कोरबा में पुलिस को खुली चुनौती, 10 टन वजनी पुल गैस कटर से काटकर ले गए चोर

Bridge Stolen in Korba: ऊर्जाधानी के नाम से पहचाने जाने वाले कोरबा जिले से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोयला और बिजली उत्पादन में रिकॉर्ड बनाने वाला कोरबा लंबे समय से अवैध कोयला, डीजल और कबाड़ चोरी के मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। पुलिस जहां अपराधों पर लगाम लगाने का दावा कर रही है, वहीं शहर के बीचों-बीच से 10 से 15 टन वजनी लोहे के पुल की चोरी ने इन दावों की पोल खोल दी है।
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मामला कोरबा शहर के सीएसईबी चौकी क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्रमांक 17 ढोंढ़ीपारा का है, जहां रशियन हॉस्टल के पास नहर के ऊपर सालों पहले सिंचाई विभाग और तत्कालीन मध्यप्रदेश विद्युत मंडल की ओर से लोहे का पुल बनाया गया था। यह पुल करीब 50 से 60 फीट लंबा और लगभग 4 फीट चौड़ा था, जिसका उपयोग स्थानीय लोग रोजमर्रा के आवागमन के लिए करते थे, लेकिन बीते 2-3 दिनों के भीतर चोरों ने इस पूरे लोहे के पुल को गैस कटर से काटकर चोरी कर लिया। पुल के गायब हो जाने से बस्तीवासियों को अब लंबा चक्कर लगाकर दूसरी ओर जाना पड़ रहा है। (Bridge Stolen in Korba)

गैस कटर से काटा गया पुल
घटनास्थल पर पुल को काटे जाने के स्पष्ट निशान मौजूद हैं, जिससे यह साफ होता है कि चोरों ने गैस कटर का इस्तेमाल किया। पुल को काटने के बाद उसे कई हिस्सों में बांटकर किसी भारी वाहन में लोड कर ले जाया गया। मौके से करीब एक टन वजनी लोहे की प्लेट बरामद हुई है, जबकि पुल का बाकी हिस्सा पूरी तरह गायब है। चोरों की हिमाकत यहीं नहीं रुकी। रशियन हॉस्टल के पास नगर पालिका निगम की जल आवर्धन योजना के तहत बिछाई गई पाइप लाइन के लिए बनाए गए लोहे के ब्रिज और रेलिंग से भी 10 से 15 फीट तक के लोहे के एंगल काटकर चोरी कर लिए गए। इस पाइप लाइन के जरिए शहर में पानी की सप्लाई की जाती है, ऐसे में यह चोरी आम जनता की सुरक्षा और सुविधा दोनों के लिए खतरा बन गई है।
पुलिस को खुली चुनौती, FIR के बाद भी दूसरी चोरी
इस पूरे मामले की शिकायत स्थानीय पार्षद लक्ष्मण श्रीवास ने पुलिस चौकी में की। शिकायत के बाद पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू की, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि मामला दर्ज होने के बाद भी चोरों ने पुलिस को खुली चुनौती देते हुए चोरी किए गए पुल से महज 500 मीटर दूर जल आवर्धन योजना के लिए बने ब्रिज और रेलिंग से करीब 40 फीट लोहे की चोरी कर ली। पार्षद लक्ष्मण श्रीवास ने कहा कि अपने पूरे जीवन में मैंने इस तरह की चोरी कभी नहीं देखी। लोगों के आने-जाने के लिए बना 10 टन वजनी पुल ही चोर काटकर ले गए। वार्डवासियों में भारी आक्रोश है। हमने पुलिस में शिकायत की है और यह मामला कलेक्टर के संज्ञान में भी लाया गया है।
पुलिस की गश्त और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
खुलेआम इतने भारी-भरकम पुल की चोरी से यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या चोरी के दौरान कोई वाहन, क्रेन या ट्रक का इस्तेमाल हुआ ? इतनी बड़ी वारदात के समय पुलिस गश्त कहां थी ? आखिर कबाड़ इतना भारी लोहा कौन खरीद रहा है ? स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर अवैध कबाड़ कारोबार पर सख्ती होती तो इस तरह की वारदात संभव ही नहीं थी। इस मामले में सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने कहा कि पार्षद के माध्यम से पुल चोरी की शिकायत प्राप्त हुई है। यह एक पुराना लोहे का ब्रिज था। शिकायत के आधार पर बीएनएस की धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर लिया गया है। आरोपियों की तलाश की जा रही है। (Bridge Stolen in Korba)
बड़े कबाड़ चोरों तक कब पहुंचेगी पुलिस ?
वहीं एएसपी लखन पटले के मुताबिक कुछ संदेहियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, हालांकि अब तक मुख्य आरोपियों का सुराग नहीं लग पाया है। कोरबा पुलिस भले ही अवैध कबाड़, कोयला और डीजल चोरी पर लगाम लगाने की बात कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अब देखना यह होगा कि छोटी चोरी सुलझाने की वाहवाही लूटने वाली पुलिस इस 10 टन वजनी पुल चोरी जैसे बड़े और संगठित अपराध के आरोपियों तक कब तक पहुंच पाती है। (Bridge Stolen in Korba)



