Mahakumbh Stampede : महाकुंभ में घटी घटना दुर्भाग्यपूर्ण और चिंता का विषय, याचिका SC में खारिज, कहा- हाई कोर्ट जाएं

Mahakumbh Stampede : सुप्रीम कोर्ट ने महाकुंभ में हुई भगदड़ (Mahakumbh Stampede) को एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता वकील विशाल तिवारी को इलाहाबाद हाई कोर्ट जाने को कहा। भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने तिवारी से कहा कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और चिंता का विषय है, लेकिन उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएं। एक न्यायिक आयोग का गठन पहले ही किया जा चुका है। राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पीठ को बताया कि भगदड़ की घटना की न्यायिक जांच चल रही है। उन्होंने उच्च न्यायालय में दायर एक ऐसी ही याचिका की ओर भी इशारा किया।
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सुप्रीम कोर्ट ने महाकुंभ में हुई भगदड़ (Mahakumbh Stampede) को एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता वकील विशाल तिवारी को इलाहाबाद हाई कोर्ट जाने को कहा। भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने तिवारी से कहा कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और चिंता का विषय है, लेकिन उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएं। एक न्यायिक आयोग का गठन पहले ही किया जा चुका है। राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पीठ को बताया कि भगदड़ की घटना की न्यायिक जांच चल रही है। उन्होंने उच्च न्यायालय में दायर एक ऐसी ही याचिका की ओर भी इशारा किया।
महाकुंभ के सबसे पवित्र दिन, 29 जनवरी को सुबह होने से पहले भीड़ पुलिस बैरिकेड्स को तोड़ते हुए नदी के किनारे के एक संकीर्ण हिस्से की ओर बढ़ी। श्रद्धालुओं ने पानी तक पहुंचने की कोशिश कर रहे लोगों को कुचल दिया। अधिकारियों ने कहा कि भगदड़ रात एक बजे से दो बजे के बीच हुई, जब लाखों लोग गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम पर स्नान करने के लिए आगे बढ़े, जिससे सुरक्षा व्यवस्था भारी पड़ गई।
जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो
याचिका में केंद्र और सभी राज्यों को पक्षकार बनाया गया है. इसमें केंद्र और राज्य सरकारों को सामूहिक रूप से काम करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है. ताकि महाकुंभ में श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किया जा सके. याचिका में कहा गया है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह याचिका दायर की गई है जिसमें महाकुंभ में भगदड़ की घटनाओं को रोकने के लिए राज्य सरकारों को दिशानिर्देश देने का अनुरोध किया गया है. याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत से आग्रह किया है कि वह उत्तर प्रदेश सरकार को भगदड़ की घटना पर स्थिति रिपोर्ट पेश करने और लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दे.
वीआईपी मूवमेंट सीमित किया जाए
याचिका में सभी राज्यों द्वारा कुंभ मेला क्षेत्र मे सुविधा सेंटर खोलने की मांग की गई है. जिससे गैर हिन्दी भाषी लोगों को सुविधा मिले. याचिका में ये भी मांग की गई है कि ऐसे आयोजनो मे वीआईपी मूवमेंट सीमित किया जाए. ज्यादा से ज्यादा स्पेस आम आदमी के लिए रखा जाए. याचिका में बड़े धार्मिक आयोजनों में भगदड़ से बचने और लोगों को सही जानकारी दिए जाने के लिए देश की प्रमुख भाषाओं में डिस्पले बोर्ड लगाने, मोबाइल, व्हाट्सएप पर राज्यों द्वारा अपने तीर्थयात्रियों को जानकारी दिए जाने की मांग की गई है.
बता दें प्रयागराज में जारी महाकुंभ के दौरान संगम क्षेत्र में 29 जनवरी को भगदड़ मचने से कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई थी और 60 अन्य लोग घायल हो गए थे.



