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राम वन गमन पथ परियोजना पर घमासान, सोशल ऑडिट कमेटी पर उठे सवाल

Ram Van Gaman Path: छत्तीसगढ़ की बहुचर्चित राम वन गमन पथ परियोजना एक बार फिर विवादों में घिर गई है। 137 करोड़ से ज्यादा की इस महत्वाकांक्षी योजना में अनियमितताओं के आरोपों के बीच गठित सोशल ऑडिट कमेटी को लेकर अब सियासी बवाल मच गया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि कमेटी के अध्यक्ष बनाए गए वरिष्ठ भाजपा विधायक अजय चंद्राकर को ही अपने पद की जानकारी नहीं है। विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि उन्हें अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि विधानसभा में पूछे गए प्रश्नों के जरिए उन्हें यह पता चला कि उन्हें सोशल ऑडिट कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि अब तक कोई बैठक नहीं हुई है और यह भी तय नहीं है कि बैठक कौन बुलाएगा। उनके इस बयान के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।

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सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से 10 जनवरी 2025 को इस उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया गया था। इस समिति में कांग्रेस विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह और विशेषज्ञ प्रोफेसर एल.एस. निगम समेत अन्य सदस्यों को शामिल किया गया था, लेकिन गठन के एक साल तीन महीने बाद भी सोशल ऑडिट की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। विधायक अजय चंद्राकर के बयान के बाद कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया कि सोशल ऑडिट कमेटी का गठन सिर्फ जनता को गुमराह करने के लिए किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान इस परियोजना के तहत कई विकास कार्य और मूर्तियां स्थापित की गई थी, लेकिन भाजपा सरकार के आने के बाद कार्यों पर रोक लगा दी गई और उल्टे भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाने लगे।

Ajay Chandrakar Speech
MLA Ajay Chandrakar

राम वन गमन पथ परियोजना की शुरुआत पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने की थी। 13 नवंबर 2019 को राज्य स्तरीय समिति का गठन हुआ और 14 नवंबर 2020 को पहली बैठक आयोजित की गई। विशेषज्ञों की शोध के आधार पर प्रदेश में भगवान श्रीराम के वन गमन से जुड़े स्थलों का चयन किया गया। इस परियोजना के तहत राजिम, शिवरीनारायण, सीतामढ़ी-हरचौका, रामगढ़, मुकुंदपुर-नगरी, चंदखुरी और चंपारण्य समेत 7 प्रमुख जगहों का विकास किया गया। इन जगहों पर प्रतिमाएं स्थापित करने के साथ-साथ पर्यटन सुविधाओं के निर्माण को मंजूरी दी गई। पहले चरण में लगभग 82 करोड़ रुपए खर्च किए गए। 9 फरवरी 2024 को पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने निर्माण कार्यों और मूर्तियों की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद सोशल ऑडिट की घोषणा की थी। इसके बाद से परियोजना के काम पूरी तरह ठप पड़ गए हैं। दूसरे चरण के लिए न तो बजट का प्रावधान किया गया है और न ही कोई नया प्रस्ताव मांगा गया है।

अधूरे काम और करोड़ों का भुगतान

जानकारी के मुताबिक इस परियोजना में अब तक करीब 82 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। इनमें से लगभग 77 करोड़ रुपए की राशि अधूरे कार्यों के बावजूद जारी कर दी गई, जिससे अनियमितताओं के आरोप और गहरे हो गए हैं। टीसीआईएल को 35.31 करोड़, वाप्कोस को 36.82 करोड़, वन मंडल अधिकारी, बलौदाबाजार को 2.5 करोड़ और वन मंडल अधिकारी, सरगुजा को 4 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। चंदखुरी, शिवरीनारायण, सिहावा और राजिम जैसे प्रमुख स्थलों पर पार्किंग, कैफेटेरिया, घाट विकास, लैंडस्केपिंग, बिजली और ड्रेनेज जैसे कई कार्य अधूरे पड़े हैं। इससे परियोजना की प्रगति पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। (Ram Van Gaman Path)

ऐतिहासिक तथ्यों पर भी उठे सवाल

बता दें कि बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर ने चंपारण और चंदखुरी जैसे स्थानों को इस परियोजना में शामिल किए जाने पर भी सवाल उठाए थे। उनका कहना है कि यह चयन ऐतिहासिक तथ्यों के अनुरूप नहीं है। पूर्व कांग्रेस सरकार ने कुल 75 स्थलों को चिह्नित कर विकास की योजना बनाई थी, जिसमें से पहले चरण में 9 प्रमुख स्थलों पर कार्य शुरू हुआ था, लेकिन जांच की घोषणा के बाद से यह पूरी परियोजना ठंडे बस्ते में जाती नजर आ रही है। पर्यटन और संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा है कि सोशल ऑडिट के लिए कमेटी गठित है और प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि परियोजना पर कोई रोक नहीं लगाई गई है।

राम वन गमन पथ परियोजना अब विकास से ज्यादा सियासत का मुद्दा बनती जा रही है। एक ओर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद काम अधूरा है, वहीं दूसरी ओर सोशल ऑडिट कमेटी की निष्क्रियता और अध्यक्ष को ही जानकारी न होना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आने वाले समय में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और गरमा सकता है। अब देखना होगा कि सरकार इस परियोजना को पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाती है या यह मामला आगे भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझा रहता है। (Ram Van Gaman Path)

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