पेपर लीक के बाद दोबारा हुई 12वीं की हिंदी परीक्षा, जांच में अब भी पुलिस के हाथ खाली, सियासत भी जारी

12th Class Hindi Exam: छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की ओर से 12वीं बोर्ड की हिंदी विषय की परीक्षा शुक्रवार को दोबारा आयोजित की गई। यह परीक्षा पहले पेपर लीक विवाद के चलते रद्द कर दी गई थी। री-एग्जाम कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हुआ। माशिमं के मुताबिक परीक्षा सुबह 9 बजे से शुरू होकर दोपहर 12:15 बजे तक चली। सुबह 9 बजे तक छात्रों की उपस्थिति अनिवार्य थी। 9:05 बजे उत्तर पुस्तिकाएं वितरित की गई। 9:10 बजे प्रश्न पत्र दिया गया। 9:15 बजे से लेखन कार्य शुरू हुआ। इस परीक्षा में प्रदेशभर से करीब 2 लाख 36 हजार 821 स्टूडेंट शामिल हुए। जबकि 2 हजार 356 छात्र-छात्राएं अनुपस्थित रहे।
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बता दें कि 2 लाख 39 हजार 177 छात्र-छात्राएं रजिस्टर्ड थे। परीक्षा के दौरान नकल का एक भी मामला सामने नहीं आया। परीक्षा के लिए 2395 सेंटर बनाए गए थे। पेपर लीक की घटना को देखते हुए इस बार बोर्ड पूरी तरह सतर्क नजर आया। प्रश्न पत्र पैकेट में वन टाइम लॉक सिस्टम लगाया गया था। सामग्री को GPS लॉक युक्त कंटेनरों से भेजा गया। स्ट्रॉन्ग रूम को वन टाइम लॉक से सील किया गया था। सीलिंग प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई। वीडियो कॉल के माध्यम से लॉक खोलने की निगरानी की गई। केंद्राध्यक्षों पर भी विशेष निगरानी रखी गई। परीक्षा के बाद उपयोग किए गए लॉक को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जमा करना अनिवार्य किया गया था। (12th Class Hindi Exam)

क्यों रद्द हुई थी पहले की परीक्षा ?
दरअसल, 14 मार्च को आयोजित हिंदी परीक्षा का बी सेट प्रश्न पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। 15-16 मार्च को लीक के दावे सामने आए। मामले की जांच के लिए माशिमं ने साइबर थाना और सिटी कोतवाली में FIR दर्ज कराई थी। 23 मार्च 2026 को परीक्षा समिति की बैठक में परीक्षा निरस्त करने का निर्णय लिया गया। री-एग्जाम देने वाले छात्रों ने बताया कि इस बार पेपर पहले से आसान आया, लेकिन दोबारा परीक्षा से समर वेकेशन प्रभावित हुआ। छात्रों ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए। (12th Class Hindi Exam)
जांच में अब तक नहीं मिली सफलता
पेपर लीक मामले में अब तक पुलिस के हाथ खाली हैं। घटना को लगभग एक महीना बीत चुका है, लेकिन अब तक एक भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। पुलिस ने जांच के लिए टीम गठित करने की बात कही है। इस मामले को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि पेपर लीक और बीजेपी की सांठगांठ हर जगह देखने को मिलती है। पेपर लीक हुए एक महीना हो गया है, लेकिन कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बावजूद अब तक एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक में बीजेपी जनप्रतिनिधियों का हाथ है। इसलिए कार्रवाई नहीं हो रही है। इस पर पलटवार करते हुए कैबिनेट मंत्री श्याम बाहरी जायसवाल ने कहा कि जिनकी रही भावना जैसी।
शिक्षा मंत्री ने पेपर लीक से किया इनकार
मंत्री जायसवाल ने कहा कि कांग्रेस का भावना वैसा ही है। इनके कार्यकाल में PSC घोटाला हुआ था, लेकिन हमारे नियत में कही नहीं है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। सुशासन की सरकार है। कोई दोषी नहीं बचेगा। वहीं स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि पिछली बार भी सुरक्षा व्यवस्था थी। इस बार और ज्यादा कड़ाई बरती गई है। उन्होंने कहा कि पिछली बार पेपर लीक नहीं हुआ था। सिर्फ शक के आधार पर जांच के निर्देश दिए गए थे और पेपर रद्द की कार्रवाई की गई थी। संभावना जताई जा रही है कि वन टाइम लॉक और GPS ट्रैकिंग जैसी व्यवस्था को आने वाली परीक्षाओं में भी लागू किया जाएगा, ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके। कुल मिलाकर पेपर लीक विवाद के बाद आयोजित यह री-एग्जाम प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा था, जिसे इस बार सख्त सुरक्षा के साथ पूरा किया गया। हालांकि जांच में देरी और आरोपियों की गिरफ्तारी न होना अब भी चिंता का विषय बना हुआ है।



