Google Analytics —— Meta Pixel

Nuh Violence Effect: मुस्लिम व्यापारियों की एंट्री पर पाबंदी , हरियाणा में 50 पंचायतों ने जारी किए लेटर

Nuh Violence Effect: हरियाणा के नूंह में भड़की सांप्रदायिक हिंसा की आग के बाद माहौल अब शांत होने लगा है। इसी बीच पंचायतों ने ऐसा फरमान जारी किया है जिससे टेंशन बढ़ सकती है। दरअसल, तीन जिलों- रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और झज्जर की 50 से अधिक पंचायतों ने मुस्लिम व्यापारियों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए पत्र जारी किए हैं। सरपंचों द्वारा साइन किए गए इन पत्रों में यह भी कहा गया है कि गांवों में रहने वाले मुसलमानों को पुलिस के पास अपने पहचान से संबंधित दस्तावेज जमा करने होंगे।

यह भी पढ़े :- No Confidence Motion Debate Live : कांग्रेस ने पूछा- PM मणिपुर पर मौन क्यों? BJP बोली- राहुल कभी सावरकर नहीं हो सकते

चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकांश गांवों में अल्पसंख्यक समुदाय का कोई भी निवासी नहीं है। बस कुछ परिवार हैं जो तीन से चार पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं। पत्र में कहा गया है, ‘हमारा इरादा किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं है।’ नारनौल (महेंद्रगढ़) के उप-विभागीय मजिस्ट्रेट मनोज कुमार ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि उन्हें पत्रों की भौतिक प्रतियां (फिजिकल कॉपी) नहीं मिली हैं, लेकिन उन्होंने उन्हें सोशल मीडिया पर देखा है और ब्लॉक कार्यालय से सभी पंचायतों को कारण बताओ नोटिस भेजने को कहा है।

महेंद्रगढ़ से जारी हुए 35 पत्र

उन्होंने कहा कि जब उनके कानूनी सलाहकार ने उन्हें बताया कि धर्म के आधार पर किसी समुदाय को अलग करना कानून के खिलाफ है, तो उन्होंने पत्र वापस ले लिया। मुझे नहीं पता कि यह पत्र सोशल मीडिया पर कैसे प्रसारित होने लगा। हमने इसे वापस ले लिया है। विकास के अनुसार, सैदपुर पत्र जारी करने वाला पहला गांव था और अन्य लोगों ने उसका अनुसरण किया। उन्होंने कहा कि लगभग 35 पत्र महेंद्रगढ़ के अटाली ब्लॉक से जारी किए गए थे। बाकी झज्जर और रेवाड़ी से जारी किए गए थे। (Nuh Violence Effect)

‘बड़े लोगों के कहने पर ऐसा किया’

पड़ोसी गांव ताजपुर के एक निवासी ने पत्र जारी करने के लिए नूंह में हिंसा की खबर और बड़े लोगों के उकसावे का हवाला दिया। उसने कहा कि हमें यहां कोई समस्या नहीं है। लेकिन बड़े लोगों से कॉल और मुलाक़ातें हुईं, जिसके कारण यह प्रकरण हो सकता है। कुल 750 घरों वाले इस गांव में अल्पसंख्यक समुदाय का कोई भी परिवार नहीं है। स्थानीय लोगों ने भी कहा कि उन्हें ऐसी कोई चिंता नहीं है।

पारंपरिक हरियाणवी पोशाक – शर्ट, लंबी स्कर्ट और सिर पर घूंघट लिए अपनी पत्नी के साथ बाइक पर निकलते हुए उन्होंने कहा, ‘हमारे बीच कभी कोई मतभेद नहीं रहा। धर्म हमारी दोस्ती को प्रभावित नहीं करता है। हम एक साथ बड़े हुए हैं।’ कुंजपुरा के सरपंच नरेंद्र जिन्होंने भी पत्र जारी किया था, ने कहा कि मेवात क्षेत्र से कुछ लोग पशुपालन और अन्य व्यवसायों के लिए उनके गांव आते हैं। उन्होंने कहा, ‘फिर भी, नूंह के परिदृश्य ने इन व्यवसायों पर रोक लगा दी है। इस क्षेत्र के कुछ लोग यहां रह रहे थे, लेकिन वे नूंह में अपने परिवारों के पास वापस चले गए हैं। (Nuh Violence Effect)

Back to top button
error: Content is protected !!