न्यायिक मजिस्ट्रेट को जान से मारने की धमकी, आरोपी ने खुद को बताया नक्सली, 3 करोड़ की फिरौती की मांग

Threat to Judicial Magistrate: बालोद जिले के गुंडरदेही से हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रशांत कुमार देवांगन को डाक के जरिए एक धमकी भरा पत्र मिला है, जिसमें उनसे 3 करोड़ रुपए की फिरौती की मांग की गई है। साथ ही उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई है। जानकारी के मुताबिक 27 मार्च 2026 को कोर्ट कार्य के दौरान एक पोस्टमैन ने न्यायालय में एक बंद लिफाफा पहुंचाया। मजिस्ट्रेट ने जब खुद पत्र खोलकर पढ़ा तो उसमें लिखी बातें बेहद गंभीर और डराने वाली थी। इसके बाद उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए 8 अप्रैल को गुंडरदेही थाने में FIR दर्ज कराई और सुरक्षा की मांग की।
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पत्र में क्या लिखा था ?
धमकी भरे पत्र में कई गंभीर बातें सामने आई हैं। आरोपी ने खुद को नक्सली संगठन से जुड़ा बताया। मजिस्ट्रेट से 3 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी। पैसे नहीं देने पर मजिस्ट्रेट और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी। पत्र में लिखा है कि प्रशांत देवांगन रिश्वत लेकर गलत आदेश देते हैं और गरीबों को परेशान करते हैं। मजिस्ट्रेट को अपने पद का घमंड है। अगर मांगी गई राशि नहीं दी गई तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा। पत्र में मजिस्ट्रेट दफ्तर के कर्मचारियों पर भी पैसे लेकर फाइल गायब करने और आम लोगों को परेशान करने का आरोप लगाया गया है। पत्र भेजने वाले ने कहा कि वो बस्तर, कांकेर, ओडिशा और झारखंड में सक्रिय है। साथ ही लिखा है कि ऐसे लोगों को मारकर देश को बचाना उनका मकसद है। मजिस्ट्रेट पर हाईकोर्ट के आदेशों का पालन नहीं करने और पद का गलत इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया गया है। साथ ही चेतावनी दी कि अगर पैसे नहीं दिए तो कोई नहीं बचा पाएगा। (Threat to Judicial Magistrate)
नक्सली कनेक्शन की जांच
पत्र नीली स्याही से हाथ से लिखा हुआ बताया जा रहा है। लिफाफे पर एल.के.एल., बस्तर, कांकेर, छत्तीसगढ़ और न्यायालय का पता लिखा मिला है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। पुलिस इन सुरागों की जांच कर रही है। घटना के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है। अज्ञात आरोपी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। साइबर सेल और पुलिस जांच में जुटी हुई है। डाक प्रक्रिया और पत्र के स्रोत की जांच की जा रही है। संदिग्ध नेटवर्क और लिंक की तलाश की जा रही है। मजिस्ट्रेट और उनके परिवार की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। थाना प्रभारी के मुताबिक विशेष टीम बनाई गई है, जो हर पहलू की जांच कर रही है। पत्र में नक्सली संगठन का नाम होने के बावजूद पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह वास्तव में नक्सली संगठन की साजिश है या किसी शरारती व्यक्ति ने डराने की कोशिश की है। फिलहाल किसी भी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी माना जा रहा है। (Threat to Judicial Magistrate)
क्यों गंभीर है यह मामला ?
यह घटना सिर्फ एक धमकी नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था पर सीधा हमला मानी जा रही है। एक न्यायिक अधिकारी और उनके परिवार को धमकी मिलना कानून व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चुनौती है। एक न्यायिक मजिस्ट्रेट को डाक के जरिए धमकी भरा पत्र भेजकर 3 करोड़ रुपए की फिरौती मांगना और परिवार को जान से मारने की चेतावनी देना कानून व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। बालोद की इस घटना ने पूरे प्रशासन और न्यायिक तंत्र को सतर्क कर दिया है। पुलिस तेजी से जांच कर रही है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही आरोपी या उसके पीछे की साजिश का खुलासा होगा। अब देखना होगा कि पुलिस कब तक इस धमकी के पीछे की असली सच्चाई तक पहुंच पाती है।



