सक्ती वेदांता प्लांट हादसे में ओवरलोडिंग और लापरवाही आई सामने, सुरक्षा इंतजाम फेल

Negligence in Plant Accident: सक्ती जिले के सिंहितराई स्थित सक्ती के थर्मल पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 15 घायल मजदूरों का इलाज जारी है। हादसे के बाद प्लांट में काम कर रहे मजदूरों में दहशत का माहौल है और बड़ी संख्या में श्रमिक काम छोड़कर अपने घर लौट चुके हैं। हादसे की शुरुआती जांच में सामने आया है कि उत्पादन बढ़ाने के दबाव में बॉयलर पर क्षमता से ज्यादा लोड डाला गया। औद्योगिक सुरक्षा विभाग के बॉयलर इंस्पेक्टर उज्ज्वल गुप्ता की टीम ने करीब 6 घंटे तक जांच की, जिसमें यह पाया गया कि अचानक लोड बढ़ाने के कारण बॉयलर पर दबाव बढ़ा और विस्फोट हो गया।
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मजदूरों के मुताबिक प्लांट की निर्धारित क्षमता 600 मेगावाट है, लेकिन इसे 650 मेगावाट तक चलाया जा रहा था। झारखंड से आए फिटर इंदर देव राणा ने बताया कि अत्यधिक गर्मी के बीच ओवरलोडिंग करना एक बड़ी लापरवाही थी। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हादसे के समय कोई सायरन नहीं बजा और न ही किसी तरह का अलर्ट जारी किया गया। बंगाल से आए फिटर ने बताया कि अचानक तेज धमाका हुआ और पूरा इलाका धूल और धुएं से भर गया। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि मौके पर एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं थी। घायलों को बसों के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया, जिससे राहत कार्य में देरी हुई।
पहले भी हो चुका है पाइप फटने का हादसा
बिहार से आए फिटर के मुताबिक एक साल पहले टेस्टिंग के दौरान पाइप फटने से गैस लीकेज हुआ था, लेकिन उस समय पहले से चेतावनी जारी कर दी गई थी, जिससे बड़ा हादसा टल गया था। इस बार उत्पादन के दौरान बिना किसी चेतावनी के हादसा हो गया। हादसे के बाद प्लांट में काम कर रहे मजदूरों में भय का माहौल है। करीब 1200 से 2000 मजदूर अपने घर लौट चुके हैं और लेबर क्वार्टर लगभग खाली हो गए हैं। अब गिनती के 20 से 50 मजदूर ही वहां बचे हैं। सुपरवाइजर अनिल कुमार राय ने बताया कि जब तक सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जाती, मजदूर वापस काम पर लौटने को तैयार नहीं हैं। (Negligence in Plant Accident)
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
मजदूरों ने आरोप लगाया है कि हादसे के बाद लेबर क्वार्टर में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। कुछ स्थानीय लोग वहां पहुंचकर मजदूरों पर प्रदर्शन में शामिल होने का दबाव बना रहे थे, लेकिन पुलिस या प्रशासन की ओर से कोई ठोस सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई। दूर-दराज से आए मजदूरों का कहना है कि वे 25 से 30 हजार रुपये की मजदूरी के लिए यहां काम करते हैं। प्लांट बंद होने के बाद उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। कई मजदूरों ने यह भी कहा कि उन्हें यह तक नहीं बताया जा रहा कि रुकने पर वेतन मिलेगा या नहीं। प्लांट अधिकारियों ने बताया कि बॉयलर यूनिट से टर्बाइन तक जाने वाली हाई-प्रेशर स्टीम पाइप में लीकेज के कारण विस्फोट हुआ। यही भाप टर्बाइन को घुमाकर बिजली उत्पादन करती है। (Negligence in Plant Accident)
पहले भी कई बार बंद रहा प्लांट
यह कोयला आधारित थर्मल पावर प्रोजेक्ट कुल 1200 मेगावाट क्षमता का है, जिसमें दो यूनिट (प्रत्येक 600 मेगावाट) शामिल हैं। इस परियोजना का निर्माण 2009 में शुरू हुआ था और 2022 में वेदांता लिमिटेड ने इसे अधिग्रहित किया। पहली यूनिट अगस्त 2025 में चालू हुई थी, जबकि दूसरी यूनिट का निर्माण जारी है और इसके 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक शुरू होने की संभावना है। जानकारी के मुताबिक यह यूनिट पहले भी कई बार मेंटेनेंस के चलते बंद की जा चुकी है। हाल ही में 16 से 22 मार्च तक प्लांट में काम पूरी तरह ठप रहा था। यह हादसा न सिर्फ औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े करता है, बल्कि श्रमिकों की सुरक्षा, आपातकालीन व्यवस्था और प्रबंधन की जिम्मेदारी पर भी गंभीर चिंताएं पैदा करता है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि यह महज तकनीकी विफलता थी या लापरवाही का परिणाम।



