लोकसभा में गरजे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, कहा- महिला आरक्षण का विरोध कर रहा INDI गठबंधन

Shah in Lok Sabha: लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के लिए जो संविधान संशोधन है उसका किसी ने विरोध नहीं किया। सबने कहा कि हम इसका स्वागत करते हैं, लेकिन INDI गठबंधन के सभी सदस्यों ने अगर, मगर, किंतु, परंतु इसका उपयोग करके स्पष्ट रूप से महिला आरक्षण का विरोध किया है। कई जगह ऐसा दिखाई दिया कि विरोध हमारे दृष्टिकोण की जगह हमारे क्रियान्वयन के तरीके से है। लेकिन मैं देश की जनता को स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह विरोध हमारे क्रियान्वयन के तरीके का नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ महिला आरक्षण का ही है।
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शाह ने कहा कि हमारे संविधान में समय-समय पर परिसीमन का प्रावधान किया गया है। परिसीमन से ही SC और ST जिसकी संख्या बढ़ती है उसकी सीटें बढ़ने का भी प्रावधान है। एक प्रकार से जो परिसीमन का विरोध कर रहे हैं वह SC और ST सीटों की बढ़ोतरी का भी विरोध कर रहे हैं। कई सारे सदस्यों ने कई आशंकाएं व्यक्त की, उन्होंने कहा कि यह अभी क्यों लाया गया। मैं कहना चाहता हूं कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम में जिक्र है कि 2026 के बाद होने वाली जनगणना के बाद जो परिसीमन होगा उसमें महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। 1971 में इंदिरा गांधी की सरकार थी तब वे इसे फ्रीज करके गई थी, वह फ्रीज की गई सीटों की संख्या उठाते हैं तभी नारी शक्ति वंदन अधिनियम का क्रियान्वयन होता है इसलिए हम इसे लेकर आए।
उन्होंने कहा कि 127 सीटें ऐसी हैं, जहां 20 लाख से ज्यादा वोटर हैं। इसमें एक व्यक्ति, एक मत और एक मूल्य के सिद्धांत का पूर्णतः उल्लंघन होता है। मैं विश्वास दिलाता हूं कि परिसीमन के लिए ये लोग सहयोग कर दें, हम पर भरोसा करें, यह मूल्य एक समान हो जाएगा। 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने परिसीमन विधेयक लाकर सीटों को 525 से बढ़ाकर 545 किया और फिर इसे फ्रीज़ कर दिया। 1976 में सत्ता बचाने के लिए आपातकाल के काल में 42वें संशोधन द्वारा परिसीमन पर रोक लगा दी। उस वक्त भी कांग्रेस पार्टी ने ही परिसीमन से देश की जनता को वंचित रखा था और आज भी कांग्रेस पार्टी ही परिसीमन से वंचित रख रही है। 2001 में 84वां संशोधन हुआ और 2026 तक सीटों की संख्या को फ्रीज कर दिया गया।
केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने कहा कि विपक्ष ने कुछ भ्रांतियां फैलाई हैं। पहला- हम जाति जनगणना तो टालने के लिए यह कर रहे हैं। तीन महीने पहले हम जाति जनगणना का पूरा टाइमटेबल हम घोषित कर चुके हैं, इसे टालने का सवाल ही नहीं है। दूसरा- उत्तर बनाम दक्षिण का नैरेटिव- मैं फिर से स्पष्ट करता हूं कि दक्षिण के राज्यों का भी इस सदन पर उतना ही अधिकार है जितना उत्तर के राज्यों का है। उत्तर-दक्षिण के नैरेटिव से देश के टुकड़े-टुकड़े नहीं करना चाहिए, इससे ऊपर उठना चाहिए, जिन्होंने संविधान हाथ में लेकर शपथ ली है वे उत्तर-दक्षिण का भेद कराना चाहते हैं, हम यह नहीं होने देंगे। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल, इन पांच राज्यों का 543 सीटों में अभी प्रतिनिधित्व 129 है यानि 23.76% है। (Shah in Lok Sabha)
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि 50% वृद्धि के बाद जब हम पांचों राज्यों की सीटों का आवंटन करते हैं तो यह 129 से बढ़कर 195 होती है, जिसका 816 में 23.87% प्रतिनिधित्व होगा। किसी का नुकसान नहीं होगा। यहां कुछ सदस्यों ने भ्रांति फैलाई कि मुसलमान महिलाओं को भी आरक्षण मिले। मैं यहां सरकार, संविधान, भाजपा की नीतियों के बारे में स्पष्ट करना चाहता हूं कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को स्वीकार नहीं करता है। इस देश में कोई सबसे बड़ी OBC विरोधी पार्टी है तो वह कांग्रेस पार्टी है। इन्होंने चौधरी चरण सिंह और सीताराम केसरी, दोनों को कार्यकाल पूरा नहीं करने दिया। 1957 में काकासाहब कालेकर समिति के सुझाव आए लेकिन उन्होंने उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। 1980 में इंदिरा जी आई, मंडल आयोग का सुझाव आया तो उन्होंने उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया।
गृहमंत्री ने कहा कि 1990 में वी.पी. सिंह मंडल आयोग का क्रियान्वयन लाए तो विपक्ष के नेता राजीव गांधी ने मंडल आयोग का विरोध किया। कांग्रेस पार्टी ने अब तक एक भी OBC का प्रधानमंत्री नहीं दिया, भाजपा ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया, अति पिछड़ा समाज के व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाया। ऐसा नहीं है कि सिर्फ महिला आरक्षण विधेयक का विरोध हो रहा है, हमने धारा 370 समाप्त की, उन्होंने विरोध किया, राम मंदिर बनाया, विरोध किया, CAA लाए, विरोध किया, तीन तलाक समाप्त किया, विरोध किया, GST लाए, विरोध किया, आयुष्मान भारत बनाया, विरोध किया, नया संसद भवन बनाया, विरोध किया, CDS बनाया, विरोध किया, नक्सलवाद खत्म किया, विरोध किया, एयरस्ट्राइक, सर्जिकल स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर का विरोध किया। इन्होंने अच्छा-बुरा सोचे बिना नरेंद्र मोदी जो कर रहे हैं, उसका विरोध करने का ठान लिया है। (Shah in Lok Sabha)



