बिलासपुर हाईकोर्ट ने जग्गी मर्डर केस में पलटा फैसला, अमित जोगी दोषी करार, उम्रकैद की सुनाई सजा

Ramavtar Jaggi Murder Case: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में बिलासपुर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को दोषी ठहराया है। कोर्ट ने आजीवन कारावास और 1000 रुपए जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं भरने पर 6 महीने अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविन्द वर्मा की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि जब सभी आरोपियों पर एक जैसा अपराध और समान साक्ष्य हों तो किसी एक आरोपी के साथ अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता।
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कोर्ट ने कहा कि समान साक्ष्यों के आधार पर कुछ को दोषी और किसी एक को बरी करना तब तक उचित नहीं, जब तक उसके लिए अलग और ठोस कारण न हो। कोर्ट ने निचली कोर्ट के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को दोषी करार दिया। मामले में पहले सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी, लेकिन वहां से भी कोई राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को फिर हाईकोर्ट भेजा था, जहां विस्तृत सुनवाई के बाद यह फैसला आया। (Ramavtar Jaggi Murder Case)
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, 4 जून 2003 को रायपुर में NCP नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस केस में 31 आरोपियों को नामजद किया गया था। इनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। ट्रायल कोर्ट ने 2007 में अमित जोगी को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया था, जबकि अन्य 28 आरोपियों को दोषी ठहराया गया था। जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी की बरी होने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को हाईकोर्ट भेजा। हाईकोर्ट ने दो साल पहले अन्य दोषियों की सजा बरकरार रखी थी। अब विस्तृत सुनवाई के बाद अमित जोगी को भी दोषी मानते हुए सजा सुना दी गई।
सतीश जग्गी का आरोप
शुरुआती पुलिस जांच पर पक्षपात के आरोप लगे थे, जिसके बाद जांच CBI को सौंपी गई। CBI ने अपनी जांच में अमित जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सतीश जग्गी की ओर से उनके वकील ने दलील दी कि हत्या एक सुनियोजित साजिश थी। इसमें तत्कालीन राज्य सरकार की भूमिका रही। जांच के दौरान सबूतों को प्रभावित किया गया। बता दें कि कारोबारी पृष्ठभूमि से जुड़े रामावतार जग्गी पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। जब शुक्ल NCP में शामिल हुए तो जग्गी भी उनके साथ गए। उन्हें छत्तीसगढ़ में पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया था। (Ramavtar Jaggi Murder Case)
अमित जोगी के पास अंतिम कानूनी विकल्प मौजूद
इस हत्याकांड में कुल 28 लोगों को दोषी ठहराया गया, जिनमें 2 तत्कालीन CSP, एक थाना प्रभारी, पूर्व महापौर के भाई याहया ढेबर, शूटर चिमन सिंह जैसे नाम शामिल हैं। सभी को उम्रकैद की सजा दी गई थी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब अमित जोगी के पास सुप्रीम कोर्ट में अंतिम कानूनी विकल्प बचता है। कोर्ट पहले ही उन्हें निर्धारित समय में सरेंडर करने का आदेश दे चुका है। करीब 23 साल पुराने इस चर्चित हत्याकांड में हाईकोर्ट का यह फैसला छत्तीसगढ़ की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया दोनों के लिए अहम माना जा रहा है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि समान साक्ष्य के आधार पर न्याय में भेदभाव नहीं हो सकता और कानून के सामने सभी बराबर हैं।



