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सक्ती के वेदांता पावर प्लांट ब्लास्ट में अब तक 20 लोगों की मौत, अपनों की तलाश में भटकते रहे परिजन

Sakti Plant Accident Update: सक्ती जिले के सिंघीतराई इलाके में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए बॉयलर ब्लास्ट ने पूरे प्रदेश को दहला दिया है। मंगलवार दोपहर हुए इस भीषण हादसे में कुल 36 मजदूर प्रभावित हुए थे, जिनमें से अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि गंभीर रूप से घायल 14 मजदूर अलग-अलग अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। हादसे की शुरुआत प्लांट के बॉयलर फटने से हुई, जिसमें 4 मजदूरों की मौत मौके पर ही हो गई थी। इसके बाद कई गंभीर रूप से झुलसे मजदूरों को रायगढ़ और रायपुर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान लगातार मौतों का सिलसिला जारी रहा। 5 एयर एम्बुलेंस स्टैंडबाय पर रखी गई हैं। वहीं रेफरल के लिए हैदराबाद के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल से टाई-अप किया गया है।

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रायगढ़ मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और रायपुर के निजी अस्पतालों में भर्ती कुछ मजदूरों ने दम तोड़ दिया, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर 19 तक पहुंच गई। मृतकों में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के मजदूर शामिल हैं, जिससे यह हादसा कई राज्यों के परिवारों के लिए एक बड़ा सदमा बन गया है। घटना के बाद अस्पतालों में अफरा-तफरी का माहौल रहा। रायगढ़ और रायपुर के अस्पतालों में एक साथ दर्जनों घायलों के पहुंचने से व्यवस्था चरमरा गई। कई घायलों की हालत 50 से 100 प्रतिशत तक झुलसने जैसी गंभीर बताई गई, जिसके चलते ICU में लगातार इलाज चल रहा है। रायगढ़ के जिंदल अस्पताल में लगभग 10 मजदूर भर्ती हैं, जबकि अन्य मरीज बालाजी मेट्रो और रायपुर के निजी अस्पतालों में भर्ती हैं। (Sakti Plant Accident Update)

इस हादसे के बाद सबसे दर्दनाक तस्वीरें उन परिजनों की सामने आईं, जो अपने अपनों की तलाश में अस्पताल दर अस्पताल भटकते रहे। कई परिवारों को 20 से 22 घंटे तक यह तक नहीं पता चला कि उनके परिजन जिंदा हैं या नहीं। लोग रातभर सक्ती और रायगढ़ के 5-6 अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे, ICU में जाकर अपनों को खोजते रहे, लेकिन कई जगह उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली। कई परिजनों ने आरोप लगाया कि प्लांट प्रबंधन और अस्पताल प्रशासन की ओर से समय पर सूची या स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई। कुछ परिवारों की स्थिति इतनी खराब रही कि वे भूखे-प्यासे अस्पतालों के बाहर बैठे रहे। कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि प्लांट प्रबंधन ने ठहरने के लिए होटल की व्यवस्था तो बताई, लेकिन वहां भी उनसे पैसे मांगे गए, जिससे वे और परेशान हो गए। (Sakti Plant Accident Update)

हादसे में जान गंवाने वालों मजदूरों की पहचान

  • रितेश कुमार- सोनबरसा, भागलपुर (बिहार)
  • अमृत लाल पटेल- मंझापारा, डभरा, सक्ती (छत्तीसगढ़)
  • थंडा राम लहरे- मालखरौदा, सक्ती (छत्तीसगढ़)
  • तरुण कुमार ओझा- सिंदरी, धनबाद (झारखंड)
  • आकिब खान- दरभंगा (बिहार)
  • सुसांत जना- पूर्व मेदिनीपुर (पश्चिम बंगाल)
  • अब्दुल करीम- (झारखंड)
  • उधव सिंह यादव- रायगढ़, (छत्तीसगढ़)
  • शेख सैफुद्दीन- हल्दिया, (पश्चिम बंगाल)
  • पप्पू कुमार- सोनभद्र (उत्तर प्रदेश)
  • अशोक परहिया- पलामू, (झारखंड)
  • मानस गिरी- पूर्व मेदिनीपुर, (पश्चिम बंगाल)
  • बृजेश कुमार- सोनभद्र, (उत्तर प्रदेश)
  • रामेश्वर महिलांगे- जांजगीर-चांपा, (छत्तीसगढ़)
  • कार्तिक महतो- पुरुलिया, (पश्चिम बंगाल)
  • नदीम अंसारी- सक्ती, (छत्तीसगढ़)
  • शिबनाथ मुर्मू- पुरुलिया, (पश्चिम बंगाल)

एक ओर अपने परिजन की हालत की चिंता और दूसरी ओर जानकारी के अभाव ने लोगों को पूरी रात मानसिक रूप से तोड़ दिया। हादसे के बाद मृतकों के शवों को लेकर भी अव्यवस्था सामने आई। अस्पतालों में फ्रीजर कम पड़ने की स्थिति बनी, जिससे कई शवों को अस्थायी रूप से स्ट्रेचर पर रखा गया। कुछ शव देर रात तक प्लांट परिसर में भी रखे होने की जानकारी सामने आई, जिससे परिजनों में आक्रोश और बढ़ गया। फिलहाल प्रशासन ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं और राहत-बचाव कार्य के साथ-साथ घायलों के इलाज पर नजर रखी जा रही है। हालांकि इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन तैयारी और मजदूरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जबकि परिजनों का दर्द और इंतजार अब भी अस्पतालों के गलियारों में साफ देखा जा सकता है।

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