तमिलनाडु में सत्ता पर सस्पेंस, विजय थलापति की शपथ पर ग्रहण !

Tamil Nadu Political Drama: तमिलनाडु की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त सस्पेंस और हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिल रहा है। पश्चिम बंगाल में जहां सुवेंदु अधिकारी ने शपथ ग्रहण कर लिया। वहीं तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने थलापति विजय की मुख्यमंत्री पद की शपथ पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी विजय की पार्टी TVK सत्ता की दहलीज तक तो पहुंच गई, लेकिन बहुमत के गणित में फंसती नजर आ रही है। शुक्रवार को विजय ने राज्यपाल से तीसरी बार मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया। इसके बाद शनिवार को शपथ ग्रहण की चर्चाएं तेज हो गईं, लेकिन देर रात अचानक राजनीतिक समीकरण बदल गए और शपथ ग्रहण पर फिलहाल सस्पेंस गहरा गया।
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तमिलनाडु की सियासत में दिनभर जोड़तोड़, समर्थन, गठबंधन, बैकडोर बैठकों और डिप्टी CM पद को लेकर सौदेबाजी का दौर चलता रहा। विजय के समर्थन में TVK, कांग्रेस, CPI और CPI(M) के कुल 116 विधायकों के समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंपे गए। हालांकि IUML और VCK ने अब तक औपचारिक समर्थन पत्र नहीं दिया है। इन दोनों दलों के पास 2-2 विधायक हैं और विजय को बहुमत के लिए महज दो और विधायकों की जरूरत है। इससे पहले भी 6 और 7 मई को विजय सरकार बनाने का दावा पेश कर चुके थे, लेकिन राज्यपाल ने स्पष्ट कर दिया था कि 118 विधायकों का समर्थन दिखाए बिना सरकार गठन का न्योता नहीं दिया जा सकता। दरअसल, विजय की पार्टी TVK को कांग्रेस, CPI, CPI(M) और VCK जैसे दलों का समर्थन मिलने की चर्चा है। आंकड़ों के लिहाज से गठबंधन बहुमत के करीब पहुंचता दिख रहा था, लेकिन ऐन वक्त पर VCK के दो विधायकों का समर्थन पत्र नहीं मिलने से पूरा मामला अटक गया।
VCK बनी सत्ता की ‘किंगमेकर’
तमिलनाडु की सत्ता की चाबी फिलहाल विदुथलाई चिरुथैगल काची यानी VCK के हाथ में मानी जा रही है। पार्टी प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने शुरुआती संकेत दिए थे कि VCK, वाम दलों की तरह TVK को समर्थन दे सकती है। पार्टी ने इस मुद्दे पर ऑनलाइन बैठक भी की, लेकिन बाद में बयान जारी कर कहा गया कि अंतिम फैसला आज घोषित किया जाएगा। इसी वजह से TVK खेमे की बेचैनी बढ़ गई है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज हो गई कि VCK ने समर्थन के बदले थिरुमावलवन के लिए डिप्टी मुख्यमंत्री पद की मांग रखी है। सूत्रों के मुताबिक TVK शहरी विकास मंत्रालय देने को तैयार थी, लेकिन डिप्टी CM पद को लेकर सहमति नहीं बन सकी। माना जा रहा है कि इसी वजह से समर्थन की घोषणा में देरी हुई। इधर, AMMK के महासचिव टीटीवी दिनाकरन ने भी पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिनाकरन के आरोप से बढ़ा विवाद
दिनाकरन ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी AIADMK को समर्थन दे रही है, लेकिन टीवी पर यह दिखाया गया कि उनकी पार्टी ने TVK का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि या तो समर्थन पत्र फर्जी है या फिर विधायकों की खरीद-फरोख्त का मामला हो सकता है। इस बयान के बाद तमिलनाडु की सियासत और गर्मा गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि विजय जिस समर्थन पत्र के साथ राज्यपाल से मिले, वह पूरी तरह वैध है या फिर समर्थन जुटाने की कवायद में कोई बड़ा राजनीतिक खेल चल रहा है। इस बीच विजय के समर्थक लगातार उनके मुख्यमंत्री बनने की उम्मीद जता रहे हैं। विजय के घर के बाहर समर्थकों ने पटाखे फोड़कर जश्न भी मनाया और सोशल मीडिया पर भी उनके समर्थन में माहौल बना हुआ है। (Tamil Nadu Political Drama)
समर्थन की राजनीति में उलझे विजय
थलापति विजय ने पहली ही चुनावी पारी में तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। करोड़ों फैंस के दम पर उन्होंने राज्य की राजनीति में मजबूत एंट्री की है, लेकिन सत्ता तक पहुंचने का रास्ता अभी भी छोटे दलों और समर्थन के जटिल गणित से होकर गुजर रहा है। अब तमिलनाडु की नजरें VCK के अंतिम फैसले और बाकी सहयोगी दलों की औपचारिक घोषणा पर टिकी हैं। आने वाले कुछ घंटे तय करेंगे कि तमिलनाडु की सत्ता आखिर किसके हाथ में जाएगी और क्या थलापति विजय मुख्यमंत्री पद की शपथ ले पाएंगे या नहीं। कुल मिलाकर तमिलनाडु की सत्ता इस वक्त महज कुछ विधायकों और समर्थन पत्रों के सहारे झूलती नजर आ रही है। थलापति विजय जनता के बीच सुपरस्टार जरूर बन चुके हैं, लेकिन क्या वो सत्ता के भी असली खिलाड़ी साबित होंगे, इसका फैसला अब सहयोगी दलों के अगले कदम से होगा। फिलहाल तमिलनाडु में हर नजर उसी सवाल पर टिकी है क्या विजय मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे या सत्ता का ये सपना आखिरी वक्त पर अधूरा रह जाएगा।




