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17 सितम्बर के वैदिक उपाय : आज ग्रह जन्य अनिष्ट नाशक एवं सफलता के वैदिक उपाय, मिलेगी सफलता

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आज 17 सितम्बर 2021, दिन – शुक्रवार। आज ग्रह जन्य अनिष्ट नाशक एवं सफलता के वैदिक उपाय। वैदिक उपाय को अपनाकर अपना आज का दिन उत्तम बना सकते हैं।

रोजगार, व्यापर या कार्य विशेष हेतु प्रस्थान के पूर्व :- कच्चा दूध प्रयोग करे।
भोजन (ग्रहण या उपयोग करना चाहिए) :- नारियल के उत्पाद व्यंजन।
दान करें :- गाय का घी या गाय के घी का दीपक।
आज न खायें :- परवल, चावल या चावल के उत्पाद व्यंजन। शिम्बी (सेम), मटर, चावल या चावल से बने कोई भी भोजन पदार्थ भोज्य पदार्थ वर्जित।

कार्य के पूर्व :- विश्वेदेवों की भली प्रकार से पूजा करनी चाहिए। वे भक्त को संतान, धन-धान्य और पृथ्वी प्रदान करते हैं।
ॐ विश्वेदेवाय नम:। विष्णवे नम:।

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मेष, वृश्चिक राशी वाले बाधा नाश के लिए करें यह उपाय  

कार्य के पूर्व : लक्ष्‍मी देवी का स्मरण एवं उनको कमल पुष्प या सफेद पुष्प एवं दूध से बनी चीजों का भोग लगाये।
श्रीम ह्रीं कलीम अष्टमहालक्ष्म्यै नम:। रिद्धि, सिद्धि, समृद्धि देहि में नम:।

दिन के अनुसार मन्त्र, दान स्नान के उपाय : शुक्र ग्रह हेतु : कुंडली में, दशा –अन्तर्दशा में होने पर, अशुभ भाव में होने पर दोष के अनिष्ट नाश हेतु अथवा शुक्र ग्रह की प्रसन्नता/कृपा के लिए उपाय (अविवाहित एवं दाम्पत्य सुख के लिए पुरुषों को अवश्य उपयोग करना चाहिए)

किसी भी मन्त्र के अंत में अवश्य कहे- सर्वसिद्धिम, सफलताम च सर्व वान्छाम पूरय पूरय में नम:/ स्वाहा।

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अनिष्ट नाशक एवं सफलता के उपाय

जैन मंत्र :

श्री सुविधिनाथ भगवान या श्री पुष्पदंत भगवान ।
ॐ ह्रीं शुक्र ग्रहारिष्ट निवारक-श्री पुष्पदन्त नाथ जिनेन्द्राय नम:
सर्व शांतिं कुरु कुरु स्वाहा।|

मम (अपना नाम) दुष्टग्रहरोगकष्टनिवारणं सर्वशांतिं कुरू कुरू हूँ फट् स्वाहा।

बाधा मुक्ति के लिए दान :- चावल, चांदी, मिश्री, सफेद पुष्प। दही, सफेद वस्त्र, सफेद चंदन सुगंधित द्रव्य दान करें।

शुक्र गायत्री मंत्र :-
(गायत्री मन्त्र पश्चात् गृहस्थ को आवश्यक है बोलना)

आपो ज्योति रस अमृतम| परो रजसे सावदोम |
ओम भृगुजाय विद्महे दिव्यदेहाय धीमहि
तन्नो शुक्रः प्रचोदयात्। आपो ज्योति रस अमृतम। परो रजसे सावादोंम।

शुक्र ॐ अश्वध्वजाय विद्महे धनुर्हस्ताय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्॥
ॐ रजदाभाय विद्महे भृगुसुताय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्॥
ॐ भृगुसुताय विद्महे दिव्यदेहाय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्॥

पौराणिक मंत्र (ब्रह्माण्डपुराण के अनुसार) :-
108 बार ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः॥ का जाप करें।

मंत्र पढ़े :
दैत्यमन्त्री गुरुस्तेषां प्राणदश्च महामति:।
प्रभु: ताराग्रहाणां च पीडां हरतु मे भृगु:।।
दैत्यों के मंत्री और गुरु तथा उन्हें जीवनदान देने वाले तारा ग्रहों के स्वामी महान् बुद्धि संपन्न शुक्र मेरी पीड़ा को दूर करें।

ॐ अन्नात्परिस्त्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपित्क्षत्रं पय: सोमं प्रजापति:।
ऋतेन सत्यमिन्द्रियं विपानं शुक्रमन्धस इन्द्रस्येन्द्रियमिदं पयोऽमृतं मधु।।
(यजु. 19।75)

शाबर मन्त्र :– (श्रद्धा आवश्यक, शुद्धता सामान्य)

ओम गुरू जी शुक्रवार शुक्राचार।
मन धरो धीर।
कोई नर नारी वीर।
नौ नाड़ी बहत्तरकोठा की रक्षा करें।
शुक्रवार भार्गव गोत्रश्वेत वर्ण सोलह हजार जाप, भोजकटदेश पूर्व स्थानपंचकोण मंडल ९ अंगुल वृष तुला राशि के गुरू को नमस्कार।
सत फिरे तो वाचा फिरे। पान फूल वासना सिंहासन धरे। तो इतरो काम शुक्रवार जी महाराज करे। ओम फट् स्वाहा ll

दान किसे दे :- सफ़ेद गाय, कन्या या देवी मंदिर मे दान करें।

दिन दोष आपत्ति निराकरण के लिए घर से प्रस्थान पूर्व क्या खाएं : कच्चा दूध, जौ barley।
यदि जन्म कुंडली मे शुक्र अच्छा हो उनको दही अवश्य उपयोग करना चाहिए।

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