सरकारी आश्वासनों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा या यह एक और चेतावनी भरा हादसा बनकर रह जाएगा। (Politics on Sakti Accident)



