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हरियाली तीज : आज अपने पति की लम्बी आयु के लिए 16 श्रृंगार कर व्रत रखेंगी पत्नियां

रायपुर। छत्तीसगढ़

हिन्दू धर्म में व्रत और त्योहारों का बहुत महत्त्व माना जाता है। इसी तरह हिन्दू धर्म में सावन का महीना त्योहारों का महीना माना जाता है। सावन का महीना शुरू होते ही देशभर में त्यौहार शुरू हो जाते हैं। इन्हीं में से एक त्योहार है- ‘हरियाली तीज’। यह त्योहार हर साल श्रावण माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इस त्योहार के विषय में मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए तपस्या की थी। इस बार यह त्यौहार 11 अगस्त यानी बुधवार को मनाया जायेगा।

हरियाली तीज पर शादीशुदा महिलाऐं अपने पति की लम्बी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन स्त्रियां सोलह श्रृंगार करती हैं, जिनमें हरी साड़ी और हरी चूड़‍ियों का विशेष महत्‍व है। दिन-भर स्त्रियां तीज के गीत गाती हैं और नाचती हैं। हरियाली तीज पर झूला झूलने का भी विधान हैं। स्त्रियां अपनी सहेलियों के साथ झूला झूलती हैं।

शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का विधान है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का दोबारा मिलान हुआ था। इसीलिए इस दिन भगवान शिव और ,माता पार्वती की पूजा की जाती है। इस दिन सुहागिन महिलाऐं भगवान शिव और माता पार्वती से अपने पति की लम्बी आयु की कामना करती हैं।

पूजा और श्रृंगार सामग्री
हरियाली तीज के दिन व्रत रखा जाता है और पूजा के लिए कुछ जरूरी सामान की आवश्‍यकता होती है। पूजा के लिए काले रंग की गीली मिट्टी, पीले रंग का कपड़ा, बेल पत्र, जनेऊ, धूप-अगरबत्ती, कपूर, श्रीफल, कलश, अबीर, चंदन, तेल, घी,दही, शहद दूध और पंचामृत चाहिए। वहीं, इस दिन पार्वती जी का हरा श्रृंगार किया जाता है और इसके लिए हरी चूड़‍ियां, हरी चुनरी,आल्‍ता, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, हरी कंघी, शीशा, काजल, कुमकुम, सुहाग पूड़ा और श्रृंगार की अन्‍य हरी चीजों की जरूरत होती है।

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