ईरान से जंग के बीच ट्रंप का यू-टर्न, अब ईरानी तेल से हटाया प्रतिबंध
ऊर्जा संकट कम करने की कोशिश, अमेरिका ने सीमित समय के लिए दी छूट, बाजार में आ सकता है 140 मिलियन बैरल तेल

Strait of Hormuz : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा संकट के बीच अमेरिका ने ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी है। इस फैसले का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रही तेल कीमतों को नियंत्रित करना और सप्लाई दबाव को कम करना है।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी सामान्य लाइसेंस के तहत ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल कार्गो, जो न्यूयॉर्क समयानुसार निर्धारित समय से पहले जहाजों पर लादे गए हैं, उनकी बिक्री को 19 अप्रैल तक अनुमति दी गई है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) बना संकट का केंद्र
स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज (Strait of Hormuz)में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20% तेल परिवहन का प्रमुख रास्ता है।
इजराइल और ईरान के बीच तनाव के चलते हालात और बिगड़े हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।
112 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड
वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
सीमित और अस्थायी राहत
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने इस फैसले को “सीमित और अस्थायी” बताया है। उनके मुताबिक, इससे बाजार में करीब 140 मिलियन बैरल तेल की अतिरिक्त आपूर्ति हो सकती है, हालांकि ईरान को इससे मिलने वाली रकम तक पहुंच आसान नहीं होगी।
रणनीतिक भंडार से भी तेल जारी
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से 45 मिलियन बैरल से अधिक तेल जारी किया है और शिपिंग नियमों में भी अस्थायी ढील दी है, ताकि ट्रांसपोर्ट लागत कम की जा सके।
चुनावी असर और बढ़ती महंगाई
नवंबर में होने वाले चुनावों से पहले अमेरिका में बढ़ती ईंधन कीमतें एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती हैं। महंगाई के चलते सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी पर दबाव बढ़ रहा है।
ईरान की चेतावनी, तनाव बरकरार
इस बीच, ईरान ने जवाबी हमलों का दायरा बढ़ाने की चेतावनी दी है। क्षेत्र में ऊर्जा ढांचे पर हमलों से वैश्विक सप्लाई चेन पर लगातार दबाव बना हुआ है।
यह पूरा घटनाक्रम नवरोज के दौरान सामने आया है, जब क्षेत्र पहले से ही अस्थिर माहौल से गुजर रहा है।
अमेरिका का यह कदम अल्पकालिक राहत दे सकता है, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।



