छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक बना कानून, राज्यपाल रमेन डेका की मिली मंजूरी

Freedom of Religion Act: छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 अब कानून बनने की दिशा में आगे बढ़ गया है। राज्यपाल रमेन डेका ने इस विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। सरकार जल्द ही इसकी अधिसूचना जारी करेगी, जिसके बाद यह पूरे प्रदेश में कानून के रूप में लागू हो जाएगा। यह विधेयक बजट सत्र के दौरान 19 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य जबरन, प्रलोभन या कपटपूर्ण तरीके से होने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है। राज्य सरकार का कहना है कि इस कानून के जरिए अवैध धर्मांतरण के मामलों पर सख्त नियंत्रण किया जाएगा और दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी।
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कानून की प्रमुख विशेषताएं
- जबरन धर्मांतरण पर रोक- बल, प्रलोभन, झूठ, मिथ्या जानकारी, दबाव या अनुचित प्रभाव के जरिए धर्म परिवर्तन कराना पूरी तरह अवैध माना जाएगा।
- स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया- अगर कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है तो उसे पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देनी होगी। इसके बाद 30 दिनों तक सार्वजनिक आपत्तियों के लिए समय दिया जाएगा।
- विवाह और धर्मांतरण- अंतरधार्मिक विवाह कराने वाले पादरी, मौलवी या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति को विवाह से 8 दिन पहले घोषणा करनी होगी। अगर विवाह धर्मांतरण के उद्देश्य से पाया गया तो उसे अवैध घोषित किया जा सकता है।
- पैतृक धर्म में वापसी- इसे धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।
- डिजिटल माध्यम भी शामिल- ऑनलाइन या डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण कराने को भी कानून के दायरे में रखा गया है।
सजा और जुर्माने का प्रावधान
- अवैध धर्मांतरण पर 7 से 10 साल तक की जेल और 5 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है।
- पीड़ित अगर महिला, नाबालिग, SC/ST/OBC वर्ग से हो तो 10 से 20 साल की जेल और 10 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है।
- सामूहिक धर्मांतरण पर 10 साल से आजीवन कारावास और 25 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है।
- सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे और मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में होगी।
इसे लेकर सियासत भी तेज हो गई है। भाजपा विधायक और रायपुर में धर्मांतरण के खिलाफ जगन्नाथ सेना बनाकर अभियान चलाने वाले पुरंदर मिश्रा ने कहा कि अब धर्मांतरण कराने वालों पर सख्त कार्रवाई हो सकेगी। इसमें कड़ी सजा का प्रावधान है। वहीं PCC चीफ दीपक बैज ने कहा कि राज्यपाल ने बीजेपी सरकार के धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिया है, जो अच्छी बात है, लेकिन राज्यपाल को ये भी बताना चाहिए कि कांग्रेस सरकार के दौरान के भेजे गए आरक्षण संबंधी विधेयक पर कब हस्ताक्षर करेंगे, जो ढाई-तीन साल से राज्यपाल के पास अटका हुआ है। (Freedom of Religion Act)

अब अधिसूचना का इंतजार
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि इस तरह के कानून पहले भी भेजे गए थे और कुछ मामलों में संवैधानिक और न्यायिक स्तर पर विचार जारी है, इसलिए इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा जरूरी है। अब सभी की नजर सरकार की ओर से जारी की जाने वाली अधिसूचना पर है। इसके लागू होते ही छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल हो जाएगा, जहां धर्मांतरण को लेकर सख्त कानूनी प्रावधान लागू हैं। छत्तीसगढ़ का धर्म स्वातंत्र्य कानून एक ओर जहां सरकार के लिए कानून-व्यवस्था और सामाजिक संतुलन का मुद्दा है, वहीं दूसरी ओर यह राजनीतिक बहस और संवैधानिक चर्चा का केंद्र भी बन गया है। आने वाले समय में इसका असर कानून व्यवस्था और राजनीति दोनों पर देखने को मिल सकता है। यानी कानून बन चुका है, लेकिन इस पर चर्चा और टकराव अभी जारी रहेगा।



