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सक्ती प्लांट हादसा में अब तक 20 मजदूरों की मौत, लापरवाही के आरोप में चेयरमैन समेत 10 पर FIR

FIR in Plant Accident: सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुए भीषण बॉयलर विस्फोट में मृतकों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है, जबकि 15 मजदूर अभी भी अलग-अलग अस्पतालों में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हादसे में कुल 36 मजदूर झुलसे थे। मृतकों में 4 छत्तीसगढ़ के निवासी हैं, जबकि अन्य उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से हैं। मामले में पुलिस ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर के निर्देश पर थाना डभरा में वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, प्लांट हेड देवेंद्र पटेल समेत 10 अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

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FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) (लापरवाही से मौत), 289 (खतरनाक मशीनरी में लापरवाही) और 3(5) (साझा जिम्मेदारी) के तहत दर्ज की गई है। पुलिस के मुताबिक जांच के आधार पर आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है। औद्योगिक सुरक्षा विभाग और फॉरेंसिक टीम की शुरुआती जांच में प्लांट प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई है। बॉयलर फर्नेस में अत्यधिक मात्रा में ईंधन जमा हो गया था, जिससे अचानक अत्यधिक दबाव बना। दबाव के कारण बॉयलर का निचला पाइप अपनी जगह से हट गया और विस्फोट हो गया। यह पूरा दबाव 1-2 सेकेंड के भीतर तेजी से बढ़ा, जिससे सिस्टम को बंद करने का मौका नहीं मिला। (FIR in Plant Accident)

तकनीकी खामियां और चेतावनी की अनदेखी

जांच में यह भी सामने आया कि उत्पादन बढ़ाने की जल्दबाजी में बॉयलर का लोड 350 मेगावाट से बढ़ाकर करीब 590 मेगावाट कर दिया गया था। रिपोर्ट में कई गंभीर तकनीकी खामियों का जिक्र किया गया है, जिसमें पीए फैन में बार-बार खराबी, अनबर्न फ्यूल का जमा होना, पाइपिंग सिस्टम का फेल होना, बैकअप सिस्टम का समय पर काम नहीं करना, मशीनों के रखरखाव और संचालन में लापरवाही शामिल हैं। बताया गया कि चेतावनी संकेतों के बावजूद काम नहीं रोका गया, जिससे हादसा और भी गंभीर हो गया। घटना के समय मौजूद मजदूरों ने दावा किया कि विस्फोट से पहले न तो कोई सायरन बजा और न ही अलर्ट जारी किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धमाके के बाद पूरा क्षेत्र धुएं और धूल से भर गया, लेकिन राहत व्यवस्था भी तुरंत उपलब्ध नहीं थी। घायलों को बसों में अस्पताल पहुंचाया गया।

मजदूरों में दहशत, 2000 ने छोड़ा प्लांट

हादसे के बाद भय का माहौल है। प्लांट परिसर के लेबर क्वार्टर में रहने वाले 2000 से अधिक मजदूर अपने घर लौट चुके हैं। वर्तमान में वहां केवल लगभग 50 मजदूर ही बचे हैं। घायलों का इलाज रायगढ़ और रायपुर के अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। गुरुवार को उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने रायगढ़ पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और हाल जाना। वहीं नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने भी अस्पताल जाकर पीड़ितों से मुलाकात की। कलेक्टर अमृत विकास टोपनो ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच में कई बिंदुओं पर फोकस किया जाएगा, जिसमें हादसा कैसे और किन परिस्थितियों में हुआ, जिम्मेदार व्यक्ति और तकनीकी कारण, उस दिन ड्यूटी पर मौजूद मजदूरों का विवरण, पूर्व निरीक्षण और कार्रवाई, भविष्य में ऐसे हादसों की रोकथाम के उपाय शामिल हैं। रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर मांगी गई है।

Sakti Power Plant Accident

हादसे के बाद वेदांता प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपए और एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा की है। घायलों को 15-15 लाख रुपए दिए जाएंगे। इसके अलावा प्रधानमंत्री राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए, राज्य सरकार की ओर से मृतकों को 5 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए देने की घोषणा की गई है। पुलिस ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की है, जिसमें पुलिस, फॉरेंसिक और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। (FIR in Plant Accident)

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