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शनिवार 18 सितम्बर के वैदिक उपाय : आज ग्रह जन्य अनिष्ट नाशक एवं सफलता के लिए वैदिक उपाय, मनोकामना होगी पूरी

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अनमोल न्यूज 24 

रोजगार, व्यापार या कार्य विशेष हेतु प्रस्थान के पूर्व – अदरक या घी, तेल एवं भात ग्रहण कर प्रस्थान करना चाहिए।
भोजन (ग्रहण या उपयोग करना चाहिए) : खिचड़ी (खीर)
दान पदार्थ – अन्नविशेष उड़द
पूतिका (पोई) भोजन वर्जित।
तिथि में तैल मर्दन नए घर का निर्माण करना तथा नए घर में प्रवेश तथा यात्रा का त्याग करना चाहिए।
वर्जित -तुलसी तोडना ,मांसाहार,सेम,मटर,शहद ,खीरा,ककड़ी,तेल, आवला.इनके उत्पादव्यंजन|
कार्य के पूर्व – विष्णु की पूजा करके मनुष्य सदा विजय मिलती है।
ॐ नारायणाय नम:।।  विष्णवेनम:।।
मिथुन, कर्क राशी वाले बाधा नाश के लिए अवश्य करें।

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कार्य के पूर्व :- लक्ष्‍मी देवी का स्मरण एवं उनको कमल पुष्प या सफेद पुष्प एवं दूध से बनी चीजों का भोग लगाये। 

श्रीम ह्रीं कलीम अष्टमहालक्ष्म्यै नम:।। रिद्धि, सिद्धि, समृद्धि देहि में नम:।।

दिन के अनुसार मन्त्र दान स्नान उपाय :

शनि ग्रह अनिष्ट नाशक एवं सफलता के उपाय – कुंडली में, दशा –अन्तर्दशा में होने पर, अशुभ भाव में होने पर दोष के अनिष्ट नाश हेतु अथवा बुध ग्रह की प्रसन्नता/कृपा के लिए उपाय :

किसी भी मन्त्र के अंत में अवश्य कहे- *सर्वसिद्धिम, सफलताम च सर्व वान्छाम पूरय पूरय में नम:/स्वाहा। 

सुख, सौभाग्य वृद्धि के लिए आज का वैदिक उपाय :

स्नान जल में काले तिल को मिला कर स्नान करें।
पीपल वृक्ष की जड़ के समीप तिल तैल का दीपक लगाए।
दीपक वर्तिका लाल,नारंगी या अनेक रंग की हो (श्वेतनहीं)|
दीपक की बत्ती की दिशा उत्तर श्रेष्ठ,पूर्व दिशा उत्तम।

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मंत्र बोले :-

ॐ पिप्पलाद, गाढ़ी, कौशिक ऋषये नमः। मन्त्र जाप।
विष्णवे नम:,हनुमतेनम:।। सर्ववांछाम पूरयपूरय च सर्व सिद्धिम देहि में नम।।शमी वृक्ष पर जल अर्पण करें। 

पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक अर्पण।

बाधा मुक्ति के लिए दान :-

उड़द ,तिल, काला, वस्त्र, नीले पुष्प, लोभान का दान करे।
दान किसे दें – काली गाय, वृद्ध, सेवक को दे सकते है।
दिन दोष आपत्ति निराकरण के लिएघर से प्रस्थान पूर्व क्या खाएं :
तिल, भात, उड़द, अदरक में से कोई या सभी पदार्थ उपयोग करना चाहिए। जिन का शनि ठीक न हो वे उड़द प्रयोग न करे।

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शनिग्रह के दोष शांति के लिए व सफलता के लिए आज के मंत्र :

जैन धर्म मंत्र :-
णमो लोए सव्वसाहूणं|

शनि का गायत्री मंत्र :
(गायत्री मन्त्र पश्चात् गृहस्थ को आवश्यक है बोलना )

आपो ज्योति रस अमृतम। परो रजसे सावदोम|
त्रिपद मंत्र की तुलना मे श्रेष्ठ पंच पाद गायत्री मंत्र प्रयोग करे।
ॐ सूर्य पुत्राय विद्महे, मृत्यु रुपाय धीमहि, तन्नो सौरिः प्रचोदयात् ॥
आपो ज्योति रस अमृतम। परो रजसे सावादोंम।
या
ऊॅ भगभवाय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि तन्नौ शनिः प्रचोदयात्।
आपो ज्योति रस अमृतम। आपो ज्योति रस अमृतम।
शनीश्वर, शनैश्चर, शनी ॐ काकध्वजाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि तन्नो मन्दः प्रचोदयात्॥
ॐ शनैश्चराय विद्महे सूर्यपुत्राय धीमहि तन्नो मन्दः प्रचोदयात्॥
ॐ सूर्यपुत्राय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि तन्नः सौरिः प्रचोदयात्॥

राहू :

राहु ॐ नाकध्वजाय विद्महे पद्महस्ताय धीमहि तन्नो राहुः प्रचोदयात् ॥
ॐ शिरोरूपाय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नो राहुः प्रचोदयात् ॥
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥108बार

शनि – ब्रह्माण्डपुराण – 03 बार

सूर्यपुत्रो दीर्घदेहा विशालाक्ष:शिवप्रिय:। मन्दचार: प्रसन्नात्मा पीडां हरतु मे शनि:।।
(हे सूर्य के पुत्रदीर्घ देह विशाल नेत्रोंमंद गति से चलने वाले, भगवान् शिव के प्रिय तथा प्रसन्न आत्मा शनि मेरी पीड़ा को दूर करें)

शनि – ॐ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शं योरभि स्त्रवन्तु न:।। (यजु. 36।12)

शाबर मन्त्र (श्रद्धा आवश्यकशुद्धता सामान्य) :

ओम गुरूजी थावर वार। थावर आसन थरहरो। पॉंच तत्व की विद्या करो पॉंच तत्व कासाधो करो विचार। तो गुरू पावूं थावर वार शनिवार कश्यप गोत्र कृष्ण वर्ण तेईस हजार जाप सोरठ देश पश्चिम स्थान धनुषाकार मंडल, तीन अंगुल़, मकर कुम्भ राशि के गुरू को नमस्कार। सत फिरे तो वाचा फिरे, पान फूल वासना सिंहासन धरे। तोइतरो काम थावर जी महाराज करे। ओम फट् स्वाहाll
कार्य के पूर्व :-चंद्रमा की पूजा करता है उसका संपूर्ण संसार पर अपना आधिपत्य हो जाता है पितृगण पूजित होने पर सदैव प्रसन्न होकर प्रजावृद्धिधन-रक्षाआयु तथाबल-शक्ति प्रदान करते हैं।

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